- मध्य प्रदेश के बुरहानपुर के खकनार विकासखंड में स्थित देवी फाल्या प्राथमिक विद्यालय की स्थिति बेहद खराब है.
- स्कूल भवन जर्जर है, परिसर में गंदगी फैली है और बच्चों के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं.
- विद्यालय में केवल सत्र में 17 बच्चे हैं, लेकिन शिक्षकों की कार्यप्रणाली से बच्चों का रुझान कम हो रहा है.
मध्य प्रदेश सरकार ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन बुरहानपुर जिले के खकनार विकासखंड के देवी फाल्या स्थित सरकारी प्राथमिक विद्यालय की तस्वीर इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है. यहां स्कूल भवन की हालत इतनी खराब है कि पहली नजर में यह किसी कबाड़खाने जैसा दिखाई देता है. परिसर में गंदगी फैली हुई है, कमरों में कबाड़ भरा है और बच्चों के लिए बुनियादी सुविधाएं तक मौजूद नहीं हैं. इतना ही नहीं, पालकों ने स्कूल में पदस्थ एक शिक्षक पर नशे की हालत में स्कूल आने और बच्चों की पढ़ाई की अनदेखी करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं.
शरिक अख्तर दुर्रानी की रिपोर्ट...
स्कूल की बदहाल तस्वीर ने खोली व्यवस्था की पोल
बुरहानपुर जिले के आदिवासी ब्लॉक खकनार के देवी फाल्या में संचालित सरकारी प्राथमिक विद्यालय की हालत बेहद खराब है. स्कूल भवन जर्जर हो चुका है और परिसर में जगह-जगह गंदगी दिखाई देती है. कक्षाओं में पढ़ाई का माहौल होने के बजाय कबाड़ का सामान रखा हुआ है. ऐसे माहौल में छोटे-छोटे बच्चों को पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.

स्कूल भवन काफी जर्जर है.
सिर्फ 17 बच्चे दर्ज, फिर भी नहीं मिल रही बेहतर शिक्षा
विद्यालय में पहली से पांचवीं कक्षा तक कुल 17 बच्चे दर्ज हैं. संख्या कम होने के बावजूद बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है. ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल की अव्यवस्थाओं और शिक्षकों की कार्यप्रणाली के कारण बच्चों का स्कूल के प्रति रुझान कम होता जा रहा है. इसका सीधा असर उनकी पढ़ाई और भविष्य पर पड़ रहा है.
पालकों ने लगाए गंभीर आरोप
ग्रामीण और पालकों ने स्कूल में पदस्थ शिक्षक पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि शिक्षक अक्सर देर से स्कूल पहुंचते हैं और बच्चों की पढ़ाई पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते. कुछ बच्चों ने अपने परिवार वालों को बताया कि शिक्षक स्कूल परिसर में कहीं भी शौच कर देते हैं. इसके बाद पालकों ने आशंका जताई कि शिक्षक संभवतः नशे की हालत में स्कूल आते होंगे. हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है.
बच्चों के लिए नहीं हैं बुनियादी सुविधाएं
स्कूल में बच्चों के लिए न तो शौचालय की समुचित व्यवस्था है और न ही पीने के पानी की सुविधा उपलब्ध है. ऐसे में बच्चों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ता है. शिक्षा के लिए जरूरी मूलभूत सुविधाओं का अभाव विद्यालय की स्थिति को और चिंताजनक बना देता है.

स्कूल की छत से सीमेंट गिर चुका है.
कार्रवाई की मांग को लेकर सामने आए पालक
जब पालकों ने स्कूल की वास्तविक स्थिति देखी तो उनमें नाराजगी बढ़ गई. उन्होंने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि लापरवाह शिक्षकों को तत्काल यहां से हटाया जाए. साथ ही स्कूल भवन का नवनिर्माण कराया जाए, परिसर की नियमित साफ-सफाई हो और योग्य शिक्षकों की नियुक्ति की जाए, ताकि आदिवासी बच्चों को बेहतर और सम्मानजनक वातावरण में शिक्षा मिल सके.
जांच के बाद कार्रवाई की तैयारी
मामला सार्वजनिक होने के बाद शिक्षा विभाग भी सक्रिय हो गया है. कृष्णकुमार पाराशर बीआरसी जिला शिक्षा केंद्र बुरहानपुर का कहना है कि पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है. यदि जांच में शिक्षकों की लापरवाही या अन्य आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल विभाग की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जबकि ग्रामीण बेहतर शिक्षा व्यवस्था की उम्मीद लगाए बैठे हैं.
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