8th Pay Commission: आठवें वेतन आयोग की तैयारी तेज हो गई है. जैसे-जैसे आयोग की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे देशभर के करीब 1.19 करोड़ केंद्रीय कर्मियों और पेंशनर्स का इंतजार कम हो रहा है. सैलरी-पेंशन निर्धारण (Salary-Pension Calculator) समेत अन्य चीजें तय करने के लिए आने वाले दिनों में केंद्रीय वेतन आयोग दिल्ली और पुणे में कर्मचारी संघों के साथ मीटिंग करने वाला है. इस बीच कर्मचारी संघों के सबसे बड़े संगठन NC-JCM (स्टाफ साइड) ने आयोग को अपना कॉमन मेमोरेंडम सौंप दिया है, जिसमें 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है. NC-JCM के ही एफिलिएट मेंबर संघ BPMS यानी भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ ने 8वें वेतन आयोग को अपना ज्ञापन सौंपा है. इसमें BPMS ने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए मिनिमम बेसिक सैलरी यानी न्यूनतम मूल वेतन 72,000 रुपये करने की मांग की है. ये NC-JCM के 3.83 फिटमेंट फैक्टर से थोड़ा ज्यादा (4.0) बैठता है, जिसमें पे-लेवल 18 के कर्मियों की सैलरी 10 लाख रुपये हो जाएगी.
केंद्रीय कर्मियों और पेंशनर्स की हो जाएगी बल्ले-बल्ले
डिफेंस सर्विस के सिविलियन एम्पलॉई का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन BPMS ने सैलरी कैलकुलेशन के लिए इस्तेमाल होने वाली फैमिली यूनिट को 3 से बढ़ाकर 5 करने की मांग कर रहा है. हर साल सैलरी में 6% इंक्रीमेंट की भी मांग की गई है. BPMS के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन मुकेश सिंह ने ET को बताया है कि ज्ञापन आयोग को सौंप दिया गया है. संगठन को उम्मीद है कि आठवां केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) अपनी सिफारिशें तैयार करते समय इस ज्ञापन पर भी गौर करेगा. अगर इन मांगों पर सहमति बनी तो ये देश के 50.46 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 68.27 लाख पेंशनर्स के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी साबित हो सकती है.

सैलरी में सीधे 4 गुना बढ़ोतरी की मांग क्यों?
मौजूदा व्यवस्था यानी 7th पे कमीशन में लेवल-1 के कर्मचारी का न्यूनतम मूल वेतन 18 हजार रुपये है, जिसे फिटमेंट फैक्टर 4.0 के आधार पर बढ़ाकर 72 हजार रुपये करने की मांग की जा रही है. यानी ये सीधे 4 गुना बढ़ोतरी होगी. इसी तरह लेवल 18 वालों की बेसिक सैलरी 2.5 लाख से बढ़ा कर 10 लाख रुपये करने की मांग है. अब सवाल है कि इतनी ज्यादा बढ़ोतरी की मांग के पीछे आधार क्या है.
दरअसल, BPMS ने बेसिक सैलरी में बढ़ोतरी के लिए MoSPI यानी केंद्रीय सांख्यिकी मंत्रालयके प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय के आंकड़ों को आधार बनाया है. BPMS का कहना है कि देश मं प्रति व्यक्ति आय 2016-17 के 1,03,219 रुपये से बढ़कर 2024-25 में 1,92,774 रुपये हो गई है, जो एक दशक से भी कम समय में लगभग 86.76% की बढ़ोतरी है. इसी को फैक्टर बनाते हुए BPMS ने निर्धारण किया है.
- न्यूनतम वेतन (7th CPC): 18,000 रुपये
- महंगाई भत्ता (58%): 10,440 रुपये (Before DA Hike)
- कुल जोड़ : 28,440 रुपये
- बढ़ोतरी @ 86.76%: 24,674.54 रुपये
- संशोधित न्यूनतम वेतन: 53,114.54 रुपये
- अब चूंकि 3 फैमिली यूनिट के हिसाब से देखें तो ये प्रति व्यक्ति 17,705 रुपये के करीब होगा.
- मांग है 5 फैमिली यूनिट की, तो ये (17,705x5), कुल 88,524 रुपये हो रहा है.
अब बात आती है, 88,524 रुपये की बजाय 72,000 रुपये की मांग क्यों, तो इसके पीछे संगठन, सरकार के खजाने पर पड़ने वाले बोझ को कम करने की भी सोच रहा है. उनका कहना है कि सरकार के लिए राजकोषीय प्रभावों का आकलन भी उतना ही महत्वपूर्ण है. सैलरी संशोधन का प्रभाव केंद्रीय कर्मियों के अलावा पेंशन, भत्तों और राज्य सरकार की सैलरी स्ट्रक्चर पर भी पड़ता है. इसलिए एक व्यवहारिक और संतुलित दृष्टिकोण से प्रस्ताव तैयार किया गया है.
लेवल मर्जर का भी प्रस्ताव
BPMS ने लेवल 2 और 3 को मिलाकर एक करने की मांग की है. इसी तरह लेवल 4 और 5 को भी एक लेवल में, जबकि लेवल 9 और 10 को भी मिलाकर एक करने की मांग की है. ऐसे में 8वें वेतन आयोग के लिए प्रस्तावित लेवल 18 की बजाय 15 ही होगा. अब ये भी जान लेते हैं कि किस पे लेवल के कर्मचारियों के लिए मूल वेतन कितना हो जाएगा.
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