MP BJP MLA Son Dinesh Lodhi: मध्यप्रदेश के करैरा में बीजेपी विधायक प्रीतम सिंह लोधी के बेटे दिनेश लोधी ने अपनी थार एसयूवी से कथित तौर पर पांच लोगों को कुचल दिया. घटना के दो दिन बाद अब पीड़ित अपने हाल पर हैं, इलाज का खर्च खुद उठा रहे हैं, न कोई मदद, न कोई संपर्क, और न ही आरोपी या उसके प्रभावशाली परिवार की ओर से एक फोन कॉल. वहीं आरोपी आज़ाद है और कानून कमजोर पड़ता नजर आ रहा है.
घायलों की कहानी सिर्फ हादसे की नहीं, बल्कि उसके बाद की बेरुखी की भी है. घायल संजय परिहार कहते हैं, “एफआईआर तो दर्ज हो गई है. दो पुलिसवाले हमें विधायक के बेटे के पास भी ले गए, लेकिन उन्होंने कहा मैं अभी जिम जा रहा हूं, टीआई को फोन कर दूंगा, आप बता देना. हमें वहां से लौटा दिया गया. बाद में कोई फोन नहीं आया, इलाज की भी कोई व्यवस्था नहीं की गई.” वहीं दूसरी पीड़ित शिक्षिका सीता वर्मा, जिनके सिर और कमर में चोट आई है, कहती हैं, “हम स्कूल जा रहे थे, तभी पीछे से कार ने जोरदार टक्कर मारी और फिर बाइक को भी टक्कर मार दी. हम बस चाहते हैं कि हमारा इलाज का खर्च उठाया जाए.”
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भाजपा विधायक के बेटे दिनेश लोधी पर लगे गंभीर आरोप.
“मैं हॉर्न बजा रहा था, सायरन दे रहा था… तुम लोग क्यों कट मार रहे थे”
घटना दिनदहाड़े हुई, जब एक थार एसयूवी बिना नंबर प्लेट और अवैध हूटर के साथ दो महिलाओं और तीन युवकों की बाइक पर चढ़ गई. सभी पांच लोग घायल हुए. चश्मदीदों के मुताबिक हादसे के बाद मदद करने के बजाय आरोपी ने बहस की और खुद को सही ठहराने की कोशिश की.
पुलिस बोली- तो गिरफ्तारी जरूरी नहीं थी
सबसे बड़ा सवाल केस की हैंडलिंग को लेकर उठ रहा है. पांच लोगों के घायल होने के बावजूद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 281 और 125(ए) लगाई, जो लापरवाही और जीवन को खतरे में डालने से जुड़ी हैं, लेकिन सजा के लिहाज से बेहद हल्की मानी जाती हैं. धारा 281 में अधिकतम छह महीने की सजा या ₹1000 जुर्माना, जबकि धारा 125(ए) में अधिकतम तीन महीने की सजा या ₹2500 जुर्माना है. दोनों ही जमानती धाराएं हैं. इसी आधार पर आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया, बल्कि नोटिस देकर छोड़ दिया गया. पुलिस का तर्क है कि जब अधिकतम सजा सात साल से कम है तो गिरफ्तारी जरूरी नहीं थी.
शुरुआत में FIR “अज्ञात चालक” के खिलाफ दर्ज की गई
हालांकि, इन आधिकारिक बयानों के बावजूद जनाक्रोश कम नहीं हो रहा. खासकर इसलिए कि शुरुआत में एफआईआर “अज्ञात चालक” के खिलाफ दर्ज की गई, जबकि पीड़ित लगातार दिनेश लोधी का नाम ले रहे थे. बाद में मामला उछलने पर पुलिस ने इसे “तकनीकी त्रुटि” बताते हुए सुधार किया और नाम जोड़ा.
Karaera Accident: धार गाड़ी पर नंबर प्लेट नहीं, हूटर भी लगा था.
जिस गाड़ी से हादसा हुआ उस पर नंबर प्लेट नहीं
विवाद को और गहरा करने वाली बात यह है कि जिस गाड़ी से हादसा हुआ, वह बिना नंबर प्लेट और अवैध हूटर के साथ सड़कों पर दौड़ रही थी, जो खुद में गंभीर उल्लंघन है. पुलिस ने कहा है कि इन मामलों में अलग से कार्रवाई होगी, लेकिन सवाल यही है कि ऐसी गाड़ी पहले कैसे चल रही थी और उस समय सख्ती क्यों नहीं दिखाई गई.
पहले भी विवादों में रहे दिनेश लोधी

विधायक बोले- मैंने खुद फोन कर FIR दर्ज कराई
बढ़ते दबाव के बीच प्रीतम लोधी ने सफाई दी कि “मेरे लिए जनता मेरे परिवार से ज्यादा महत्वपूर्ण है. मैंने खुद थाने में फोन कर अपने बेटे के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है. जो भी दोषी होगा, उसे सजा मिलेगी.” लेकिन जमीन पर तस्वीर अलग है. घायल अब भी इलाज के लिए जूझ रहे हैं, और न्याय अब भी दूर नजर आता है. यह मामला सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं रह गया है. यह उस सिस्टम पर सवाल है, जहां ताकतवर नाम आने पर धाराएं हल्की हो जाती हैं, कार्रवाई धीमी पड़ जाती है और जवाबदेही धुंधली हो जाती है. करैरा के इन पांच घायलों के लिए यह बहस नहीं, हकीकत है.
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