Which sweet is called as king of sweets: भारत स्वादिष्ट व्यंजनों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है. यहां हर राज्य की अपनी खास मिठाई है, जो उस क्षेत्र की पहचान है. रसगुल्ला, जलेबी, काजू कतली, पेड़ा और गुलाब जामुन जैसी मिठाइयों के बीच एक मिठाई ऐसी भी है, जिसे मिठाइयों का राजा (King of Sweets) कहा जाता है. कौन सी है ये मिठाई और इसकी खासियत क्या है, जानें.
मिठाइयों का राजा (King of Sweets)
यह मिठाई है मैसूर पाक (Mysore Pak). जो अपने शाही इतिहास, घी से भरपूर स्वाद और मुंह में घुल जाने वाली बनावट के लिए जानी जाती है. मैसूर पाक दक्षिण भारत की एक पारंपरिक मिठाई है, जिसे मुख्य रूप से बेसन, चीनी और घी से तैयार किया जाता है. दिखने में साधारण लगने वाली यह मिठाई स्वाद और बनावट के मामले में बेहद खास मानी जाती है. इसका हर टुकड़ा घी की समृद्ध खुशबू और मिठास से भरपूर होता है, जो इसे अन्य मिठाइयों से अलग पहचान दिलाता है.
कैसे पड़ा मैसूर पाक नाम
इस मिठाई का नाम दो शब्दों से मिलकर बना है. मैसूर- कर्नाटक का प्रसिद्ध शहर मैसुरु (पुराना नाम मैसूर) और संस्कृत शब्द पाका से बना पाक- जिसका अर्थ होता है चीनी की चाशनी में पकाया गया व्यंजन. इस प्रकार मैसूर पाक का अर्थ हुआ- मैसूर में बनी चाशनी वाली मिठाई.
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शाही रसोई में हुआ था जन्म
मैसूर पाक का इतिहास 20वीं सदी की शुरुआत से जुड़ा माना जाता है. कहा जाता है कि मैसूर के वोडेयार राजवंश के शासनकाल में शाही रसोइए काकासुरा मदप्पा ने महाराजा कृष्णराज चतुर्थ के लिए एक नई मिठाई तैयार की. जब महाराज ने इसका स्वाद चखा तो वे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इसका नाम पूछ लिया.
रसोइए के पास इस नई मिठाई का कोई नाम नहीं था, इसलिए उन्होंने इसे मैसूर पाक कह दिया. इसके बाद यह मिठाई शाही महल की पहचान बन गई और धीरे-धीरे पूरे दक्षिण भारत में लोकप्रिय हो गई.
क्यों कहा जाता है इसे मिठाइयों का राजा
शाही विरासत
मैसूर पाक का जन्म किसी आम रसोई में नहीं, बल्कि राजमहल की रसोई में हुआ था. यही कारण है कि इसे शाही मिठाई का दर्जा प्राप्त है.
घी से भरपूर स्वाद
इस मिठाई की सबसे बड़ी विशेषता इसमें इस्तेमाल होने वाला भरपूर घी है. यही घी इसे खास स्वाद और मुलायम बनावट देता है.
मुंह में घुल जाने वाली बनावट
अच्छी तरह से तैयार किया गया मैसूर पाक इतना मुलायम होता है कि मुंह में रखते ही घुलने लगता है. यही इसकी सबसे बड़ी पहचान है.
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देशभर में लोकप्रियता
हालांकि इसकी शुरुआत कर्नाटक से हुई थी, लेकिन आज यह भारत के लगभग हर हिस्से में पसंद की जाती है और त्योहारों पर विशेष रूप से बनाई जाती है.
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