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केरल के मुन्नार में 12 साल बाद खिले ये खास फूल, जानें क्या है नीलकुरिंजी

Neelakurinji Flower Munnar 12 Years Bloom: इन दुर्लभ फूलों को देखने के लिए देश और दुनिया से लोग आते हैं. इस नजारे को देखने के लिए लोग 12 सालों का इंतजार करते हैं. इस बार भी भारी संख्या में लोग मुन्नार पहुंच रहे हैं.

केरल के मुन्नार में 12 साल बाद खिले ये खास फूल, जानें क्या है नीलकुरिंजी
मुन्नार में खिले दुर्लभ फूल

केरल के मुन्नार में बैंगनी रंग के कुछ फूल लोगों को अपनी तरफ खींच रहे हैं, इन्हें देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है और देशभर में ये चर्चा का विषय बना हुआ है. अब आप सोच रहे होंगे कि फूल में ऐसा क्या खास है, जिससे इसकी इतनी चर्चा हो रही है. दरअसल ये नीलकुरिंजी के फूल हैं, जो 12 सालों के लंबे इंतजार के बाद खिले हैं. इन छोटे फूलों ने मुन्नार की पहाड़ियों को और ज्यादा खूबसूरत बना दिया है. लोग 12 साल में खिलने वाले इन फूलों को देखने के लिए दूर-दूर से आ रहे हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि ये नीलकुरिंजी के फूल क्या हैं और इन्हें खिलने में 12 साल का लंबा वक्त कैसे लगता है. 

कहां खिले हैं ये खूबसूरत फूल?

माट्टुपेट्टी के पास कोरंदकाडू (Korandakadu) की पहाड़ियों और देवीकुलम फॉरेस्ट रेंज के चोक्रमूडी में चारों तरफ ये फूल खिले हुए दिख रहे हैं. इन खूबसूरत फूलों को देखने के लिए प्वाइंट्स खोल दिए गए हैं और लोग करीब से इन्हें देख सकते हैं. इससे पहले ये फूल 2014 में खिले थे और अब 2038 में ऐसा नजारा दोबारा देखने को मिलेगा. 

क्या हैं नीलकुरिंजी के फूल?

नीलकुरिंजी को स्ट्रोबिलांथेस कुंथियाना भी कहा जाता है, ये दुनिया के सबसे दुर्लभ फूलों में से एक है. ये फूलों की एक संकटग्रस्त प्रजाति है. ये एक तीन मीटर ऊंची झाड़ी की तरह होता है, जिस पर गुच्छों में बैंगनी रंग के फूल खिलते हैं. नीलकुरिंजी का वैज्ञानिक नाम केरल के साइलेंट वैली नेशनल पार्क में स्थित कुंती नदी के नाम पर रखा गया है, जहां ये फूल काफी मात्रा में पाए जाते हैं. ये एक सेमलपेरस प्रजाति है, यानी जीवनकाल में सिर्फ एक बार प्रजनन करने वाले होते हैं. 

अब सवाल है कि आखिर 12 साल बाद ये फूल कैसे खिल जाते हैं. दरअसल जब ये फूल प्रजनन करते हैं तो बीज लाखों की संख्या में नीचे गिराते हैं. बीज इतनी मात्रा में होते हैं कि चिड़िया या फिर दूसरे कीट इन्हें पूरी तरह से खत्म नहीं कर पाते हैं. बचे हुए बीज 12 साल बाद फिर से पौधों को जन्म देते हैं और एक बार फिर प्रकृति का अद्भुत नजारा दिखता है. 

क्योंकि इनके खिलने से बैंगनी और दूर से नीला दिखने वाला कलर दिखता है, इसी वजह से इन्हें नीलकुरिंजी (ब्लू स्ट्रोबिलांथेस) फूल के नाम से जाना जाता है. ये फूल भारत में ही खिलता है और केरल समेत तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में दिखता है. आमतौर पर अगस्त से लेकर अक्टूबर तक ही ये फूल दिखते हैं, जिसके बाद ये मुरझा जाते हैं और फिर इन्हें जीवनचक्र पूरा करने में 12 साल लगते हैं. 

नीलकुरिंजी पर मंडरा रहा खतरा

इस दुर्लभ फूल की प्रजाति पर आज संकट मंडरा रहा है. मुन्नार में तेजी से बढ़ते चाय और मसालों के बागानों से इस पर संकट गहराता जा रहा है. साथ ही पर्यावरण से छेड़छाड़ और बढ़ते निर्माण कार्यों को भी एक्सपर्ट्स इसका एक कारण मानते हैं. 

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