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नसबंदी में घोटाला, ग्वालियर में 656 कुत्तों की बंध्याकरण का एफिडेविट निकला फर्जी, डॉक्टर पर FIR

ग्वालियर में कुत्तों की नसबंदी करने में भी घोटाला हो गया. हैरानी की बात यह है कि 1 मार्च 2022 से 30 अप्रैल 2022 के बीच हुआ यह घपला अब चार साल बाद जून 2026 में सामने आया है.

नसबंदी में घोटाला, ग्वालियर में 656 कुत्तों की बंध्याकरण का एफिडेविट निकला फर्जी, डॉक्टर पर FIR
ग्वालियर में कुत्तों की नसबंदी करने में घोटाला. (फाइल फोटो)

ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में कुत्तों की नसबंदी करने के मामले में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है. पता चला है कि नगर पालिका निगम में आवारा कुत्तों के बधियाकरण (नसबंदी) प्रोजेक्ट में एक वेटनारी डॉक्टर द्वारा कूटरचित और संदिग्ध शपथ-पत्र (एफिडेविट) प्रस्तुत कर धोखाधड़ी की गई. यह मामला एबीसी सेंटर में 1 मार्च 2022 से 30 अप्रैल 2022 के बीच का है. नगर निगम में दिए शपथ पत्र में डॉ. राघव का नाम है, जबकि इसका स्टाम्प डॉ. रवि रमन से क्रय किया गया. नगर निगम द्वारा की गई शिकायत और फिर लंबी जांच के बाद पड़ाव थाना पुलिस ने आरोपी पशु चिकित्सक के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का केस दर्ज किया है. यह कार्रवाई नोडल अधिकारी की शिकायत पर की गई. पड़ाव थाना पुलिस को बताया कि 12 जून 2026 को नगर निगम के एबीसी प्रोजेक्ट के नोडल अधिकारी केशव सिंह चौहान ने पड़ाव थाने में एक लिखित आवेदन प्रस्तुत किया. जिसके  आधार पर शासकीय कार्य में फर्जीवाड़ा करने वाले डॉक्टर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है. 

नगर निगम आयुक्त कार्यालय से मिली जानकारी के  अनुसार, वर्ष 2022 में ग्वालियर नगर निगम सीमा के अंतर्गत घूमने वाले आवारा कुत्तों के नसबंदी कार्य के लिए छत्तीसगढ़ की एक संस्था 'एनीमल केयर फाउण्डेशन' (A-1 विद्या नगर दुर्ग, छत्तीसगढ़) को नगर निगम ग्वालियर द्वारा अनुबंधित किया गया था. संस्था द्वारा 01 मार्च 2022 से 30 अप्रैल 2022 के बीच कुल 656 श्वानों का नसबंदी करने का दावा करते हुए रिकॉर्ड नगर निगम में प्रस्तुत किया गया.

निगम के पास पहुंची शिकायत 

अनुबंध की शर्तों के अनुसार नियम यह है कि जिन स्ट्रीट डॉग्स को नसबंदी के लिए पकड़ा जाता है, उन्हें बंधियाकरण प्रक्रिया के बाद वापस उसी स्थान पर छोड़ना अनिवार्य होता है. इस बात की कानूनी पुष्टि के लिए संस्था के पशु चिकित्सक द्वारा नगर निगम कार्यालय में एक आधिकारिक शपथ-पत्र प्रस्तुत करना होता है. संस्था द्वारा इसका एफिडेविट दिया गया, लेकिन बाद में इसे लेकर नगर निगम में शिकायत की गई. 

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कैसे सामने आया डॉक्टर का घोटाला? 

शिकायत मिलने पर आयुक्त नगर निगर ग्वालियर के निर्देश पर संबंधित फर्म/संस्था को पत्र जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया. संस्था द्वारा दिए गए जवाब ने इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा कर दिया. संस्था द्वारा दिए गए एफिडेविट में स्वीकार किया कि वर्ष 2022 में संचालित इस प्रोजेक्ट के दौरान एबीसी सेंटर ग्वालियर में संस्था द्वारा नियुक्त पशु चिकित्सक डॉ. रविरमन शर्मा तैनात थे. डॉ. रविरमन शर्मा ने स्टाम्प पेपर क्रय किया और उस पर हस्ताक्षर (साइन) किए. लेकिन, जांच में सामने आया कि नगर निगम कार्यालय में जो शपथ-पत्र जमा किया गया, वो डॉ. राघव पाराशर के नाम से अंकित था. इससे साफ हो गया कि डॉ. रविरमन शर्मा द्वारा किसी अन्य डॉक्टर के नाम का इस्तेमाल कर नगर निगम प्रशासन को गुमराह कर अवैध शपथ-पत्र पेश किया गया. 

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डॉक्टर के खिलाफ FIR, पुलिस कर रही जांच 

एडिशनल एसपी जयराज कुबेर ने बताया कि नगर निगम के नोडल अधिकारी केशव सिंह चौहान द्वारा आवेदन के साथ पेश किए गए दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट के आधार पर पड़ाव थाना पुलिस ने आरोपी पशु चिकित्सक डॉ. रविरमन शर्मा के खिलाफ केस दर्ज किया है. उस पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर धोखाधड़ी करने का आरोप है. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है.

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