Turkman Gate History: राजधानी दिल्ली का तुर्कमान गेट फिलहाल सुर्खियों में है. यहां मौजूद फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास जब एमसीडी ने अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई शुरू की तो बवाल मच गया, मौके पर मौजूद अधिकारियों और पुलिस टीम पर पत्थरबाजी हुई, जिसके बाद लोगों को वहां से हटाने के लिए पुलिस की तरफ से आंसू गैस के गोले छोड़े गए. फिलहाल इस मामले को लेकर काफी ज्यादा चर्चा है. ऐसे में आज हम आपको तुर्कमान गेट की कहानी बता रहे हैं, जिसमें बताएंगे कि आखिर ये गेट कैसे बना था और किसके नाम पर इसका नाम तुर्कमान गेट पड़ा.
किसने बनवाया तुर्कमान गेट?
सबसे पहले ये जान लेते हैं कि तुर्कमान गेट को किसने बनवाया था. दरअसल मुगल बादशाह शाहजहां ने पुरानी दिल्ली में 14 अलग-अलग गेट बनवाए, तुर्कमान गेट भी इनमें से एक हैं. ये गेट शहर के चारों तरफ बनाए गए थे. इनमें अजमेरी गेट, दिल्ली गेट, लाहौरी गेट और मोरी गेट आदि शामिल हैं.
कैसे पड़ा इस गेट का नाम?
दिल्ली में बनाए गए तुर्कमान गेट का नाम सूफी संत हजरत शाह तुर्कमान बयाबानी के नाम पर रखा गया है. शाह तुर्कमान की दरगाह के पास ही ये दरवाजा है, जिसके चलते उनके नाम पर इस गेट का नाम रख दिया गया. दिल्ली का ये गेट पिछले कई दशकों से काफी मशहूर है और दिल्ली में रहने वाले लोग इसका नाम जानते हैं.
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तुर्कमान गेट पर क्या हुआ था?
साल 1976 में भारत में इंदिरा गांधी की सरकार थी, इमरजेंसी के बाद तब कई ऐसे कड़े फैसले लिए गए, जिन्हें लेकर खूब बवाल हुआ. उस वक्त डीडीए के उपाध्यक्ष जगमोहन मल्होत्रा और संजय गांधी की खास दोस्ती थी, एक दिन संजय गांधी और जगमोहन मल्होत्रा दिल्ली के तुर्कमान गेट पहुंच गए. संजय ने डीडीए अधिकारी से कहा कि वो चाहते हैं कि तुर्कमान गेट से जामा मस्जिद साफ नजर आए. इसके लिए तुर्कमान गेट के पास मौजूद बस्तियों को तोड़ना जरूरी था.
संजय गांधी के आदेश का पालन करने के लिए जगमोहन मल्होत्रा ने तुर्कमान गेट इलाके में बुलडोजर चला दिए. इस ड्राइव में कई लोगों की मौत भी हुई और दिल्ली के तुर्कमान गेट को छावनी में तब्दील कर दिया गया. इस एक्शन के बाद तुर्कमान गेट से सैकड़ों परिवारों को मंगोलपुरी और त्रिलोकपुरी जैसी जगहों पर शिफ्ट होना पड़ा.
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