सुप्रीम कोर्ट ने ताज ट्रेपेजियम जोन (TTZ) में उद्योग लगाने के लिए लंबित करीब 400 आवेदनों पर प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है. हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों को ही मंजूरी दी जाएगी. TTZ करीब 10,400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला संरक्षित इलाका है जिसे ताजमहल और आगरा के अन्य ऐतिहासिक स्मारकों को प्रदूषण से बचाने के लिए बनाया गया है.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा है?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे. उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय अध्ययन और TTZ के लिए विजन डॉक्यूमेंट तैयार होने में हो रही देरी के कारण लंबित औद्योगिक आवेदनों पर अनिश्चितकाल तक रोक नहीं लगाई जा सकती.
अदालत ने निर्देश दिया कि TTZ अथॉरिटी लंबित आवेदनों पर विचार कर सकती है, लेकिन इसके लिए नेशनल एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (NEERI) और सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) के विशेषज्ञों की सहमति जरूरी होगी.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि NEERI, CEC और TTZ अथॉरिटी किसी उद्योग को गैर-प्रदूषणकारी मानने पर सहमत हैं तो आवेदन को सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बिना आगे बढ़ाया जा सकता है.
यदि NEERI या CEC विशेषज्ञ किसी उद्योग को प्रदूषणकारी मानते हैं तो उसे मंजूरी देने के लिए सुप्रीम कोर्ट की अनुमति आवश्यक होगी. इसके अलावा सभी स्वीकृतियों को CEC की वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाएगा ताकि लोग आपत्तियां और सुझाव दे सकें.
केंद्र सरकार की क्या दलील?
केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत में कहा कि नए उद्योगों पर पूरी तरह रोक लगाने से लोगों की आजीविका प्रभावित हो रही है. उन्होंने बताया कि लंबित आवेदन मुख्य रूप से MSME क्षेत्र से जुड़े हैं, न कि भारी उद्योगों से.
वहीं, वरिष्ठ वकील अपर्णा भट ने दलील दी कि पहले फीरोजाबाद क्षेत्र में कांच उद्योगों को मनमाने तरीके से मंजूरी दी गई थी, जबकि पर्यावरण मंत्रालय ने ऐसे उद्योगों को लेकर चिंताएं जताई थीं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और रोजगार के अवसरों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है.
NEERI की अंतरिम रिपोर्ट में क्या?
अदालत ने NEERI की अंतरिम रिपोर्ट का भी उल्लेख किया जिसमें कहा गया था कि “गैर-प्रदूषणकारी उद्योग” की परिभाषा को बहुत कठोर नहीं बनाया जाना चाहिए. इसमें आगरा की विरासत, ऐतिहासिक महत्व और क्षेत्र के GI दर्जे जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखने की बात कही गई है.
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि किसी भी आवेदन पर विचार करने वाली बैठक में NEERI और CEC दोनों के विशेषज्ञों की मौजूदगी अनिवार्य होगी.यदि दोनों विशेषज्ञ और TTZ अथॉरिटी किसी उद्योग को मंजूरी देने पर सहमत होते हैं तो आवेदन को कानून के अनुसार अंतिम रूप दिया जा सकता है.
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश पर्यावरण सुरक्षा के साथ-साथ क्षेत्र में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को संतुलित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
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