- शिक्षा मंत्रालय की UDISE+ 2025-26 रिपोर्ट के अनुसार देश में स्कूलों की संख्या घटकर 14.66 लाख रह गई है
- सरकारी स्कूलों में एक साल में 8,077 स्कूल बंद हुए जबकि प्राइवेट स्कूलों की संख्या में वृद्धि हुई है
- कुल छात्रों की संख्या बढ़कर 24.72 करोड़ और शिक्षकों की संख्या 1.02 करोड़ से अधिक हो गई है
अच्छी शिक्षा सिर्फ एक मौलिक अधिकार ही नहीं है, बल्कि ये सरकार की जिम्मेदारी भी है कि वह हर बच्चे को मुफ्त शिक्षा दे. लेकिन तब क्या हो, जब नए स्कूल खुलने की जगह बंद हो जा रहे हों. सरकार ही रिपोर्ट बताती है कि सालभर में हजारों स्कूल बंद हो गए हैं. इतना ही नहीं, 29 लाख से ज्यादा छात्र ऐसे स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं जहां सिर्फ एक ही टीचर है.
हम जिस रिपोर्ट की बात कर रहे हैं, वह शिक्षा मंत्रालय की 'UDISE+ 2025-26' रिपोर्ट है. रिपोर्ट में देश के स्कूलों, उनकी हालत, छात्रों और शिक्षकों के बारे में डेटा है.
ये रिपोर्ट बताती है कि 2025-26 तक देशभर में 14.66 लाख स्कूल हैं, जिनमें 24.72 करोड़ छात्र पढ़ाई कर रहे हैं. इन स्कूलों में 1.02 करोड़ से ज्यादा शिक्षक हैं. 2024-25 की तुलना में छात्र और शिक्षक तो बढ़े हैं लेकिन स्कूल कम हो गए हैं.
कितने कम हो गए स्कूल?
UDISE+ की रिपोर्ट के मुताबिक, एक साल में लगभग 4,791 स्कूल बंद हो गए हैं. 2024-25 तक देशभर में 14.71 लाख स्कूल थे, जिनकी संख्या 2025-26 में घटकर 14.66 लाख हो गई.
पिछले एक साल में सबसे ज्यादा कमी सरकारी स्कूलों में आई है. 2024-25 तक देशभर में 10.13 लाख सरकारी स्कूल थे. 2025-26 में इनकी संख्या घटकर 10.05 लाख हो गई. यानी एक साल में 8,077 सरकारी स्कूल बंद हो गए. देखा जाए तो हर दिन औसतन 22 सरकारी स्कूल बंद हुए.
लेकिन इसी दौरान प्राइवेट स्कूलों की संख्या थोड़ी बढ़ गई है. 2025-26 तक 3.41 लाख प्राइवेट स्कूल हैं, जबकि 2024-25 तक 3.39 लाख ही स्कूल थे. एक साल में प्राइवेट स्कूलों की संख्या 2,106 बढ़ी है. इस हिसाब से रोजाना औसतन 6 प्राइवेट स्कूल खुले हैं.

सांकेतिक तस्वीर. (IANS)
छात्र भी बढ़े और शिक्षक भी
अच्छी बात यह है कि एक साल में स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र और पढ़ाने वाले शिक्षक दोनों ही बढ़े हैं. 4 साल में स्कूलों में शिक्षकों की संख्या 8 फीसदी तक बढ़ी है. 2022-23 में 94.8 लाख शिक्षक थे और 2025-26 तक बढ़कर 1.02 करोड़ हो गए. 51 लाख से ज्यादा शिक्षक सरकारी और 41 लाख से ज्यादा शिक्षक प्राइवेट स्कूलों में पढ़ा रहे हैं.
शिक्षकों की संख्या बढ़ने का असर ये हुआ कि स्कूलों में पीपुल टीचर रेशो (PTR) में सुधार हुआ है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के मुताबिक, हर 30 छात्रों पर एक शिक्षक होना चाहिए. अभी PTR बहुत बेहतर है. मिडिल लेवल पर हर 17 छात्रों पर तो सेकेंडरी लेवल पर हर 21 छात्रों पर एक टीचर है. ओवरऑल देखा जाए तो हर 24 छात्रों पर एक शिक्षक है.
एक और अच्छी बात ये है कि 2024-25 की तुलना में 2025-26 में स्कूल जाने वाली लड़कियों की संख्या बढ़ी है लेकिन दूसरी ओर लड़के कम हो गए हैं. एक साल में 9,208 लड़के कम हो गए हैं. जबकि, इसी दौरान 2.96 लाख से ज्यादा लड़कियां बढ़ी हैं.
लेकिन 1 लाख से ज्यादा स्कूलों में एक ही टीचर
लेकिन अभी भी देशभर में एक लाख से ज्यादा स्कूल ऐसे हैं, जहां सिर्फ एक ही टीचर है. सिंगल टीचर वाले स्कूलों में थोड़ी कमी भी आई है. एक साल में ऐसे स्कूल 3,282 स्कूल कम हुए हैं.
UDISE+ की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025-26 तक देशभर में 1,00,843 स्कूलों में सिर्फ एक ही टीचर है. इन स्कूलों में 29.12 लाख से ज्यादा छात्र पढ़ रहे हैं. यानी, एक टीचर 29-29 बच्चों को पढ़ा रहा है. सिंगल टीचर वाले सबसे ज्यादा 16,357 स्कूल आंध्र प्रदेश में है.
हैरान करने वाली बात ये है कि जहां 1 लाख से ज्यादा स्कूलों में सिर्फ एक ही टीचर है तो वहीं 5,663 स्कूल ऐसे भी हैं जहां टीचर तो है लेकिन कोई छात्र नहीं है. बिना छात्रों वाले स्कूल में ही 20,667 शिक्षक हैं.

सांकेतिक तस्वीर. (IANS)
बुनियादी ढांचे में भी थोड़ा सुधार
स्कूलों में बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर में भी थोड़ा सुधार हुआ है. अब 95% स्कूलों में बिजली है. 99.5% स्कूलों में पीने के पानी की व्यवस्था है. 98.5% स्कूलों में गर्ल्स टॉयलेट और 96.9% में हाथ धोने की सुविधा है. वहीं 90.5% स्कूलों में अब लाइब्रेरी भी बन गई है.
लेकिन अभी भी बहुत से स्कूल कंप्यूटर और इंटरनेट से दूर हैं. 2025-26 तक लगभग 70 फीसदी स्कूलों में ही कंप्यूटर है. वहीं, 67.4% स्कूलों में ही इंटरनेट की सुविधा है.
इसका मतलब हुआ कि 10 में से 3 स्कूल अभी भी ऐसे हैं जहां कंप्यूटर और इंटरनेट नहीं है. यह एक बड़ी बाधा है, क्योंकि NEP में छात्रों के लिए ऑनलाइन और डिजिटल एजुकेशन पर जोर दिया गया है, लेकिन जब स्कूलों में कंप्यूटर और इंटरनेट ही नहीं होगा तो छात्र पढ़ाई कैसे करेंगे?
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