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This Article is From Feb 06, 2026

इस भारतीय महिला टीचर ने लहराया विश्व में परचम, दुनियाभर के अध्यापकों को पछाड़ जीता ये अवार्ड, मिला करोड़ों का इनाम

. रूबल ने आज से 24 साल पहले एक वर्कशॉप चलाई थी, जिसमें शुरुआत में सिर्फ 30 बच्चे जुड़े थे. अब रूबल भारत में ऐसे 800 से ज्यादा ट्रेनिंग सेंटर चला रही हैं, जहां लाखों बच्चे शिक्षा ले रहे हैं.

इस भारतीय महिला टीचर ने लहराया विश्व में परचम, दुनियाभर के अध्यापकों को पछाड़ जीता ये अवार्ड, मिला करोड़ों का इनाम

इस वक्त भारत की एक महिला टीचर रूबल नागी का पूरे देश में शोर हो रहा है. रूबल शिक्षा से वंचित बच्चों को अलग तरीके से पढ़ाकर दुनियाभर में छा गई है. यह महिला टीचर गरीब बच्चों को उनकी झुग्गी-झोपड़ियों की दीवारों को किताब बनाकर पढ़ा रही है और उनमें ज्ञान का सागर भरने का काम कर रही हैं. इसी के चलते उन्हें शिक्षा के क्षेत्र के सबसे प्रतिष्ठित वैश्विक सम्मान 'ग्लोबल टीचर प्राइज 2026'  से नवाजा गया है. दुबई में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उन्हें 10 लाख डॉलर के ग्लोबल प्राइज से सम्मानित किया गया है. महिला टीचर के लिए यह सम्मान सिर्फ उनकी मेहनत का फल नहीं है, बल्कि उन बच्चों की भी जीत है, जिन्हें वह सालों से पढ़ा रही हैं. रूबल नागी एक भारतीय टीचर होने के साथ-साथ एक सोशल एक्टिविस्ट भी हैं.

30 से 10 लाख बच्चों तक का सफर

दुबई में हर साल होने वाले इस आयोजन में दुनियाभर के नेता और एक्सपर्ट शामिल होते हैं, जहां रूबल ने भारत को रिप्रेजेंट किया था. रूबल ने आज से 24 साल पहले एक वर्कशॉप चलाई थी, जिसमें शुरुआत में सिर्फ 30 बच्चे जुड़े थे. अब रूबल भारत में ऐसे 800 से ज्यादा ट्रेनिंग सेंटर चला रही हैं, जहां लाखों बच्चे शिक्षा ले रहे हैं. रूबल नागी आर्ट फाउंडेशन नामक उनकी संस्था देश के गरीब बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का काम कर रही है. इन सेंटर में उन बच्चों में शिक्षा की अलख जगाई जा रही है, जिन्होंने कभी स्कूल की शक्ल तक नहीं देखी है.

दीवारों को बनाया बोर्ड

रूबल अपने पढ़ाने के तरीके से भी मशहूर हैं. वह जगह-जगह दीवारों पर पढ़ाना शुरू कर देती हैं. वह कुछ चित्र बनाती हैं और इन चित्रों के जरिए बच्चों को गणित, इतिहास और कई सब्जेक्ट के बारे में पढ़ाती हैं. वहीं, पुरस्कार लेते समय रूबल ने कहा था कि यह सम्मान मिलना उनके देश भारत के लिए बहुत गर्व की बात है. रूबल का बचपन से ही सपना था कि हर बच्चा स्कूल जाए. अब वह इनाम में मिली राशि को ऐसे संस्थान खोलने में खर्च करेंगी, जहां उन्हें फ्री कमर्शियल ट्रेनिंग दी जाएगी और बच्चे आत्मनिर्भर बन सकेंगे. वहीं, यूनेस्को की एसोसिएट जनरल डायरेक्टर स्टेफानिया जियानिनी ने कहा कि यह सम्मान बताता है कि शिक्षक देश की दशा को बदलने की हिम्मत रखते हैं. बता दें यह अवार्ड जीतने वाली रूबल 10वीं शिक्षिका हैं. इधर, भारत में रूबल नागी के इस उपलब्धि के लिए लोग उन्हें खूब बधाई दे रहे हैं और उनकी तारीफ भी कर रहे हैं.

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