Who Drew India-Pakistan Border : भारत और पाकिस्तान के बीच खींची गई सीमा आज भी इतिहास के सबसे बड़े और दर्दनाक फैसलों में गिनी जाती है. लेकिन जिस शख्स के हाथों यह लाइन खींची गई, वह इससे पहले कभी भारत नहीं आया था. सिरिल रेडक्लिफ भारत पहुंचे तो उनके पास पंजाब और बंगाल जैसे बेहद उलझे हुए इलाकों की सीमा तय करने के लिए सिर्फ कुछ हफ्तों का वक्त था. उन्होंने खुद जाकर इन इलाकों का सर्वे भी नहीं किया. फिर आखिर ऐसे व्यक्ति को यह जिम्मेदारी क्यों दी गई? उसने किन आधारों पर नक्शे पर वह लाइन खींची, जिसके बाद लाखों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा और कई इलाकों में भयानक हिंसा फैल गई?
चंद हफ्तों में तय कर दी गई भारत विभाजन की रेखा
भारत और पाकिस्तान के बंटवारे का फैसला हो चुका था और ब्रिटिश सरकार सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया को तेजी से पूरा करना चाहती थी. ऐसे समय में सिरिल रेडक्लिफ को दोनों देशों के बीच सीमा तय करने की जिम्मेदारी दी गई. रेडक्लिफ इससे पहले कभी भारत नहीं आए थे. भारत पहुंचने के बाद भी वह करीब 5-6 हफ्ते ही यहां रहे. इसी दौरान उन्हें पंजाब और बंगाल की सीमाएं तय करनी थीं. मुश्किल यह थी कि इन इलाकों में हिंदू, मुस्लिम और सिख आबादी कई जगह मिली-जुली थी. ऐसे में सिर्फ नक्शे पर एक सीधी लाइन खींचकर मामला खत्म नहीं हो सकता था.
बिना किसी सर्वे कमरे में बैठकर ही कर लिया बॉर्डर का फैसला
पंजाब और बंगाल के लिए अलग-अलग सीमा आयोग बनाए गए. इनमें कांग्रेस और मुस्लिम लीग के प्रतिनिधि भी शामिल थे. लेकिन कई मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी. ऐसे में अंतिम फैसला रेडक्लिफ को करना था. वह आयोग की सार्वजनिक बैठकों में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हुए. उन्होंने आयोग के सामने पेश किए गए दस्तावेजों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर फैसला किया. यानी जिन इलाकों की सीमाएं तय की जा रही थीं, उनका उन्होंने खुद जाकर सर्वे तक नहीं किया था.
आखिर रेडक्लिफ को ही क्यों चुना गया?
रेडक्लिफ एक ब्रिटिश वकील थे. उन्हें चुनने की एक बड़ी वजह यह मानी गई कि उनका भारत की राजनीति और यहां के अलग-अलग पक्षों से कोई पुराना जुड़ाव नहीं था. ऐसे व्यक्ति को अपेक्षाकृत निष्पक्ष माना गया, जो किसी एक पक्ष के दबाव में आए बिना फैसला कर सके.
लेकिन सवाल यह था कि आखिर अंग्रेजों ने ऐसे शख्स को पंजाब और बंगाल जैसे बेहद जटिल इलाकों की सीमाएं तय करने की जिम्मेदारी कैसे सौंप दी, जो इससे पहले भारत आया तक नहीं था और जिसके पास हालात को समझने के लिए बेहद कम समय था. बाद में इस पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल उठे.
एक लाइन ने बदल दी लाखों लोगों की जिंदगी
रेडक्लिफ लाइन तय होने के बाद उसका सबसे बड़ा असर उन लोगों पर पड़ा, जो अचानक खुद को नए देश की सीमा के दूसरी तरफ पाते थे. पंजाब और बंगाल के कई इलाकों में लोगों को अपने घर, जमीन और कारोबार छोड़कर भारत या पाकिस्तान जाना पड़ा. इसके बाद बड़े पैमाने पर पलायन शुरू हुआ और सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी.
ब्रिटिश हुकूमत भारत छोड़ रही थी, लेकिन जाते-जाते उसने नक्शे पर ऐसी लकीर खींच दी, जिसकी कीमत लाखों लोगों ने अपने घर, परिवार और जान देकर चुकाई. यही वजह है कि रेडक्लिफ लाइन आज भी सिर्फ दो देशों की सीमा नहीं, बल्कि भारत के इतिहास के सबसे दर्दनाक बंटवारे की याद भी दिलाती है.
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