1979 की इस्लामिक क्रांति आधुनिक इतिहास के उन दुर्लभ जनविद्रोहों में शामिल है जिसने न सिर्फ एक साढ़े दो हजार साल पुरानी राजशाही को उखाड़ फेंका, बल्कि पूरे क्षेत्र की राजनीति, समाज और धार्मिक विमर्श को हमेशा के लिए बदल दिया. यह आंदोलन 1978-79 के बीच उस असंतोष की आग से जन्मा, जो शाह मोहम्मद रजा पहलवी की निरंकुश सत्ता, विदेशी हस्तक्षेप, सामाजिक अन्याय और राजनीतिक दमन के खिलाफ वर्षों से सुलग रही थी. करोड़ों ईरानियों, बौद्धिकों से लेकर मजहबी तबकों तक ने सड़कों पर उतरकर एक ऐसी व्यवस्था की मांग की, जिसमें उनकी सांस्कृतिक पहचान, धार्मिक मूल्यों और राजनीतिक आवाज को दबाया न जाए. इसी जनशक्ति की लहर ने फरवरी 1979 में शाह का शासन ढहा दिया और अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के नेतृत्व में ईरान को एक इस्लामी गणराज्य में रूपांतरित कर दिया.
इस इस्लामिक क्रांति का मूल उद्देश्य शाह मोहम्मद रजा पहलवी की वंशानुगत तानाशाही को खत्म करके एक ऐसी व्यवस्था स्थापित करना था, जिसमें सत्ता विरासत नहीं बल्कि धार्मिक‑संवैधानिक ढांचे के तहत तय हो. उस समय क्रांतिकारियों, जिनमें अयातुल्ला खामेनेई भी शामिल थे, का तर्क था कि इस्लाम में शासन किसी परिवार की जागीर नहीं हो सकता. लेकिन आज ईरान की हकीकत इसके बिल्कुल उलट होती दिख रही है.
मोजतबा का सुप्रीम लीडर बनना क्रांति के मूल आदर्शों पर प्रहार?

इजरायल के हमले में 28 फरवरी को सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर घोषित कर दिया. यह फैसला 8-9 मार्च के बीच सरकारी मीडिया द्वारा पुष्टि किया गया.
56 वर्षीय मोजतबा लंबे समय से ईरान की शक्ति संरचना में पर्दे के पीछे प्रभाव रखते रहे हैं और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के बेहद करीबी माने जाते हैं. हालांकि उन्होंने कभी कोई आधिकारिक सरकारी पद नहीं संभाला.
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क्या यह ‘धार्मिक राजशाही' की शुरुआत है?
ईरान के भीतर ही आलोचकों ने इस कदम को वंशवादी तर्ज पर सत्ता सौंपने जैसा बताया है. ठीक उसी चीज की नकल, जिसके खिलाफ 1979 की क्रांति लड़ी गई थी. कई राजनीतिक हस्तियों ने इस चयन को 'शाह की तानाशाही के धार्मिक संस्करण' जैसा बताया. विशेषज्ञों का कहना है कि मोजतबा खामेनेई का चयन ईरानी सत्ता प्रतिष्ठान में कट्टरपंथियों की पकड़ और मजबूत कर देगा तथा IRGC की भूमिका और बढ़ेगी.
इजरायल की धमकी और क्षेत्रीय तनाव
इजरायल ने सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी है कि ईरान में जो भी नया सर्वोच्च नेता बनेगा, वह सीधा निशाना होगा. यह चेतावनी मोजतबा खामेनेई के नाम सामने आने के साथ और तीखी हुई. इसलिए यह नियुक्ति सिर्फ ईरान की आंतरिक राजनीति ही नहीं, बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट के भू-राजनीतिक संतुलन को भी प्रभावित करती है.
हालांकि ईरान की मौजूदा स्थिति एक ऐतिहासिक विडंबना पेश करती है, वही वंशवाद, जिसे 1979 की क्रांति ने खत्म करने का दावा किया था, अब देश की सर्वोच्च कुर्सी पर लौट आया है. मोजतबा खामेनेई की ताजपोशी से यह सवाल तेज हो गया है कि क्या ईरान अब एक धार्मिक राजशाही (Theocratic Monarchy) की ओर बढ़ रहा है?
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