NEET रिजल्ट के बाद अब लाखों छात्र काउंसलिंग शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं. इसी बीच इस साल के तमाम टॉपर्स एक बार फिर दिल्ली एम्स में एडमिशन लेने का मन बना चुके हैं और सबसे ज्यादा नंबर लाने वाले छात्रों को ये मौका जरूर मिलता है. नए बैच के एडमिशन से पहले हमने 2021 में नीट टॉप करने वाले डॉक्टर तन्मय गुप्ता से बातचीत की, जिसमें हमने उनसे समझा कि आखिर दिल्ली एम्स का माहौल कैसा होता है और यहां पांच साल तक MBBS करने की फीस कितनी लगती है. साथ ही AIR-1 तन्मय ने एडमिशन लेने वाले छात्रों को कई टिप्स भी दिए.
महज 5 हजार में MBBS की पढ़ाई
अगर आप ये सोचते हैं कि NEET परीक्षा में टॉप करके क्या ही फायदा होता है तो आपको ये बात जरूर जाननी चाहिए. नीट टॉप करने वाले छात्रों को दिल्ली एम्स में एडमिशन मिलता है, यहां की कट-ऑफ सबसे ज्यादा होती है. टॉपर तन्मय गुप्ता से जब हमने पूछा कि उनकी पांच साल की पढ़ाई के दौरान फीस कितनी लगी तो उन्होंने कहा, "AIIMS में आपको रहने के लिए हॉस्टल मिलते हैं. फर्स्ट ईयर में दो छात्रों का शेयरिंग होता है, दूसरे साल से सिंगल रूम मिल जाता है. पढ़ाई का पूरा खर्चा 6 हजार रुपये है. इसमें से 1 हजार रुपये वापस रिफंड मिल जाते हैं. सिर्फ खाने का पैसा देना होता है, बाकी सब कुछ इसी पांच हजार में हो जाता है."
कैसा होता है पढ़ाई का माहौल?
जब हमने डॉक्टर तन्मय से पूछा कि दिल्ली एम्स में पढ़ाई का माहौल कैसा होता है तो उन्होंने कहा, बाकी कॉलेजों की तुलना में यहां का सिस्टम काफी रीलैक्स होता है. यहां बच्चों को काफी ज्यादा फ्रीडम मिलती है. पहले कुछ महीनों के लिए थोड़ी पाबंदी होती है, लेकिन इसके बाद पूरी तरह बाहर जाने या कुछ भी करने की आजादी होती है. यहां पर सीनियर्स भी दोस्तों की तरह रहते हैं, हम उन्हें सर कहकर नहीं बल्कि नाम से ही बुलाते थे. इस मामले में एम्स काफी अच्छा है.
क्या पढ़ाई या एग्जाम का कोई प्रेशर होता है?
नीट टॉपर डॉक्टर तन्मय ने बताया कि एमबीबीएस की पढ़ाई में कोई कॉम्पिटिशन नहीं होता है, छात्र ये नहीं देखते हैं कि किसी से ज्यादा नंबर लाने हैं. आपको सिर्फ जरूरी मार्क्स लाने होते हैं और रोज दो से तीन घंटे की पढ़ाई करनी होती है. फर्स्ट ईयर में थोड़ा सा हैक्टिक लग सकता है, क्योंकि इस दौरान छात्र माहौल में ढलते हैं.
काउंसलिंग को लेकर दिए टिप्स
डॉक्टर तन्मय गुप्ता ने नीट काउंसलिंग को लेकर छात्रों को टिप्स भी दिए. उन्होंने बताया कि अगर आप टॉपर हैं तो आपको ज्यादा चॉइस फिल करने की जरूरत नहीं पड़ती है, वहीं बाकी छात्र चाहते हैं कि उन्हें अपना स्टेट कॉलेज मिल जाए. हालांकि स्टेट से बाहर जाने के भी अपने फायदे हैं, आपको एक्सपोजर मिलता है, पता चलता है कि लोगों से कैसे डील करना है. अपने स्टेट कॉलेज पर ओवर फोकस करने की बजाय उस कॉलेज पर फोकस करें, जो आपके फ्यूचर के लिए अच्छा है और जो देश को अच्छे डॉक्टर दे रहा है.
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