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कितना बड़ा होता है बार काउंसिल चेयरमैन का पद, क्या है पावर? सुप्रीम कोर्ट के वकील ने समझाया

BCI Chairman Powers: बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन मिश्रा ने NALSAR के लॉ स्टूडेंट्स को वकील के तौर पर एनरॉल नहीं करने का निर्देश जारी किया था, जिसे कुछ ही घंटों बाद उन्हें वापस लेना पड़ा.

कितना बड़ा होता है बार काउंसिल चेयरमैन का पद, क्या है पावर? सुप्रीम कोर्ट के वकील ने समझाया
लॉ के छात्रों को लेकर बयान देने के बाद चर्चा में आए बार काउंसिल के चेयरमैन

NALSAR में पढ़ रहे लॉ स्टूडेंट्स को वकालत नहीं करने देने का फरमान जारी करने वाले बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा को लेकर खूब चर्चा हो रही है. BCI के चेयरमैन के अलावा वो राज्यसभा सांसद भी हैं. जब NALSAR के लॉ स्टूडेंट्स ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को उनके दीक्षांत समारोह में नहीं बुलाने की बात कही तो मनन कुमार मिश्रा ने एक फरमान जारी कर दिया, जिसमें सभी राज्यों के बार काउंसिल को ये निर्देश दिया गया था कि इन छात्रों को देश में कहीं भी वकालत नहीं करने दी जाए. हालांकि विवाद बढ़ने के बाद BCI चेयरमैन ने यू-टर्न ले लिया और अब छात्रों के हित में बयान दे रहे हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि बार काउंसिल के चेयरमैन कैसे बनते हैं और इनकी क्या शक्तियां होती हैं. 

बार काउंसिल के इस पूरे मामले को समझने के लिए हमने सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट अभिमन्यु कुमार से बातचीत की. उन्होंने बताया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष का पद क्या है और उन्हें ये शक्तियां कहां से मिलती हैं. साथ ही ये भी समझाया कि देशभर के वकीलों के प्रति उनकी क्या जिम्मेदारी होती है. 

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष की शक्तियां

एडवोकेट अभिमन्यु कुमार ने बताया, अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 4(2) के अनुसार बार काउंसिल ऑफ इंडिया में एक अध्यक्ष और एक उपाध्यक्ष होता है. अध्यक्ष परिषद की बैठकों की अध्यक्षता करता है और अधिनियम तथा परिषद के बनाए नियमों के अनुसार उसके कामकाज को संचालित करता है. अध्यक्ष की शक्तियां मुख्य रूप से परिषद के नियमों में निर्धारित होती हैं. इसलिए अध्यक्ष का पद महत्वपूर्ण है, लेकिन वह अपने व्यक्तिगत अधिकार से बार काउंसिल ऑफ इंडिया से अलग कोई असीमित फैसला नहीं ले सकता. जिन विषयों पर फैसला लेने का अधिकार पूरी परिषद को दिया गया है, उनमें फैसला परिषद के माध्यम से ही लिया जाता है.

बार काउंसिल और राज्य बार काउंसिल में अंतर

राज्य बार काउंसिलों का काम अपने राज्य के वकीलों का रजिस्ट्रेशन करना, वकीलों की सूची बनाए रखना, उनके अधिकारों और हितों की रक्षा करना और पेशेवर या अन्य कदाचार के मामलों में कार्रवाई करना है. इसके ऊपर बार काउंसिल ऑफ इंडिया को पूरे देश की राज्य बार काउंसिलों पर सामान्य निगरानी और नियंत्रण का अधिकार दिया गया है. वह आवश्यक निर्देश दे सकती है और कुछ परिस्थितियों में राज्य बार काउंसिल के लिए गए फैसले की जांच भी कर सकती है. 

साथ ही, बार काउंसिल ऑफ इंडिया का अपना एक महत्वपूर्ण दायित्व वकीलों के अधिकारों, विशेषाधिकारों और हितों की रक्षा करना भी है. इसलिए जब बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा अधिवक्ताओं की सुरक्षा, कल्याण और अधिवक्ता संरक्षण से जुड़े कानून की आवश्यकता की बात करते हैं, तो यह विषय केवल उनका व्यक्तिगत विचार नहीं, बल्कि अधिवक्ता अधिनियम के तहत बार काउंसिल ऑफ इंडिया को दी गई जिम्मेदारियों से भी जुड़ा हुआ है.

कैसे होता है चेयरमैन का चुनाव?

हर राज्य की बार काउंसिल की तरफ से एक सदस्य को बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य के तौर पर चुना जाता है. इसके बाद वो बार काउंसिल परिषद के सदस्य होते हैं और यही सदस्य मिलकर चेयरमैन का चुनाव करते हैं. यानी वकील सीधे तौर पर चेयरमैन को वोट नहीं करते हैं. 

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