- इंदौर हाई कोर्ट ने धार की भोजशाला को मां वाग्देवी का मंदिर और संरक्षित स्मारक घोषित किया है
- कोर्ट ने केंद्र सरकार को लंदन के संग्रहालय से मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा वापस लाने का निर्देश दिया है
- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस फैसले को भारतीय संस्कृति की बड़ी जीत बताते हुए स्वागत किया है
मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक नगरी धार में स्थित भोजशाला को लेकर 15 मई 2026 को आए इंदौर हाई कोर्ट के बड़े फैसले ने एक नई बहस और उम्मीद को जन्म दे दिया है. कोर्ट ने भोजशाला को न केवल 'मां वाग्देवी का मंदिर' स्वीकार किया है, बल्कि केंद्र सरकार को सात समंदर पार लंदन के संग्रहालय में रखी देवी की मूल प्रतिमा को वापस लाने की प्रक्रिया पर विचार करने का निर्देश भी दिया है.
मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस फैसले का पुरजोर स्वागत करते हुए इसे भारतीय संस्कृति की बड़ी जीत बताया है. लेकिन सवाल उठता है कि आखिर राजा भोज द्वारा स्थापित यह 'ज्ञान की देवी' मां वाग्देवी की प्रतिमा लंदन कैसे पहुंची और अब इसकी 'घर वापसी' के लिए सरकार क्या खास कदम उठाने जा रही है?
माननीय उच्च न्यायालय द्वारा धार की ऐतिहासिक भोजशाला को संरक्षित स्मारक एवं मां वाग्देवी की आराधना स्थली मानते हुए दिया गया निर्णय हमारी सांस्कृतिक विरासत, आस्था और इतिहास के सम्मान का महत्वपूर्ण क्षण है।
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) May 15, 2026
ASI के संरक्षण एवं प्रबंधन में भोजशाला की गरिमा और अधिक सुदृढ़ होगी तथा…
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जोर देकर कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा भोजशाला को 'मां वाग्देवी की आराधना स्थली' और संरक्षित स्मारक मानना हमारी सांस्कृतिक विरासत की जीत है. उन्होंने आगे कहा, "भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में भोजशाला की गरिमा और अधिक सुदृढ़ होगी, जिससे श्रद्धालुओं को नियमित पूजा-अर्चना का अधिकार सुनिश्चित होगा. विशेष रूप से, मां वाग्देवी की प्रतिमा को ब्रिटेन (लंदन संग्रहालय) से भारत वापस लाने के संबंध में केंद्र सरकार को दिया गया निर्देश स्वागतयोग्य है. इस दिशा में राज्य सरकार भी हर संभव आवश्यक प्रयास करेगी."
मां वाग्देवी की प्रतिमा 117 साल से लंदन में
धार की भोजशाला में मां वाग्देवी की पूजा होती है. वर्तमान में यह मां वाग्देवी की प्रतिमा ब्रिटिश म्यूजियम ग्रेट रसल स्ट्रीट में रखी है. मीडिया की खबरों के अनुसार मुगलों के आक्रमण के बाद खंडित हुई इस प्रतिमा को अंग्रेजों ने खुदाई कर 1875 में निकाला था. इसके बाद बीते 117 साल से मां वाग्देवी की प्रतिमा लंदन में ही है.
भोजशाला पर हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
- मंदिर का दर्जा: हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भोजशाला एक संरक्षित स्मारक और मां वाग्देवी का मंदिर है.
- पूजा का अधिकार: हिंदुओं को यहां पूजा-अर्चना का पूर्ण अधिकार दिया गया है.
- नमाज पर रोक: मुस्लिम समुदाय द्वारा नमाज अदा करने के पूर्व अधिकार को निरस्त कर दिया गया है.
- ASI का नियंत्रण: अब भोजशाला का प्रबंधन और पूर्ण नियंत्रण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पास होगा.
- प्रतिमा की वापसी: कोर्ट ने भारत सरकार को निर्देश दिया है कि लंदन के संग्रहालय से मां वाग्देवी की प्रतिमा वापस लाने की प्रक्रिया पर विचार किया जाए.
- वैकल्पिक भूमि: मुस्लिम समुदाय को अन्य उपयुक्त स्थान पर भूमि आवंटन के लिए सरकार के समक्ष आवेदन करने की स्वतंत्रता दी गई है.
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