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फैज-ए-इलाही कौन थे? जिनके नाम पर बनी मस्जिद के पास दिल्ली में हुआ बवाल

फैज-ए-इलाही मस्जिद दिल्ली के तुर्कमान गेट में 18वीं सदी की ऐतिहासिक मस्जिद है. 6 जनवरी को मस्जिद और आसपास की जमीन पर अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई, जिसे लेकर बवाल हुआ. जानिए मस्जिद का इतिहास और इसका नाम फैज-ए-इलाही क्यों पड़ा.

फैज-ए-इलाही कौन थे? जिनके नाम पर बनी मस्जिद के पास दिल्ली में हुआ बवाल
faiz e Elahi Masjid: फैज ए इलाही मस्जिद का इतिहास

Delhi Faiz-e-Ilahi Masjid History: दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में फैज-ए-इलाही मस्जिद और उसके आसपास की जमीन से करीब 85% अतिक्रमण हटाने को लेकर बवाल हो गया. MCD ने अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों ने विरोध किया और पुलिस पर पत्थरबाजी भी की, जिस पर पुलिस को भी एक्शन लेना पड़ा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर फैज-ए-इलाही कौन थे, जिसके नाम पर यह मस्जिद बनी और इसका इतिहास क्या है. 

फैज-ए-इलाही मस्जिद कब बनी

इतिहासकारों के अनुसार, इस मस्जिद का निर्माण करीब 250 साल पहले यानी 18वीं सदी में मुगल सम्राट अहमद शाह बहादुर या शाह आलम द्वितीय के शासनकाल के दौरान हुआ था. तब मुगल साम्राज्य धीरे-धीरे खत्म हो रहा था, लेकिन दिल्ली की सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियां अभी भी अपने चरम पर थीं.

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फैज-ए-इलाही कौन थे?

इस मस्जिद का निर्माण हजरत शाह फैज-ए-इलाही ने करवाया था, जो अपने समय के एक सम्मानित सूफी संत थे. वे चिश्तिया सिलसिले से जुड़े हुए थे और लोगों में रूहानियत और भाईचारे का संदेश फैलाने के लिए जाने जाते थे. उन्होंने यह मस्जिद सिर्फ नमाज के लिए नहीं, बल्कि एक मरकज यानी आध्यात्मिक केंद्र के रूप में बनवाई, जहां लोग शिक्षा और आध्यात्मिक ज्ञान ले सकते थे. फैज-ए-इलाही ने अपनी संपत्ति और अनुयायियों की मदद से इस मस्जिद को आकार दिया.

मस्जिद की वास्तुकला और विशेषताएं

फैज-ए-इलाही मस्जिद में मुगल वास्तुकला की खूबसूरत झलक मिलती है. भले ही यह जामा मस्जिद जितनी बड़ी नहीं है, लेकिन इसकी बारीकियों और डिजाइन को देखकर उस समय की कला की समझ आती है. मस्जिद के निर्माण में मुख्य रूप से लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर का इस्तेमाल किया गया. इसके मेहराब और गुंबद पारंपरिक मुगल इंजीनियरिंग का बेहतरीन उदाहरण हैं. अंदरूनी हिस्से को इस तरह बनाया गया है कि गर्मियों में भी ठंडक बनी रहती है. मस्जिद के आंगन में छोटा वजूखाना है और दीवारों पर कुरान की आयतें खूबसूरती से उकेरी गई हैं. समय के साथ इसमें कुछ मरम्मत हुई है.

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