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बांकीपुर से दतिया तक उपचुनाव में भाजपा को 2-1 से लगा झटका, गुजरात में कहां से आई गुड न्यूज

नरोत्तम मिश्रा की सीट के तौर पर चर्चित रही दतिया से भाजपा की हार ने भोपाल से दिल्ली तक नेतृत्व को मंथन के लिए मजबूर किया है.

बांकीपुर से दतिया तक उपचुनाव में भाजपा को 2-1 से लगा झटका, गुजरात में कहां से आई गुड न्यूज
नई दिल्ली:

भाजपा ने तीन महीने पहले ही बंगाल में प्रचंड जीत हासिल करके सरकार बनाई थी. लेकिन अब तस्वीर बदलती दिखी है. बिहार की बांकीपुर, मध्य प्रदेश की दतिया समेत तीन सीटों पर हुए उपचुनाव में भाजपा को 2-1 से झटका लगा है. भाजपा बांकीपुर की वह सीट उपचुनाव में हार गई, जहां से राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 20 साल तक विधायक रहे थे. उनसे पहले उनके पिता नवीन किशोर सिन्हा 11 साल विधायक थे. इस तरह 30 साल पुराना इतिहास बांकीपुर में बदल गया है. वहां पीके बांकीपुर के बांकुरे बनकर उभरे हैं. इसके अलावा दतिया में भाजपा के आशुतोष तिवारी को हार मिली है और उनके स्थान पर कांग्रेस के घनश्याम सिंह को जीत मिली है.

घनश्याम सिंह 72 साल के नेता हैं और पहले भी दो बार विधायक रहे हैं. मध्य प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की सीट के तौर पर चर्चित रही दतिया से भाजपा की हार ने भोपाल से दिल्ली तक नेतृत्व को मंथन के लिए मजबूर किया है. हालांकि भाजपा को गुजरात की मांजलपुर सीट पर जीत मिली है. यहां पार्टी के कैंडिडेट सतीश पटेल को 30630 वोटों से जीत मिली है. इसके साथ ही यहां भाजपा का दबदबा कायम रहा है. भाजपा की इस विधानसभा में यह लगातार 9वीं जीत है. इस सीट पर भाजपा के ही विधायक योगेश पटेल के निधन के बाद चुनाव हुआ था. 2012 के चुनाव से पहले तक वडोदरा शहर की इस सीट को रावपुरा के नाम से जाना जाता था. लेकिन 2008 के परिसीमन में नाम बदला.

यह सीट मांजलपुर कहलाई, लेकिन नतीजे पहले की तरह ही भाजपा के पक्ष में आते रहे. एक बार फिर भाजपा ने अपने इस गढ़ को बचा लिया है. इस तरह तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में भाजपा को 2-1 से झटका लगा है. हालांकि मांजलपुर में भी भाजपा की जीत का अंतर कम हुआ है. ऐसा इसलिए क्योंकि योगेश पटेल को 2022 में 1 लाख वोटों से जीत मिली थी, लेकिन इस बार आंकड़ा 30 हजार पर ही सिमट गया. योगेश पटेल को काका के नाम से जाना जाता था और वह इलाके में लोकप्रिय थे. ऐसे में भाजपा के आगे उनके विकल्प के तौर पर किसी मजबूत नेता को चुनने की चुनौती थी. फिर योगेश काका के विकल्प के तौर पर सतीश पटेल को चुना गया.

इस तरह भाजपा को गुजरात से गुड न्यूज मिली है, जहां अगले साल चुनाव होने हैं. हालांकि बांकीपुर से दतिया तक मिली हार ने दिल्ली तक टेंशन दी है. अब देखना होगा कि भाजपा की ओर से बांकीपुर और दतिया की हार के बाद क्या फैसले लिए जाते हैं. बांकीपुर में पीके 28 राउंड की काउंटिंग के बाद 19 हजार से ज्यादा वोटों से आगे चल रहे हैं. इसी तरह दतिया में घनश्याम सिंह भी भाजपा के आशुतोष तिवारी के मुकाबले 7531 वोटों से आगे हैं. कुल 15 राउंड की गिनती होनी है और 14 की हो चुकी है. इसलिए घनश्याम सिंह की जीत तय है. 

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