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भाजपा में चंदे को लेकर बढ़ी सख्ती, कई जिला अध्यक्षों ने नहीं दिया हिसाब, पार्टी ने दिया अल्टीमेटम

मध्य प्रदेश भाजपा में चंदे को लेकर सख्ती बढ़ गई है. कई जिलाध्यक्षों द्वारा आजीवन सहयोग निधि का पूरा हिसाब न देने से पार्टी नेतृत्व नाराज है. प्रदेश संगठन ने 15 मई तक सभी जिलों को लेखा-जोखा सौंपने का अल्टीमेटम दिया है.

भाजपा में चंदे को लेकर बढ़ी सख्ती, कई जिला अध्यक्षों ने नहीं दिया हिसाब, पार्टी ने दिया अल्टीमेटम
प्रतीकात्मक तस्वीर. (AI)
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BJP Donation Controversy MP: मध्य प्रदेश भाजपा संगठन में इन दिनों चंदे को लेकर बेचैनी साफ दिखाई दे रही है. पार्टी को मिलने वाली आजीवन सहयोग निधि का पूरा और स्पष्ट हिसाब न मिलने से संगठन के भीतर सवाल उठने लगे हैं. कई जिलाध्यक्ष अब तक तय समय में लेखा-जोखा नहीं सौंप पाए हैं, जिससे नाराजगी बढ़ी है. हालात यह हैं कि पार्टी ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी जिलों को 15 मई तक पूरा हिसाब देने का अल्टीमेटम दे दिया है.

चंदे के हिसाब को लेकर बढ़ी सख्ती

मध्य प्रदेश भाजपा में इन दिनों चंदे को लेकर अंदरूनी तनाव चल रहा है. मामला पार्टी को मिलने वाली आजीवन सहयोग निधि से जुड़ा है. प्रदेश संगठन ने सभी जिलाध्यक्षों से उन लोगों की सूची मांगी है, जिन्होंने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 20 हजार रुपये से अधिक का चंदा दिया है. इसमें दानदाता का नाम, पता, बैंक का नाम, राशि, चेक नंबर, तारीख और पैन नंबर जैसी पूरी जानकारी देने को कहा गया है.

कई जिलों ने नहीं दिया पूरा लेखा-जोखा

सहयोग निधि लेने के बावजूद कई जिलों ने अब तक पूरा हिसाब प्रदेश यूनिट को नहीं सौंपा है. पार्टी नेतृत्व का कहना है कि बार-बार कहने के बावजूद कुछ जिलाध्यक्ष लापरवाही बरत रहे हैं. इसी वजह से संगठन में नाराजगी है और अब इसे गंभीरता से लिया जा रहा है.

समय पर हिसाब नहीं तो पैसा रोका जाएगा

प्रदेश भाजपा ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि जो जिले 15 मई तक पूरा हिसाब नहीं देंगे, उन्हें उनके हिस्से का 25 प्रतिशत पैसा नहीं मिलेगा. पार्टी की व्यवस्था के अनुसार कुल चंदे का आधा हिस्सा केंद्रीय संगठन को जाता है, बाकी आधे में से आधा जिलों को वापस भेजा जाता है और शेष राशि प्रदेश संगठन अपने पास रखता है.

9 जिलों पर विशेष नजर

पार्टी को जांच के दौरान ऐसे 9 जिले भी मिले हैं, जिनका वर्ष 2025 का आजीवन सहयोग निधि का हिसाब अब तक जमा ही नहीं हुआ है. इन जिलों के अध्यक्षों को तत्काल राशि और पूरी जानकारी जमा करने को कहा गया है. साफ शब्दों में चेताया गया है कि लापरवाही पर कार्रवाई होगी.

ऑडिट रिपोर्ट और बैंक स्टेटमेंट भी तलब

प्रदेश संगठन ने जिलों से 15 मई तक ऑडिट रिपोर्ट, बैंक स्टेटमेंट और अन्य जरूरी दस्तावेज भी मांगे हैं. दिलचस्प बात यह है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 की ऑडिट रिपोर्ट बिना सीए के हस्ताक्षर के मांगी गई है. पार्टी का तर्क है कि 2024-25 के आंकड़ों के आधार पर जो फॉर्मेट तैयार किया गया है, उसी के अनुसार जानकारी दी जाए.

बड़ी राशि देने वालों की पूरी जानकारी की मांग

भाजपा अब बड़े चंदादाताओं की पूरी प्रोफाइल अपने रिकॉर्ड में रखना चाहती है. 20 हजार रुपये से ज्यादा की राशि देने वालों के पैन नंबर समेत सभी विवरण अनिवार्य रूप से जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि भविष्य में किसी तरह की दिक्कत न हो.

कांग्रेस ने साधा राजनीतिक निशाना

इधर, भाजपा में चंदे को लेकर चल रही इस खींचतान को कांग्रेस ने मुद्दा बना लिया है. कांग्रेस नेताओं ने इसे “चंदा घोटाला” बताते हुए भाजपा पर हमला बोला है. नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि यह तो छोटा मामला है, जबकि सरकार खुद बड़े भ्रष्टाचार और घोटालों में उलझी हुई है.

पहले भी फंड को लेकर हो चुकी है परेशानी

पार्टी फंड को लेकर भाजपा में तनाव कोई नई बात नहीं है. इन्हीं चुनौतियों के चलते चंदा लेने की ऑनलाइन प्रक्रिया को बढ़ावा दिया गया था, लेकिन जमीनी स्तर पर आज भी ज्यादातर लोग पारंपरिक तरीके, यानी नकद चंदा देना ही पसंद कर रहे हैं. यही वजह है कि हिसाब-किताब को लेकर बार-बार विवाद की स्थिति बन रही है.

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