- एमपी की राजधानी भोपाल में मूंग की 100 प्रतिशत खरीदी और खाद वितरण सुधार की मांग को लेकर किसान आंदोलन हुआ.
- हजारों किसानों ने बैरिकेडिंग तोड़कर मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ने का प्रयास किया, जिससे सुरक्षा कड़ी कर दी.
- प्रशासन ने स्थिति नियंत्रण में रखने के लिए SAF, RAF और 20 से अधिक थानों की पुलिस बल तैनात किया.
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल मंगलवार को किसानों के बड़े आंदोलन का केंद्र बन गई. मूंग की 100 फीसदी सरकारी खरीदी, फसलों के उचित दाम और खाद वितरण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर हजारों किसान राजधानी की सड़कों पर उतर आए. हालात ऐसे बने कि किसान बैरिकेडिंग तोड़ते हुए मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ने लगे. किसानों के बढ़ते कदमों को रोकने के लिए प्रशासन को SAF, RAF और 20 से अधिक थानों की पुलिस तैनात करनी पड़ी.
सीएम हाउस से कुछ किमी दूर पहुंचे किसान
किसान आंदोलन की भीड़ मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ रही थी, जिसके बाद पुलिस ने बरकतउल्ला ब्रिज के पास मोर्चा संभाल लिया. यहां से मुख्यमंत्री निवास की दूरी करीब 7 किलोमीटर बताई जा रही है. सरकार से बातचीत फेल होने के बाद किसानों ने सड़क पर ही हनुमान चालिसा और सुंदरकांड का पाठ किया. इसके बाद सड़क पर ही दाल-बाटी बनाकर खाई. किसानों ने कहा कि सरकार के बात नहीं मानने तक यहीं बैठे रहेंगे.

किसानों ने सड़क पर ही डेरा जमा लिया है.
SAF, RAF समेत भारी पुलिस बल तैनात
स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए मौके पर SAF, RAF और 20 से ज्यादा थानों का पुलिस बल तैनात किया है. पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं. किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए विशेष सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं और पुलिस बल को अलर्ट मोड पर रखा है.

कंधे पर बैरिकेट लेकर भागे किसान.
वाटर कैनन और वज्र वाहन भी तैयार
आंदोलन को देखते हुए पुलिस ने वाटर कैनन और वज्र वाहनों को भी मौके पर तैनात किया है. अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल पुलिस संयम बरत रही है और किसानों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है. प्रशासन की कोशिश है कि स्थिति शांतिपूर्ण बनी रहे और किसी तरह का टकराव न हो.
किसान क्रांति पैदल यात्रा पहुंची भोपाल
संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में निकली 'किसान क्रांति पैदल यात्रा' मंगलवार को भोपाल पहुंची. इस यात्रा में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए. किसानों का कहना है कि उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं और सरकार को उन पर जल्द फैसला लेना चाहिए.
बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़े आंदोलनकारी
भोपाल सीमा पर मंडीदीप के पास कलियासोत नदी के पुल पर पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग लगाई थी. लेकिन हजारों किसानों ने बैरिकेड हटाकर आगे बढ़ना शुरू कर दिया. कई स्थानों पर पुलिस और किसानों के बीच धक्का-मुक्की जैसी स्थिति भी बनी, हालांकि पुलिस ने संयम बनाए रखा.

किसानों को रोकने के लिए भोपाल में भारी पुलिस बल तैनात.
मूंग खरीदी और खाद व्यवस्था प्रमुख मुद्दा
आंदोलन कर रहे किसानों की प्रमुख मांग प्रदेश में मूंग की 100 प्रतिशत सरकारी खरीदी है. किसानों का आरोप है कि उनकी उपज का पूरा खरीदी नहीं हो रही है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. इसके अलावा खाद की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था में सुधार की मांग भी आंदोलन का बड़ा मुद्दा है.
सरकार ने किसानों को दिया आश्वासन
किसान आंदोलन के बीच बीजेपी के प्रदेश महामंत्री और पूर्व सांसद सुमेर सिंह सोलंकी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार किसानों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की फसल का एक-एक दाना खरीदने के लिए संकल्पित है. मूंग हो या अन्य मोटा अनाज, सभी फसलों की खरीदी उचित मूल्य पर सुनिश्चित की जाएगी.
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