छिंदवाड़ा से आई एक दर्दनाक तस्वीर ने एक बार फिर गांवों में बुनियादी सुविधाओं की हकीकत उजागर कर दी है. यहां एक गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस तक नसीब नहीं हुई. मजबूरी में ग्रामीणों ने उसे खाट पर लिटाकर पहले नदी पार कराई, फिर बाइक से अस्पताल पहुंचाया. इस पूरी घटना का वीडियो अब सवाल खड़े कर रहा है कि आखिर कब तक गांव वाले ऐसी मुश्किलों से जूझते रहेंगे.
शाश्वत शर्मा की रिपोर्ट...
समय पर नहीं पहुंची एंबुलेंस
दरअसल, अमरवाड़ा विकासखंड के ग्राम हथोड़ा में बुधवार को एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हुई. परिवार ने तुरंत एंबुलेंस के लिए संपर्क किया, लेकिन गांव तक न सड़क है और न ही पुल, इसलिए एंबुलेंस वहां पहुंच ही नहीं सकी. हालात ऐसे बने कि महिला की डिलीवरी घर पर ही करानी पड़ी.
खाट पर लिटाकर नदी कराई पार
डिलीवरी के बाद महिला और नवजात दोनों की हालत बिगड़ने लगी. यह देखकर परिवार और गांव वालों में घबराहट फैल गई. समय रहते इलाज जरूरी था, लेकिन साधन नहीं होने के कारण गांव वाले खुद ही आगे आए. गांव तक पहुंचने के लिए बीच में नदी पड़ती है और वहां पुल नहीं बना है. ऐसे में युवकों ने महिला को खाट पर लिटाया और बड़ी मुश्किल से नदी पार कराई. यह दृश्य बेहद मार्मिक था, जहां लोग जान जोखिम में डालकर एक जान बचाने की कोशिश कर रहे थे.
बाइक से पहुंचाया अस्पताल
नदी पार करने के बाद भी एंबुलेंस नहीं मिली तो युवकों ने हार नहीं मानी. उन्होंने महिला को बाइक पर बैठाया और किसी तरह नजदीकी अस्पताल तक पहुंचाया. काफी संघर्ष के बाद जाकर महिला को इलाज मिल पाया. ग्रामीणों का कहना है कि उनके मोहल्ले में करीब 20 परिवार रहते हैं, लेकिन आज तक वहां सड़क और पुल की सुविधा नहीं पहुंची. कई बार अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला, काम नहीं हुआ.
हर बार ऐसे ही उठानी पड़ती है जिम्मेदारी
गांव वालों ने बताया कि जब भी कोई बीमार पड़ता है या आपात स्थिति होती है, तो उन्हें इसी तरह खाट का सहारा लेना पड़ता है. एंबुलेंस या अन्य वाहन उनके इलाके तक नहीं आ पाते, जिससे हर बार हालात गंभीर हो जाते हैं.
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