मध्य प्रदेश का एक ऐतिहासिक शहर ग्वालियर अब कृषि-पर्यटन (Agri-Tourism) के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचने जा रहा है. जिले के जहांगीरपुर-खुरैरी गांव में 49 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से प्रदेश की पहली '3-इन-1' हाईटेक फ्लोरीकल्चर नर्सरी तैयार की जा रही है.
आमतौर पर देश में बने फ्लोरीकल्चर सेंटर्स सिर्फ कृषि शोध और पौधों के उत्पादन तक सीमित रहते हैं. लेकिन ग्वालियर में बन रहा यह प्रोजेक्ट भारत का ऐसा अनोखा मॉडल होगा, जो रिसर्च, किसानों की ट्रेनिंग और सैलानियों के लिए टूरिज्म को एक ही छत के नीचे लेकर आएगा, इसलिए इसे '3-इन-1' कहा जा रहा है. इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद जहांगीरपुर-खुरैरी गांव की सूरत बदल जाएगा. लोगों के पहुंचने से रोजगार के अवसर भी बनेंगे.
क्यों खास है ग्वालियर का यह '3-इन-1' प्रोजेक्ट?
इस हाईटेक फ्लोरीकल्चर नर्सरी को केवल खेती का केंद्र न बनाकर एक खूबसूरत टूरिस्ट स्पॉट के रूप में डिजाइन किया गया है, जहां आम लोग और पर्यटक परिवार के साथ वक्त बिता सकेंगे. इसके लिए यहां खास इंतजाम किए जा रहे हैं.
- 500 क्षमता का ओपन एयर थिएटर: सैलानियों और स्थानीय लोगों के मनोरंजन के लिए एक भव्य ओपन एयर थिएटर बनाया जा रहा है, जहां सांस्कृतिक कार्यक्रम और शो आयोजित किए जा सकेंगे.
- ब्यूटीफुल लैंडस्केपिंग और शॉपिंग एरिया: फूलों की दुर्लभ और रंग-बिरंगी प्रजातियों को देखने के साथ-साथ लोग यहां से पौधे खरीदकर अपने घर भी ले जा सकेंगे. इसके लिए एक विशेष सेल काउंटर और एग्जीबिशन एरिया तैयार किया जाएगा.
- 30-बेड हॉस्टल और 200 सीटर ऑडिटोरियम: हाईटेक फ्लोरीकल्चर नर्सरी में किसानों को आधुनिक तकनीक सिखाने के लिए 200 सीटों का ऑडिटोरियम सह ट्रेनिंग हॉल और उनके रुकने के लिए 30 बिस्तरों वाला रेसिडेंस हॉस्टल बनाया जाएगा. जिससे यहां आने वाले लोगों के ठहरने की बेहतर जगह मिल सके.

Gwalior floriculture nursery: दो साल में बनकर तैयार हो सकती है ईटेक फ्लोरीकल्चर नर्सरी.
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लैब से लेकर डिजिटल वेदर स्टेशन तक सब कुछ हाईटेक
हाईटेक फ्लोरीकल्चर नर्सरी के पहले चरण के लिए 13 करोड़ रुपये की स्वीकृति के साथ काम शुरू हो चुका है. यहां, 120 वर्ग मीटर में अत्याधुनिक प्लांट पैथोलॉजी लैब बनेगी, जहां पौधों की बीमारियों का इलाज और नई किस्मों का शोध होगा. मौसम के प्रभाव से बचाकर बेमौसम फूलों की खेती के लिए 4,000 वर्ग मीटर में ग्रीन हाउस, शेड नेट हाउस और पॉली हाउस भी तैयार किए जाएंगे. साथ ही, फूलों को लंबे समय तक ताजा रखने के लिए 8 मीट्रिक टन का कोल्ड स्टोरेज और मौसम की सटीक जानकारी के लिए डिजिटल ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन भी स्थापित किया जाएगा.
अगले 2 वर्षों में तैयार होगा नया टूरिस्ट डेस्टिनेशन
उद्यानिकी विभाग के सहायक संचालक एमपीएस बुंदेला के अनुसार, यह मध्य प्रदेश का पहला ऐसा सेंटर होगा जहां एक तरफ किसान अत्याधुनिक तकनीकों से खेती सीखेंगे, तो दूसरी तरफ सैलानी फूलों की महक के बीच समय बिता सकेंगे. अगले दो वर्षों में इस ड्रीम प्रोजेक्ट के पूरी तरह तैयार होने की उम्मीद है.
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