दो देश हैं. दोनों के बीच सीमा नहीं लगती. लेकिन फिर भी दोनों मिलकर एक बाउंड्री कमीशन बना लेते हैं. सवाल तो उठेगा ही कि क्या इसका कोई मतलब है? जवाब है- नहीं.
लेकिन ऐसा हुआ है और ऐसा करने वाले हैं चीन और पाकिस्तान. दोनों ने एक नया बाउंड्री कमीशन बनाया है. भारत ने तुरंत इस पर आपत्ति जताई और साफ कर दिया कि जब चीन और पाकिस्तान के बीच कोई सीमा ही नहीं है, तो बाउंड्री कमीशन कैसे हो सकता है?
भारत ने चीन और पाकिस्तान के जॉइंट कमीशन को खारिज कर दिया है, जिसका ऐलान हाल ही में दोनों देशों ने किया था. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस कमीशन का कोई कानूनी आधार नहीं है. उन्होंने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा है.
उन्होंने 1963 में चीन और पाकिस्तान के बीच हुए कथित समझौते को भी खारिज कर दिया. उन्होंने साफ किया कि भारत उस समझौते को भी नहीं मानता.
चीन और पाकिस्तान के बीच बना बाउंड्री कमीशन क्या है? दोनों के बीच 1963 में कौनसा समझौता हुआ था? समझते हैं.
क्या है चीन-पाकिस्तान बाउंड्री कमीशन?
2013 में चीन और पाकिस्तान के बीच एक समझौता हुआ था. इस समझौते में बॉर्डर मैनेजमेंट की निगरानी के लिए एक जॉइंट कमीशन बनाने का प्रावधान था. इसलिए अब जाकर दोनों ने मिलकर एक जॉइंट कमीशन बनाया है.
पाकिस्तानी अखबार 'द डॉन' की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह कथित आयोग एक ऐसी बॉर्डर के लिए को-ऑर्डिनेशन मैकेनिज्म बनाएगा, जो पाकिस्तान और चीन के बीच आवाजाही और चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) से जुड़े व्यापार और कनेक्टिविटी के लिए जरूरी है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने चीन और पाकिस्तान के बीच हुए इस कथित समझौते को खारिज कर दिया.
Our response to media queries on the so-called Pakistan-China Boundary Joint Commission ⬇️
— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) September 16, 2026
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उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान के पास उस भारतीय इलाके के बारे में कोई समझौता करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है, जिस पर उसने गैर-कानूनी और जबरदस्ती कब्जा कर रखा है. हमने 1963 के तथाकथित चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते को कभी मान्यता नहीं दी है और हमेशा यही कहा है कि यह गैर-कानूनी और अमान्य है.'
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1963 का समझौता क्या है?
1963 में चीन और पाकिस्तान के बीच एक समझौता हुआ था. इस समझौते के तहत पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर की 5,180 वर्ग किमी जमीन चीन को सौंप दी थी.
भारत ने साफ किया है कि यह इलाका पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर का हिस्सा था और इसे कानूनी तौर पर चीन को नहीं सौंपा जा सकता था.
पाकिस्तान ने जो हिस्सा चीन को सौंपा, उसे शक्सगाम घाटी कहा जाता है. इसे ट्रांस-काराकोरम भी कहते हैं. यह घाटी सियाचिन ग्लेशियर के उत्तर में है.
जबकि, ऐतिहासिक रूप से जम्मू-कश्मीर की सियासत ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और डोगरा शासक महाराजा गुलाब सिंह के बीच 1846 में हुई अमृतसर की संधि के बाद बनी थी. इसमें गिलगित-बल्टिस्तान, PoK, जम्मू, लद्दाख, कश्मीर और ट्रांस-काराकोरम इलाका शामिल था.
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लेकिन पाकिस्तान ने कैसे दे दिया?
1947 में बंटवारे के कुछ ही महीनों बाद कबाइलियों के वेश में पाकिस्तानी सेना ने जम्मू-कश्मीर पर हमला कर दिया. दोनों देशों के बीच जंग शुरू हो गई. यह भारत और पाकिस्तान के बीच पहला युद्ध था.
मामला फिर संयुक्त राष्ट्र पहुंचा और तय हुआ कि जो जहां है, वहीं रहेगा. पाकिस्तान की सेना काफी अंदर तक आ गई थी और संयुक्त राष्ट्र में जाने के कारण कश्मीर के 78 हजार वर्ग किमी जमीन पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा हो गया.
फिर अक्टूबर-नवंबर 1962 में भारत और चीन में युद्ध हो गया. इसके बाद चीन और पाकिस्तान में नजदीकियां बढ़ने लगीं. 2 मार्च 1963 को बीजिंग में चीन और पाकिस्तान ने एक सीमा समझौते पर दस्तखत किए. समझौते का मकसद था कि चीन के शिनजियांग और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के बीच सीमा तय करना.
समझौते के तहत पाकिस्तान ने शक्सगाम घाटी का करीब 5,180 वर्ग किमी का इलाका चीन को सौंप दिया.
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तब भारत ने कुछ नहीं किया था?
भारत ने कभी भी चीन और पाकिस्तान के बीच हुए इस समझौते को मान्यता नहीं दी है. भारत का साफ कहना है कि वह भारतीय क्षेत्र है और पाकिस्तान उसे चीन को नहीं सौंप सकता.
समझौते के तीन बाद ही संसद में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने कहा था, 'हम पाकिस्तान से बातचीत करना चाहते हैं लेकिन चीन-पाकिस्तान समझौते की घोषणा कश्मीर और उससे जुड़े मामलों पर बातचीत के नतीजे को प्रभावित करने के इरादे से की गई थी.'
चीन के बारे में नेहरू ने कहा था, 'चीन भले ही यह दावा करता रहा हो कि वह कभी कश्मीर विवाद में शामिल नहीं रहा है या उसका यह बेतुका दावा हो कि सीमा वार्ता ने चीन और पाकिस्तान के बीच दोस्ती को बढ़ावा दिया है और यह एशिया और विश्व शांति के हित में है, लेकिन असल में वह भारत-पाकिस्तान संबंधों में सीधे तौर पर दखल दे रहा है.'
उन्होंने कहा था कि चीन भारत और पाकिस्तान के बीच मतभेदों का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने संसद में बताया था कि समझौते के खिलाफ भारत ने अपना विरोध चीन के पास दर्ज कराया है.
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