झारखंड के रांची में हजारों छात्र JPSC से लेकर JSSC CGL और बाकी परीक्षाओं में धांधली को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. छात्रों ने अब विधानसभा घेराव के लिए मार्च निकाला है, लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग के जरिए इस मार्च को रास्ते में ही रोक लिया. इस बीच पुलिस एक्शन को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की बातें हो रही हैं, साथ ही एक वीडियो में दावा किया जा रहा है कि पुलिस ने छात्रों के लिए पैलेट गन भी तैयार की हैं. हालांकि रांची के एसपी ने साफ कर दिया है कि ये पैलेट गन नहीं हैं, बल्कि 'पेंटबॉल गन' हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि ये 'पेंटबॉल गन' क्या होती हैं और इनका काम क्या होता है.
क्या होती है 'पेंटबॉल गन'?
'पेंटबॉल गन' का इस्तेमाल आमतौर पर पुलिस नहीं करती है. ये एक गेम का हिस्सा हैं, जिसमें छोटा सा बैटल ग्राउंड तैयार किया जाता है. इस ग्राउंड में सभी लोगों के पास ये गन्स होती हैं और इन्हें एक दूसरे पर फायर करना होता है, इस गन से एक छोटी सी गोली निकलती है, जो सामने वाले पर लगते ही फट जाती है और कलर या पेंट छोड़ती है. इससे पता चलता है कि सामने वाला गेम से आउट हो चुका है. यानी आसानी से ये पहचान की जा सकती है कि गोली सटीक निशाने पर लग चुकी है.
'पेंटबॉल गन' जिलेटिन से बने पानी में रंगीन गोलियों को फायर करती है. कंप्रेस्ड एयर की मदद से गोली को फायर किया जाता है, ट्रिगर दबाते ही एयर निकलती है और बैरल से ये रंगीन गोली तेजी से आगे बढ़ती है. ये गोली काफी नरम होती है, ऐसे में लगने पर घाव या फिर कोई व्यक्ति घायल नहीं होता है.
प्रदर्शन में क्यों हो रहा है इस्तेमाल?
झारखंड प्रदर्शन में इस 'पेंटबॉल गन' का इस्तेमाल उपद्रवियों की पहचान के लिए किया जा सकता है. रांची के सिटी एसपी पारस राणा ने यही जानकारी दी है. यानी प्रदर्शन में हिंसा या फिर बवाल करने वालों पर इस गन से फायर किया जा सकता है, जिसके बाद उनके कपड़ों पर लगे पेंट से आसानी से उन्हें पकड़ा जा सकता है. हालांकि इन बंदूकों में पेपर बॉल्स का भी इस्तेमाल हो सकता है, जिनमें मिर्च का इस्तेमाल किया जाता है.
पैलेट गन से कितनी अलग?
'पेंटबॉल गन' और पैलेट गन में काफी ज्यादा अंतर है. पैलेट गन में सीसे से बने छर्रे डाले जाते हैं, जो किसी इंसानी शरीर पर छेद कर सकते हैं. खासतौर पर इससे आंखों को नुकसान होता है. वहीं पेंटबॉल गन से सिर्फ हल्का झटका लग सकता है या फिर सीधे शरीर के किसी हिस्से पर लगने पर थोड़ा दर्द महसूस हो सकता है. इसका काम सिर्फ टारगेट पर टकराकर फट जाना और वहां कलर छोड़ना होता है.
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