अगर आपको अचानक तेज टॉयलेट लग जाए तो आप क्या करेंगे? जाहिर है, सीधे वॉशरूम जाएंगे. लेकिन क्या आप जानते हैं कि सैकड़ों यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने वाले हमारे ट्रेन ड्राइवर्स (लोको पायलट) कुछ सालों तक ऐसा नहीं कर सकते थे. अगर उन्हें बीच रास्ते में इमरजेंसी आ जाए, तो उन्हें कंट्रोल रूम को एक मैसेज भेजना पड़ता है- "I am sick" यानी 'मेरी तबीयत खराब है'.
यह कोई बीमारी नहीं, बल्कि रेलवे में ड्राइवर्स के लिए नेचर कॉल अटेंड करने का एक अनऑफिशियल कोड वर्ड बन चुका था. लेकिन अब इस समस्या को देखते हुए रेलवे ने बीते सालों में लोको पायलट की सुविधाओं में इजाफा किया है. उसमें एक है ट्रेन के इंजन में टॉयलेट. रेलवे के मुताबिक, फिलहाल सभी नई पैसेंजर और मालगाड़ी ट्रेन में टॉयलेट दी सुविधा दी जाती है. हालांकि ये सभी टॉयलेट पुरुष लोको पायलट को ध्यान में रखते हुए बनाए गए हैं. इसीलिए महिला लोको पायलट को समस्या का सामना करना पड़ता है. ड्यूटी के दौरान ट्रेन चलाने के लिए दो लोको पायलट मौजूद रहते हैं.
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लेकिन आज से कुछ साल पहले तक ट्रेन इंजन में टॉयलेट नहीं होता था. इससे लोको पायलट को ड्यूटी के दौरान परेशान होना पड़ता था.
इंजन में टॉयलेट नहीं, छोड़ कर जा नहीं सकते
कुछ साल तक ट्रेन के इंजन (लोको केबिन) में वॉशरूम की कोई सुविधा नहीं होती थी. साथ ही रेलवे का सख्त नियम है कि पायलट किसी भी हाल में इंजन को लावारिस नहीं छोड़ सकता. राजधानी या गरीब रथ जैसी नॉन-स्टॉप और लंबी दूरी की ट्रेनों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है.
ड्यूटी शुरू करने से पहले ड्राइवर खुद को पूरी तरह फ्रेश करके केबिन में बैठते हैं ताकि अगले 3-4 घंटे तक परेशानी न हो. लेकिन मजबूरी आने पर जब वे 'I am sick' का SOS भेजते थे, तब कंट्रोल रूम अगले बड़े स्टेशन पर रिप्लेसमेंट ड्राइवर का इंतजाम करता था.
बाकी स्टाफ को छूट, ड्राइवर पर पाबंदी
हैरानी की बात यह है कि ट्रेन के बाकी रनिंग स्टाफ के लिए रास्ते खुले थे. गार्ड के केबिन में वॉशरूम होता है. TTE पैसेंजर कोच के टॉयलेट इस्तेमाल कर सकते हैं. केवल लोको पायलट ही घंटों तक बिना किसी सुविधा के लगातार इंजन में कैद रहते थे.
कागजों पर ड्यूटी 8 घंटे की होती है, लेकिन ट्रेन लेट होने पर यह खिंचकर 10 से 12 घंटे तक पहुंच जाती है. 12 घंटे तक बिना टॉयलेट जाए हाई-स्पीड ट्रेन दौड़ाना कितना तनावपूर्ण हो सकता है, इसका सिर्फ अंदाजा ही लगाया जा सकता है.
दो मिनट का स्टॉपेज और पेनल्टी का डर
रेलवे का कहना है कि इंजन के ठीक पीछे लगे SLR डिब्बे में टॉयलेट मौजूद होता है. लेकिन ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (AILRSA) के मुताबिक, छोटे स्टेशनों पर ठहराव केवल 1 से 2 मिनट का होता है.
इतने कम समय में इंजन से उतरकर पीछे जाना और वापस लौटना नामुमकिन था. अगर ड्राइवर वॉशरूम जाने के चक्कर में 2 मिनट भी लेट हुआ, तो फौरन जवाब-तलब और पेनल्टी का खतरा मंडराने लगता है. रात के वक्त तो हालात और भी बदतर हो जाते हैं.
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