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CWG 2026: क्वालीफाइंग राउंड में पांचवें स्थान पर रहे नीरज चोपड़ा, फिर भी मेडल के प्रबल दावेदार क्यों? जानें 4 वजहें

क्वालीफाइंग राउंड के बाद बात करें उन चार बड़े कारणों के बारे में जो दिखाते हैं कि कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में नीरज चोपड़ा पदक जीत सकते हैं, तो वह कुछ इस प्रकार है-

CWG 2026: क्वालीफाइंग राउंड में पांचवें स्थान पर रहे नीरज चोपड़ा, फिर भी मेडल के प्रबल दावेदार क्यों? जानें 4 वजहें
नीरज चोपड़ा

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के फाइनल राउंड में कौन से 12 खिलाड़ी शिरकत करेंगे. उनका नाम सामने आ चुका है. भाला फेंक प्रतिस्पर्धा का क्वालीफाइंग राउंड मुकाबला गुरुवार (30 जुलाई 2026) को खेला गया. जहां श्रीलंकाई स्टार रमेश पथिराज 82.84 मीटर का थ्रो करते हुए टॉप पर रहे. दूसरे स्थान पर एंडर्सन पीटर्स का कब्जा रहा. जिन्होंने 81.29 मीटर दूर भाला फेंका. तीसरे और चौथे स्थान पर डौव स्मिट एवं बेन ईस्ट रहे. पांचवें स्थान पर रहते हुए नीरज चोपड़ा ने फाइनल का टिकट कटाया. क्वालीफाइंग राउंड में नीरज के प्रदर्शन को देख कुछ लोग परेशान हो गए हैं. उनको डर सताने लगा है कि कहीं इस बार वह पदक से चूक न जाएं. मगर घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. मैच के बाद उन्होंने खुद कहा कि यहां ठंड बहुत है. हवा भी तेज चल रही थी. मगर थ्रो ठीक-ठाक था. 79 मीटर थ्रो का मकसद फाइनल में पहुंचना और वहां अपना बेस्ट देना है. इसलिए मैं इस थ्रो से खुश हूं.

नीरज चोपड़ा के इस बयान से साफ नजर आ रहा है कि वह आत्मविश्वास से भरे हुए हैं और उनकी नजर ग्लासगो में भी पदक जीतने पर लगी हुई है. फाइनल राउंड से पहले बात करें उन चार कारणों के बारे में जो यह दर्शाते हैं कि नीरज चोपड़ा इस बार भी पदक हासिल कर सकते हैं, तो वह कुछ इस प्रकार है- 

बड़े मैच के प्लेयर हैं नीरज 

क्वालीफाइंग राउंड में अक्सर देखा जाता है कि नीरज चोपड़ा 80 से 82 मीटर के आस पास का थ्रो करते हैं और आसानी से फाइनल राउंड के लिए क्वालीफाई कर जाते हैं. यहां उनका प्रयास रहता है कि वह इंजरी से बचे रहें और फाइनल राउंड में अपना पूरा दमखम दिखा सकें. पदक की जंग में वह अलग ही लेवल पर नजर आते हैं. यहां वह अपना बेस्ट प्रदर्शन दिखाते हैं. जिससे वह मेडल अपने नाम कर सकें. 

क्वालीफाइंग राउंड और फाइनल राउंड का फॉर्मेट होता है अलग 

क्वालीफाइंग राउंड और फाइनल राउंड का फॉर्मेट अलग-अलग होता है. क्वालीफाइंग राउंड में खिलाड़ियों को थ्रो करने का तीन अवसर मिलने मिलता है, जबकि फाइनल राउंड में कुल छह मौके मिलते हैं. जहां खिलाड़ियों को लय बनाने का पर्याप्त अवसर मिलता है. नीरज यहीं पर लय में नजर आते हैं. क्योंकि उन्हें दूसरे-तीसरे थ्रो के बाद पीक पर आते हुए देखा जाता है. 

अनुभव और मेंटल गेम

नीरज चोपड़ा को जारी टूर्नामेंट में सबसे खास उनका अनुभव बनाता है. वह पहले ओलंपिक और वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड और सिल्वर हासिल कर चुके हैं. उन्हें बखूबी पता है कि प्रेशर वाले मुकाबलों में किस तरह से प्रदर्शन करना होता है. वहीं नए खिलाड़ी क्वालीफाइंग राउंड में तो 85 मीटर से अधिक का थ्रो अक्सर कर जाते हैं. मगर फाइनल राउंड में वह प्रेशर को झेल नहीं पाते हैं. 

प्रतिद्वंदियों का फाइनल में लड़खड़ाना

क्वालीफाइंग राउंड में तो युवा खिलाड़ी पास कर जाते हैं. मगर उनकी असल परीक्षा फाइनल राउंड में शुरू होती है. यहां वह शुरुआती मुकाबलों में ही अपना पूरा दमखम झोंक देते हैं. वहीं नीरज पेशेंस के साथ आगे बढ़ते हैं. जिसका उन्हें फायदा मिलता है. 

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