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सिविल लाइन्स ही नहीं, ये इलाके भी दिलाते हैं अंग्रेजी हुकूमत की याद; देख लीजिए पूरी लिस्ट

Colonial-Era Names: केंद्र सरकार का कहना है कि गुलामी की याद दिलाने वाले तमाम नामों को बदल जाएगा. बताया जा रहा है कि सरकार सिविल लाइन्स के नाम बदलने पर भी विचार कर रही है.

सिविल लाइन्स ही नहीं, ये इलाके भी दिलाते हैं अंग्रेजी हुकूमत की याद; देख लीजिए पूरी लिस्ट
Colonial-Era Names: अंग्रेजों से जुड़े नाम

Colonial-Era Names: केंद्र सरकार लगातार उन नामों को बदल रही है, जो औपनिवेशिक (Colonial) शासन की याद दिलाते हैं. इसमें अब सिविल लाइन्स का नाम भी शामिल हो चुका है, जिसे बदलने पर विचार किया जा रहा है. इससे पहले कई औपनिवेशिक विरासतों को लेकर सरकार ऐसा कर चुकी है. बीजेपी सरकार का कहना है कि आने वाले कुछ सालों में गुलामी की ऐसी ही तमाम निशानियों को हटाया जाएगा. ऐसे में आज हम आपको सिविल लाइन्स के अलावा ऐसे ही कुछ नामों के बारे में बता रहे हैं, जो हर शहर में दिखते हैं. 

सिविल लाइन्स 

सिविल लाइन्स भी अंग्रेजों का दिया एक नाम है. ये इलाके आमतौर पर पौश होते हैं. ब्रिटिश शासन के दौरान सीनियर अंग्रेज अधिकारियों और नौकरशाहों के लिए सिविल लाइन्स इलाका बनाया जाता था. भारत के हर शहर में ऐसे इलाके बनाए गए, देश को आजादी मिलने के बाद भी ये नाम चलता रहा और आज भी तमाम शहरों में सिविल लाइन्स इलाके मौजूद हैं. 

सर्किट हाउस 

अंग्रेजों के जमाने में सिविल लाइन्स की तरह सर्किट हाउस भी होते थे. ये एक तरह के गेस्ट हाउस हैं, जहां ऊंचे पदों पर रहने वाले पदाधिकारियों और वीआईपी लोगों को ठहराया जाता था. जब कोई बड़ा अधिकारी किसी दूसरे शहर में किसी काम से जाता तो वो इसी सर्किट हाउस में ठहरता था. आज भी भारत में कई सर्किट हाउस हैं, जिनका इस्तेमाल सरकारी कर्मचारियों और वीआईपी लोगों के लिए होता है. 

मॉडल टाउन 

मॉडल टाउन का औपनिवेशिक शासन से तो सीधा कनेक्शन नहीं है, लेकिन इसे अंग्रेजों की प्रशासनिक शैली गार्डन टाउन से प्रेरित होकर बनाया गया. ये एक पॉश इलाका होता है, जहां हर तरह की सुविधाएं और बाकी चीजें होती हैं. अब कई शहरों में इसे एक व्यावसायिक हब के तौर पर विकसित किया गया है. 

कैंट इलाके 

भारत में आने के बाद अंग्रेजों ने पूरी सेना खड़ी की, जिनके लिए छावनी इलाके यानी कैंटोनमेंट एरिया बनाए गए. इन्हें आसान भाषा में कैंट इलाके कहा जाता है. सेना के क्षेत्र को आज भी इसी नाम से बुलाया जाता है. भारत के तमाम शहरों में कैंट इलाके हैं. 

मॉल रोड 

भारत के ज्यादातर हिल स्टेशनों पर आपको मॉल रोड जरूर मिलेगी. ये एक सड़क होती है, जहां कई तरह की दुकानें लगी होती हैं और उन्हें काफी अच्छी तरह से सजाया जाता है. इन मॉल रोड का औपनिवेशिक शैली में निर्माण किया गया था, इन्हें अंग्रेज अधिकारियों और उनके परिवार को धूप या गर्मी से बचाने के लिए खास बनाया गया था. इस पूरी सड़क पर ब्रिटिश अधिकारियों के घर और काम की तमाम चीजें मौजूद होती थीं. 

कंपनी बाग

कई शहरों में घूमने के दौरान आपसे भी ड्राइवर ने जरूर कहा होगा कि कंपनी बाग घूम आइए. ये वही बाग हैं, जिन्हें अंग्रेजों ने बनाया और इनका इस्तेमाल वो अपने परिवार या फिर सैन्य अधिकारियों के घूमने के लिए किया करते थे. आमतौर पर ये कंपनी बाग शहर के बीचोंबीच होते थे. बाद में इनका नाम नहीं बदला गया और आज भी शहरों में कंपनी बाग मौजूद हैं. 

डाक बंगला

अंग्रेजों ने सर्किट हाउस की तरह कई जगह डाक बंगले भी बनाए थे. इन्हें अंग्रेजी हुकूमत के अधिकारियों के ठहरने के लिए ही बनाया गया था. ये एक तरह के रेस्ट हाउस थे. जब भी अधिकारियों को सफर के दौरान बीच में रुकना होता था, वो डाक बंगले में ही ठहरते थे. अब ज्यादातर डाक बंगले जर्जर होकर भूतिया हो चुके हैं. 

टाउन हॉल

अंग्रेजों ने तमाम शहरों में टाउन हॉल भी बनवाए थे. ये उनके शासन के प्रशासनिक केंद्र हुआ करते थे. आमतौर पर इन टाउन हॉल से ही पूरे शहर का संचालन किया जाता था.  अब पुराने टाउन हॉल्स को आधुनिक तरीके से विकसित किया जा रहा है. 

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