What is Pellet gun : हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर महीने भर चले छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के कथित इस्तेमाल ने इसको लेकर बहस छेड़ दी है. विपक्ष पैलेट गन को लेकर लगातार सरकार को घेर रहा है. इसको लेकर शुक्रवार को नेता प्रतिपक्ष राहुत गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की. हालांकि दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों से इंकार कर दिया है. लेकिन यह मुद्दा थमने का नाम नहीं ले रहा है.
बता दें कि जब से पैलेट गन चर्चा में आई है तब से लोगों के दिमाग में तरह-तरह के सवाल हैं, जैसे- आखिर यह गन काम कैसे करती है, इसके छर्रे किस चीज के बने होते हैं और इसका इस्तेमाल कब होता है. आपकी इस जिज्ञासा को देखते हुए आज के इस आर्टिकल में हम आपको इससे जुड़ी अहम बातें बताने जा रहे हैं...
क्या है पैलेट गन?
साधारण बंदूकों से एक बार में एक गोली निकलती है, लेकिन पैलेट गन के कारतूस में सैकड़ों छोटे-छोटे छर्रे (Pellets) भरे होते हैं.
किस चीज से बने होते हैं पैलेट गन के छर्रे?
ये छर्रे आमतौर पर मेटल, स्पेशली सीसे (Lead) के बने होते हैं. इनकी बनावट गोल या अनियमित (Irregular) भी हो सकती है. जब गन का ट्रिगर दबाया जाता है, तो कारतूस में मौजूद बारूद से गैस का भारी दबाव बनता है, जो इन सैकड़ों छर्रों को एक साथ बाहर धकेलता है.
यह काम कैसे करती है?
जैसे ही छर्रे बंदूक की नली से बाहर निकलते हैं, वे एक बड़े दायरे में फैल जाते हैं. हालांकि, छर्रों के फैलने के कारण यह तय कर पाना मुश्किल होता है कि कौन-सा छर्रा किसे और कहां लगेगा. बता दें कि इसका इस्तेमाल सुरक्षा बलों द्वारा खासतौर पर बड़े क्षेत्र में मौजूद भीड़ को नियंत्रित करने या पीछे हटाने के लिए किया जाता है.
भारत में कब और कहां हुआ इस्तेमाल?
बता दें कि भारत में पैलेट गन का इस्तेमाल 2010 में जम्मू-कश्मीर में हिंसक प्रदर्शनों के दौरान किया गया था. इसके बाद देश के अन्य हिस्सों में जरूरत पड़ने पर फोर्सेस द्वारा इस्तेमाल किया गया.
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