NEET पेपर लीक के बाद देशभर के छात्र दिल्ली में जुटे और शिक्षा व्यवस्था में जरूरी बदलावों को लेकर प्रदर्शन किया. कॉकरोच जनता पार्टी ने इस प्रदर्शन का कॉल दिया था, जिसके बाद हजारों छात्र जुट गए. पिछले कई दिनों से चल रहे हंगामे के बीच अब पीएम मोदी ने पहली बार इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने साफ कहा है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. इस दौरान पीएम मोदी ने बताया कि पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को कड़ी सजा देने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स का गठन किया जाएगा. ऐसे में आइए जानते हैं कि पेपर लीक से पहले किन बड़े मामलों को फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुना गया.
नीट पेपर लीक पर जल्द आएगा फैसला
फास्ट ट्रैक कोर्ट्स उन खास मामलों के बनाए जाते हैं, जिनमें लोगों की भावनाएं जुड़ी हों या फिर जो काफी सेंसेटिव होते हैं. अब नीट पेपर लीक और बाकी ऐसे मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट्स में होगी. यानी कुछ ही महीने में दोषियों को उनकी सजा सुना दी जाएगी. इसके लिए एक समयसीमा तय की जाती है. इन कोर्ट्स में मामले की सुनवाई तेजी से होती है और तारीख पर तारीख नहीं दी जाती.
निर्भया केस
दिल्ली के निर्भया रेप और मर्डर केस ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. साल 2012 में चलती बस में निर्भया के साथ सामूहिक बलात्कार हुआ और दरिंदगी की गई, इसके बाद उसे सड़क पर फेंक दिया गया. इस घटना से पूरे देश में आक्रोश फैल गया और सरकार को ऐसे गंभीर मामलों को लेकर फास्ट ट्रैक कोर्ट्स के गठन का ऐलान करना पड़ा. फास्ट ट्रैक कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई और 9 महीने में दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई.
हाथरस केस
2020 में यूपी के हाथरस में भी एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया था. यहां 19 साल की दलित युवती के साथ हुई बर्बरता और मौत के मामले ने फिर देश के लोगों के गुस्से को जगा दिया. सीबीआई जांच के बाद मामले को SC/ST एक्ट और पोक्सो/महिला अपराध की स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट को सौंपा गया.
कठुआ रेप एंड मर्डर केस
जम्मू-कश्मीर के कठुआ में 8 साल की बच्ची के साथ हुई हैवानियत ने सभी को झकझोरकर रख दिया. इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पंजाब के पठानकोट स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट में ट्रांसफर किया गया था. जून 2019 में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 6 आरोपियों को दोषी करार दिया और इनमें से तीन को उम्रकैद की सजा सुनाई.
हैदराबाद डॉक्टर मर्डर केस
हैदाराबाद का दिशा मर्डर केस भी काफी चर्चा में रहा. यहां 2019 में एक महिला वेटनेरी डॉक्टर के साथ रेप किया गया और उसके बाद हत्या कर दी गई. राज्य सरकार ने इस मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन करने के आदेश दिए थे.
बच्चों के साथ अपराध और एसिड अटैक के मामलों की सुनवाई
देशभर में पॉक्सो (POCSO) यानी बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराधों को लेकर कई बार ऐसे फास्ट ट्रैक कोर्ट्स में सुनवाई हुई और दोषियों को कुछ ही दिनों में सजा सुनाई गई. इसके अलावा एसिड अटैक के कई मामलों में भी तुरंत सुनवाई करते हुए फास्ट ट्रैक फैसले दिए गए. 'फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट' (FTSC) के तहत देशभर में करीब 1 हजार से ज्यादा स्पेशल कोर्ट ऐसे मामलों का तुरंत निपटारा करते हैं.
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