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वेस्टर्न देशों से भी ज्यादा मॉडर्न था कट्टरपंथी देश बन चुका ईरान, महिलाओं को मिली थी आजादी

Iran Protest: ईरान में सरकारी विरोधी प्रदर्शन लगातार उग्र होते जा रहे हैं. लोग महंगाई से लेकर सरकार की नीतियों को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं, अब तक इन प्रदर्शनों में 60 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

वेस्टर्न देशों से भी ज्यादा मॉडर्न था कट्टरपंथी देश बन चुका ईरान, महिलाओं को मिली थी आजादी
ईरान में कई साल पहले महिलाओं को थी पूरी आजादी

Iran Protest: ईरान में सत्ता विरोधी प्रदर्शन लगातार तेज हो रहे हैं, बड़े शहरों के अलावा देश के कई हिस्सों में लोग सड़कों पर उतकर प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसके बाद खामेनेई सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है और तख्तापलट का डर सता रहा है. इन हिंसक प्रदर्शनों के बीच अब कई लोग ईरान से निकाले गए क्राउन प्रिंस रजा पहलवी की वापसी की बात भी कर रहे हैं, जिनके परिवार के दौर में ईरान कुछ अलग ही हुआ करता था. ये वो दौर था, जब ईरान पश्चिमी देशों से भी ज्यादा मॉडर्न था और यहां हर चीज की आजादी थी. 

ईरान में होगी रजा पहलवी की वापसी?

ईरान में हो रहे प्रदर्शन के बीच कुछ लोग सोशल मीडिया पर शाह अमर रहें के नारे भी पोस्ट कर रहे हैं. यानी रजा पहलवी की वापसी की मांग भी तेजी से उठ रही है, जिससे ईरान के कट्टर इस्लामिक शासन को खतरा महसूस हो रहा है. वहीं रजा पहलवी का कहना है कि उनका मकसद सत्ता में राजा के रूप में लौटना नहीं है, बल्कि देश में  एक निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है, जिससे ईरानी लोग खुद अपना भविष्य चुन सकें. बताया जाता है कि पहलवी को ईरान की करीब 40 प्रतिशत आबादी का सपोर्ट है. 

कैसा था पहलवी का दौर?

रजा पहलवी ईरान के अंतिम शाह मोहम्मद रजा पहलवी के सबसे बड़े बेटे हैं. ईरान में 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद उनके परिवार को देश छोड़ना पड़ा था. इसके बाद से ही वो कभी वापस नहीं लौट पाए, क्योंकि उनके कई साथियों को खामेनेई ने जेलों में बंद किया है. 1979 से पहले शाह मोहम्मद रजा पहलवी का ईरान में राज था, तब ईरान बिल्कुल अलग दिखता था और यहां लोगों को अमेरिका, ब्रिटेन जैसी खुली आजादी मिली थी. 

महिलाओं को हर तरह की आजादी

शाह मोहम्मद रजा पहलवी ने करीब 40 साल तक ईरान पर शासन किया था. इस दौरान महिलाओं को पूरी आजादी थी, ईरान में महिलाएं छोटे कपड़ों, यहां तक कि स्विमसूट में भी नजर आती थीं. लोग सड़कों पर खुलेआम घूमते थे और वेस्ट्रन कल्चर पूरी तरह से हावी था. लोगों पर, खासतौर पर महिलाओं पर किसी भी तरह की धार्मिक पाबंदियां नहीं लगाई गई थीं. महिलाओं को मतदान और शिक्षा का अधिकार था. ईरान के इस पश्चिमीकरण को व्हाइट रेवोल्यूशन कहा गया. 

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इस्लामिक क्रांति के बाद पूरी तरह बदल गया देश

ईरान में 1979 तक इस्लामिक कट्टरपंथियों ने ऐसा माहौल बना दिया था कि शाह मोहम्मद रजा पहलवी का सत्ता में रहना मुश्किल हो गया था, जिस तरह के प्रदर्शन अभी ईरान में चल रहे हैं, उससे उग्र प्रदर्शन उस दौर में शुरू हो गए. शाह पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर तख्तापलट कर दिया गया और उन्हें अपने परिवार के साथ ईरान छोड़कर भागना पड़ा. 

विदेश में बैठकर अयातुल्ला अली खामेनेई ने इस पूरे प्रदर्शन का नेतृत्व किया और फिर ईरान में वापसी कर सत्ता हथिया ली. इसे ईरान में इस्लामिक क्रांति का नाम दिया गया. इस तरह देश में इस्लामिक रिपब्लिक की शुरुआत हुई और शरिया कानून लागू कर दिया गया. महिलाओं को परदे में रहने की शर्तें लग गईं और बिना बुर्के और हिजाब के निकलने पर सजा का प्रावधान रखा गया. हर एक चीज में धार्मिक कायदे कानून लागू हो गए और उनका इस्लामीकरण हो गया. 

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