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भोपाल बीफ कांड: चार्जशीट से हैदराबाद लैब रिपोर्ट 'गायब'! तीन जांच-तीन रिपोर्ट में उलझा मामला

Bhopal Beef Kand: भोपाल के चर्चित कथित बीफ परिवहन मामले में नया मोड़ आ गया है जहां आरोपियों ने चार्जशीट से हैदराबाद लैब की रिपोर्ट गायब होने का सनसनीखेज आरोप लगाया है.तीन अलग-अलग लैब रिपोर्टों में विरोधाभास होने के कारण मामले की गुत्थी उलझ गई है और अब आरोपियों ने उच्च स्तरीय डीएनए जांच की मांग करते हुए अदालत में आवेदन दिया है.

भोपाल बीफ कांड: चार्जशीट से हैदराबाद लैब रिपोर्ट 'गायब'! तीन जांच-तीन रिपोर्ट में उलझा मामला

Bhopal Beef Controversy: भोपाल के चर्चित कथित बीफ परिवहन मामले में अब एक नया और बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया है. आरोपियों ने अदालत में आवेदन देकर सनसनीखेज दावा किया है कि जब्त किए गए मांस के नमूने की हैदराबाद लैब वाली जांच रिपोर्ट चार्जशीट के साथ पेश ही नहीं की गई है, जबकि पुलिस को यह रिपोर्ट पहले ही मिल चुकी है. आरोपियों ने अब अदालत से मांग की है कि इस रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लिया जाए और किसी प्रतिष्ठित लैब से नए सिरे से डीएनए जांच कराई जाए.

अदालत में आवेदन और गायब दस्तावेजों का आरोप

यह आवेदन भोपाल के न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी (CJM) की अदालत में राज्य बनाम मोहम्मद शोएब और असलम कुरैशी उर्फ 'चमड़ा' प्रकरण में दाखिल किया गया है. जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के इस मामले में आरोपियों की ओर से उनके वकील ने 9 मार्च 2026 को सीआरपीसी की धारा 91 और 94 के तहत यह आवेदन पेश किया. आवेदन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि पुलिस ने 5 मार्च 2026 को अदालत में चालान तो पेश कर दिया, लेकिन विवेचना से जुड़े कई महत्वपूर्ण और निर्णायक दस्तावेज उसमें संलग्न नहीं किए गए हैं.

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हैदराबाद लैब रिपोर्ट और नमूनों की अदला-बदली की आशंका

दस्तावेजों के अनुसार, 14 जनवरी 2026 को भोपाल कलेक्टर के निर्देश पर मांस का एक सैंपल कूरियर के जरिए राष्ट्रीय मीट अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद भेजा गया था, जो 15 जनवरी को वहां जमा हुआ. जांच के बाद संस्थान ने अपनी रिपोर्ट पुलिस को भेज दी थी, लेकिन इसे चालान का हिस्सा नहीं बनाया गया. इसके अलावा, आरोपियों ने एक और गंभीर तर्क दिया है कि 17 दिसंबर 2025 की रात जब कंटेनर रोका गया था, तब मौके पर मौजूद भीड़ ने उसकी सील तोड़कर मांस सड़क पर बिखरा दिया था. उन्हें आशंका है कि इस दौरान नमूना बदला गया हो या उसमें जानबूझकर किसी अन्य जानवर का मांस मिलाया गया हो. इसी आधार पर अब डीएनए जांच की मांग की जा रही है.

तीन अलग-अलग रिपोर्टों से गहराया संशय

यह पूरा मामला इसलिए भी पेचीदा हो गया है क्योंकि अब तक इस केस में तीन अलग-अलग जांच रिपोर्ट सामने आ चुकी हैं, जिनके निष्कर्ष एक-दूसरे से भिन्न हैं. सबसे पहले कंटेनर से जब्त मांस का परीक्षण भोपाल वेटरनरी अस्पताल में किया गया था, जिसकी प्राथमिक रिपोर्ट में इसे भैंस का मांस बताया गया. इसके बाद 18 दिसंबर 2025 को चार नमूने मथुरा की लैब भेजे गए, जहां की रिपोर्ट में इसे गाय या गोवंश का मांस बताया गया, जिससे पूरे शहर में तनाव और सनसनी फैल गई थी.

खराब हुआ सैंपल और एसआईटी की चार्जशीट

मामले की अंतिम पुष्टि के लिए पांचवां सैंपल 2 जनवरी 2026 को हैदराबाद लैब भेजा गया था, लेकिन वहां से यह जवाब आया कि सैंपल खराब हो चुका है और अब इसकी डीएनए जांच संभव नहीं है. स्थिति यह है कि अब दोबारा जांच के लिए मांस का कोई अन्य सैंपल सुरक्षित नहीं बचा है. बता दें कि 17 दिसंबर 2025 की रात पुलिस मुख्यालय के पास पकड़े गए इस कंटेनर में करीब 26.5 टन मांस मिला था. इस मामले में एसआईटी ने करीब 500 पन्नों की चार्जशीट पेश की है, जिसमें मध्यप्रदेश गोवंश वध प्रतिषेध अधिनियम 2004 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत आरोपियों को सात साल तक की सजा का प्रावधान है. इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब 18 मार्च को आरोप तय करने को लेकर अगली सुनवाई होनी है. गायब रिपोर्ट और डीएनए जांच की मांग ने इस कानूनी लड़ाई को और भी रोचक बना दिया है. 
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