- मध्य प्रदेश के हरदा जिले के किसानों को सोयाबीन फसल के लिए मिली बीमा राशि बेहद कम मिली है जो निराशाजनक है.
- किसानों का कहना है कि एक एकड़ सोयाबीन की खेती में लगभग 20000 रुपये खर्च होते हैं जबकि बीमा राशि 70 रुपये मिली.
- बीमा प्रीमियम के तौर पर प्रति एकड़ 400 रुपये नियमित रूप से काटे जाते हैं, लेकिन मुआवजा नगण्य है.
बादलों और बारिश के भरोसे खेतों में पसीना बहाने वाले किसानों को उम्मीद थी कि खराब फसल की भरपाई बीमा राशि से हो जाएगी. लेकिन जब बैंक खातों में बीमे के नाम पर 70 रुपये जैसी रकम पहुंची तो उनकी उम्मीदें टूट गईं. मध्य प्रदेश के हरदा जिले के कई गांवों के किसानों का कहना है कि एक एकड़ सोयाबीन की फसल तैयार करने में करीब 20 हजार रुपये खर्च होते हैं, प्रीमियम भी नियमित रूप से कटता है, लेकिन मुआवजे के नाम पर मिली राशि मजाक जैसी है.
बीमा राशि को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे किसान
हरदा जिले के उमरदा, नजरपुरा और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे. किसानों ने वर्ष 2025 की सोयाबीन फसल के लिए मिली बीमा राशि पर सवाल उठाते हुए विरोध प्रदर्शन किया. उनके हाथों में आवेदन थे और मन में नाराजगी. किसानों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए बीमा दावों की दोबारा जांच की मांग की.
70 रुपये मिलने पर फूटा गुस्सा
किसानों का कहना है कि फसल खराब होने के बावजूद उनके खातों में बेहद कम बीमा राशि जमा की गई है. कई किसानों को मात्र 70 रुपये तक का भुगतान मिला है. यह राशि देखकर किसान हैरान हैं और खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. उनका कहना है कि इतनी रकम से तो बीमा का उद्देश्य ही खत्म हो जाता है.
20 हजार की लागत, 300 से 400 रुपये प्रीमियम
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने बताया कि सोयाबीन की खेती में प्रति एकड़ करीब 20 हजार रुपये तक खर्च आता है. वहीं फसल बीमा के लिए 300 से 400 रुपये प्रति एकड़ तक प्रीमियम भी जमा कराया जाता है. इसके बावजूद जब नुकसान होने पर मुआवजे के रूप में केवल कुछ रुपये मिलते हैं तो किसानों में असंतोष होना स्वाभाविक है.
किसानों ने बताई अपनी पीड़ा
नजरपुरा के किसान शुभम किरार ने बताया कि उन्हें प्रति एकड़ केवल 70 रुपये की बीमा राशि मिली है. उन्होंने कहा कि जितनी रकम बीमा के रूप में मिली है, उससे कहीं ज्यादा प्रीमियम पहले ही कट चुका है. किसानों का आरोप है कि बीमा कंपनी और संबंधित विभाग को इस मामले की गंभीरता से जांच करनी चाहिए ताकि किसानों को उनका उचित हक मिल सके.
मांग पूरी नहीं हुई तो होगा बड़ा आंदोलन
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा. उनका कहना है कि हरदा, रहटगांव और अन्य क्षेत्रों में भी विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे. फिलहाल किसान प्रशासन से बीमा राशि के पुनर्मूल्यांकन और उचित मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं.
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