नीम करौली बाबा पर बनी फिल्म हनुमान अंश ने कमाई के तमाम रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. महज दो करोड़ के बजट में बनी ये फिल्म 100 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर चुकी है. इसी बीच नीम करौली बाबा को लेकर भी कई तरह की कहानियां फिर से सामने आ रही हैं. हर कहानी काफी दिलचस्प है और उनके भक्तों के लिए काफी खास भी है. मशहूर टेक कंपनी Apple के फाउंडर स्टीव जॉब्स भी नीम करौली बाबा की तलाश में कैंची धाम आए, जिसके बाद उन्होंने कई दिनों तक भारत की यात्रा की और फिर वापस लौटकर दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी खड़ी कर दी. स्टीव जॉब्स और नीम करौली बाबा को लेकर कई तरह के भ्रम भी खूब चर्चा में रहते हैं, जो फिल्म के बाद फिर से लोगों की जुबान पर हैं. इसमें एक कहानी Apple के मशहूर Logo को लेकर भी बताई जाती है.
नीम करौली बाबा और Apple Logo का कनेक्शन
कई लोग जो कहानियां सुनाते हैं, उनमें ये कहा जाता है कि जब स्टीव जॉब्स भारत आए तो नीम करौली बाबा ने उन्हें एक कटा हुआ सेब दिया था, जिसके बाद उन्होंने अपनी कंपनी का लोगो भी यही रखा. कुछ लोग ये भी मानते हैं कि स्टीव जॉब्स को नीम करौली बाबा ने काफी प्रभावित किया था और बाबा को सेब खाना पसंद था, इसलिए एपल का लोगो भी यही रखा गया. हालांकि ये तमाम कहानियां सच्ची नहीं हैं.
ये है Logo बनने की असली कहानी
Forbes को दिए गए एक इंटरव्यू में Apple के मशहूर लोगो को डिजाइन करने वाले रॉब जैनॉफ ने इसके पीछे की पूरी कहानी बताई है. साल 1977 में स्टीव जॉब्स एक कंप्यूटर बना चुके थे और अपनी कंपनी खड़ी कर चुके थे, लेकिन उन्हें Apple Ink नाम की इस कंपनी के लिए एक लोगो की तलाश थी. इसके लिए 24 साल के आर्ट डायरेक्टर रॉब जैनॉफ (Rob Janoff) से संपर्क किया गया, जो Regis McKenna नाम की ऐड एजेंसी में काम कर रहे थे.
कंप्यूटर को लोगों के लिए आसान बनाने की कोशिश
रॉब जैनॉफ ने अपने इंटरव्यू में बताया कि जब स्टीव जॉब्स कंप्यूटर लेकर आए, तब कंप्यूटर को एक बड़ा और भारी यंत्र माना जाता था. ये एक ऐसी मशीन थी, जिसे भारी भरकम चीजों से बनाया गया था. स्टीव जॉब्स ने इसी को तोड़ने की कोशिश की और लोगों के घरों तक कंप्यूटर को पहुंचा दिया. ऐसे में स्टीव चाहते थे कि उनकी कंपनी का लोगो ऐसा हो, जिससे लोग सीधे कनेक्ट करें और ये उन्हें कोई बोझिल मशीन ना लगे. इसीलिए सेब यानी एप्पल को ही लोगो के तौर पर चुना गया.
सेब में कटा हुआ हिस्सा क्यों बनाया गया?
Apple कंपनी के लोगो के तौर पर पूरा सेब भी बनाया जा सकता था, लेकिन इसमें ऊपर का एक छोटा हिस्सा कटा हुआ है. इस पर रॉब जैनॉफ ने बताया कि अगर ये कटा हुआ हिस्सा नहीं होता तो लोग एक नजर में इसे पहचान नहीं पाते, क्योंकि छोटा करने पर ये किसी टमाटर या चेरी की तरह दिख सकता था. यही वजह है कि इस पर इंसानी बाइट यानी कटे हुए का निशाना बनाया गया. उन्होंने कहा कि इससे कंप्यूटर का इस्तेमाल करने वाले लोगों को ये लगता कि वो ज्ञान का एक निवाला ले रहे हैं.
6 रंगों के साथ बना था पहला Logo
Apple कंपनी के पहले लोगो को 6 रंगों के साथ बनाया गया था. इसमें हरा, पीला, नारंगी, लाल, बैंगनी और नीला रंग था. Apple II उस वक्त पहला ऐसा पर्सनल कंप्यूटर था, जो मॉनिटर पर कलर विजुअल दिखा सकता था. यही वजह है कि इसमें ये रंग डाले गए और ब्लैक एंड व्हाइट की दुनिया में जी रहे लोगों ने भी इसे पसंद किया.
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