मध्य प्रदेश में कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद शुरू हुआ सियासी तूफान अब एक बेहद संवेदनशील और विस्फोटक मोड़ पर पहुंच गया है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने इस विवाद में न केवल राज्य सरकार और चुनाव आयोग को घेरा, बल्कि देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर भी सीधे उंगली उठा दी है.
मीडिया से बात करते हुए दिग्विजय सिंह ने गुरुवार को पूरे घटनाक्रम को एक सोची समझी राजनीतिक साजिश करार दिया. उन्होंने कहा कि मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा की रेस से बाहर रखने के लिए एक सुनियोजित खेल खेला गया. सुप्रीम कोर्ट की ओर से नामांकन रद्द करने के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई शुक्रवार तक टालने और चुनाव आयोग से कोई राहत न मिलने पर दिग्विजय सिंह का गुस्सा फूट पड़ा. उन्होंने तीखे लहजे में कहा कि मैं जानता था कि जब चोरी होती है, तो उसमें सब शामिल होते हैं. केवल राज्य सरकार ही नहीं, बल्कि केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और मुझे आज यह कहने पर मजबूर होना पड़ रहा है कि सुप्रीम कोर्ट भी इसमें शामिल है. जब सुप्रीम कोर्ट को पता था कि शाम 4 बजे के बाद हमारी याचिका निष्प्रभावी हो जाएगी, तो आज ही सुनवाई क्यों नहीं की गई? इसे कल के लिए क्यों टाल दिया गया? यह पूरी तरह से मिलीभगत की चोरी का मामला है.
भाजपा उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत
एक तरफ जहां कांग्रेस कानूनी और राजनीतिक मोर्चे पर संघर्ष कर रही थी. वहीं, दूसरी तरफ समय सीमा समाप्त होने के साथ ही भाजपा ने मध्य प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर निर्विरोध जीत दर्ज कर ली. भाजपा उम्मीदवार रजनीश अग्रवाल, तरुण चुघ और महेश केवट को गुरुवार को ही चुनाव जीतने के प्रमाण पत्र सौंप दिए गए. इस तरह उस नतीजे पर मुहर लग गई, जिसे रोकने के लिए कांग्रेस लगातार हाथ पैर मार रही थी.
भाजपा का तीखा पलटवार
दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद मध्य प्रदेश की सियासत में भूचाल आ गया है. भाजपा नेताओं ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए इसे संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करार दिया है. मध्य प्रदेश के खेल मंत्री विश्वास सारंग ने दिग्विजय सिंह के बयान पर सख्त आपत्ति जताते हुए कहा कि उन्होंने सारी मर्यादाएं लांघ दी हैं. सारंग ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को 'चोर' कहना न्यायपालिका का घोर अपमान है. यह न केवल आपत्तिजनक है, बल्कि बेहद शर्मनाक भी है. सर्वोच्च न्यायालय को इस बयान का स्वतः संज्ञान लेना चाहिए और उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई शुरू करनी चाहिए. विश्वास सारंग ने आगे कहा कि कांग्रेस की यह पुरानी आदत रही है कि जब भी फैसले उनके पक्ष में नहीं आते, वे संवैधानिक संस्थाओं पर कीचड़ उछालने लगते हैं. पहले उन्होंने चुनाव आयोग, सरकार और ईवीएम (EVM) पर सवाल उठाए और अब देश की सबसे बड़ी अदालत को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है.
'पूर्व मुख्यमंत्री से ऐसी भाषा की उम्मीद नहीं'
वहीं, भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने भी दिग्विजय सिंह पर करारा हमला बोला. उन्होंने कहा कि अगर ऐसे शब्द राहुल गांधी के मुंह से निकलते, तो इसे राजनीतिक अपरिपक्वता मानकर नजरअंदाज किया जा सकता था, लेकिन दिग्विजय सिंह एक अनुभवी नेता हैं, जिन्होंने 10 साल तक मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शासन किया है. एक पूर्व मुख्यमंत्री की ओर से न्यायपालिका के लिए ऐसी भाषा का इस्तेमाल करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है.
आखिर क्या है पूरा विवाद?
इस पूरे सियासी ड्रामे के केंद्र में कांग्रेस नेता व राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन हैं. उनका राज्यसभा नामांकन एक लंबित अदालती मामले का खुलासा न करने के आरोप में रद्द कर दिया गया था. कांग्रेस का आरोप है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित और अनुचित है.
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दिग्विजय सिंह ने मीनाक्षी नटराजन का पुरजोर बचाव करते हुए उन्हें अपने राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ी गांधीवादी नेता बताया. उन्होंने कहा कि नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं है और जिस आधार पर उन्हें अयोग्य ठहराया गया, वह पूरी तरह से गलत है. दिग्विजय सिंह ने ऐलान किया कि कांग्रेस इस मुद्दे को देशव्यापी स्तर पर ले जाएगी और मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा पहुंचाने की लड़ाई जारी रखेगी.
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