बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से संबद्ध बी.Ed. कॉलेजों में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा करने वाली NDTV की पड़ताल के 10 दिन बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी है. मंत्रालय ने राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद यानी NCTE को आरोपों का तथ्यात्मक सत्यापन करने के निर्देश दिए हैं और एक स्वतंत्र फैक्ट फाइंडिंग कमेटी भी गठित की है.
8 जुलाई को प्रसारित NDTV की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया था कि भोपाल के विदिशा रोड स्थित मुगलिया कोट में दर्ज पते पर श्रीराम कॉलेज मौजूद ही नहीं मिला. सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक यह कॉलेज करीब एक दशक से हर साल लगभग 150 छात्रों को बी.Ed. और बी.Sc.-बी.Ed. पाठ्यक्रमों में प्रवेश देता रहा था. कॉलेज से जुड़े भूखंड पर NDTV को खेती होती दिखाई दी, जबकि आसपास की इमारतों पर दूसरे संस्थानों के नाम दर्ज थे. पड़ताल में ऐसे कॉलेजों का भी खुलासा हुआ जो आधिकारिक रिकॉर्ड से अलग पते पर संचालित हो रहे थे, जहां पर्याप्त बुनियादी ढांचा नहीं था या एक ही अथवा आपस में जुड़े परिसरों से कई संस्थान चलाए जा रहे थे.

कागजों में यहां तीन कॉलेज हैं....लेकिन मौके पर पहुंचे तो पता चला कि इसी एक कैंपस में तीन कॉलेज चल रहे हैं. Photo Credit: अनुराग द्वारी
शिक्षा मंत्रालय ने रिपोर्ट मांगी, समिति गठित की
रिपोर्ट के बाद शिक्षा मंत्रालय ने 15 जुलाई को NCTE से तत्काल तथ्यात्मक सत्यापन रिपोर्ट मांगी. इसके साथ ही एक स्वतंत्र समिति गठित की गई, जिसकी अध्यक्षता एक पूर्व कुलपति कर रहे हैं. समिति में शिक्षा मंत्रालय, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और मध्य प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि शामिल हैं. टीम 17 जुलाई को भोपाल पहुंची और जियो टैगिंग, वीडियोग्राफी तथा फोटोग्राफी के जरिए कॉलेजों का भौतिक सत्यापन शुरू किया.
सख्त कार्रवाई की जाएगी
प्रारंभिक जांच में मामले का दायरा और बढ़ गया. पहले सामने आए तीन संस्थानों के अलावा उसी परिसर से एक और कॉलेज संचालित होता मिला. इसके बाद अब चार कॉलेज जांच के दायरे में हैं. मंत्रालय ने इसे गंभीर चूक माना है और कहा है कि 360 डिग्री समग्र समीक्षा पूरी होने के बाद दोषी संस्थानों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी.

बगुला मुखी ग्रुप का ये कॉलेज तो सीधा खेतों में ही संचालित हो रहा है. Photo Credit: अनुराग द्वारी
सभी कॉलेजों का होना चाहिए ऑडिट
केंद्र की इस कार्रवाई से एक बड़ा सवाल भी खड़ा होता है. मध्य प्रदेश में 600 से अधिक शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान और बी.Ed. की 58 हजार से ज्यादा सीटें हैं, लेकिन फिलहाल केंद्रीय जांच केवल उन चार कॉलेजों तक सीमित है जो NDTV की पड़ताल के बाद सामने आए. यदि गायब कॉलेज, बदले हुए पते, साझा परिसर और बुनियादी ढांचे की कमियां वर्षों तक पकड़ में नहीं आईं, तो क्या जांच केवल कुछ संस्थानों तक सीमित रहनी चाहिए या राज्य के सभी शिक्षक प्रशिक्षण कॉलेजों का व्यापक भौतिक ऑडिट होना चाहिए. मामला अब केवल चार कॉलेजों का नहीं है. सवाल उस पूरी नियामक व्यवस्था पर है, जिसने संस्थानों के घोषित पते और वास्तविक स्थिति पर गंभीर संदेह होने के बावजूद प्रवेश, परीक्षाएं, परिणाम और डिग्रियां जारी रहने दीं.
मंत्री ने कहा था- नए सिरे से सत्यापन के निर्देश दिए
मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने NDTV से कहा था कि विश्वविद्यालय की जांच में कुछ कॉलेजों में कमियां मिली थीं और नए सिरे से सत्यापन के निर्देश दिए गए हैं. शपथपत्रों के आधार पर कॉलेजों को प्रवेश प्रक्रिया में शामिल करने के फैसले का बचाव करते हुए उन्होंने कहा था कि प्रवेश की समयसीमा के भीतर संबद्धता की प्रक्रिया पूरी करना और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखना जरूरी था. मंत्री ने यह भी कहा था कि शपथपत्रों में दी गई जानकारी गलत या अधूरी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी.
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