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कानून की पढ़ाई पूरी होने के बाद क्या सीधे वकालत कर सकते हैं? जान लीजिए नियम

कानून की पढ़ाई के बाद सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस हासिल करना होता है. इसके बाद ही एडवोकेट के रूप में प्रैक्टिस की जा सकती है. आखिरी भारत में वकील बनने की पूरी प्रक्रिया क्या है, आइए जानते हैं इसके बारे में.

कानून की पढ़ाई पूरी होने के बाद क्या सीधे वकालत कर सकते हैं? जान लीजिए नियम
Bachelor of Laws (LL.B.) भारत में आमतौर पर 2 तरीकों से होती है.

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने हाल ही एक आदेश जारी किया , जिसमें कहा गया कि NALSAR यूनिवर्सिटी हैदराबाद के एक बैच के ग्रैजुएट्स छात्र वकील के तौर पर पंजीकरण नहीं कर सकते हैं. इस आदेश पर काफी विवाद भी हुआ ये मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है और सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बीसीआई (BCI) से जवाब मांगा है. इस पूरे मामले के बीच सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि कानून की पढ़ाई पूरी होने के बाद क्या सीधे वकालत कर सकते हैं? वकील बनने के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) में पंजीकरण करवाना जरूरी है क्या? 

वकील बनने के लिए क्या करना होता है

दरअसल बैचलर ऑफ लॉज यानी सिर्फ LL.B की पढ़ाई करके वकील बनने का सपना पूरा किया जा सकता है. जो लोग वकील बनना चाहते हैं, उन्हें बैचलर ऑफ लॉज की पढ़ाई करनी होती है. Bachelor of Laws (LL.B.) भारत में आमतौर पर 2 तरीकों से होती है. एक 3 साल की LL.B होती है, जो कि Graduation पूरी करने के बाद होती है या 5 साल का Integrated LL.B कोर्स होता है. अब सवाल ये उठता है कि क्या कानून की पढ़ाई पूरी होने के बाद क्या सीधे वकालत कर सकते हैं?

सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस हासिल करना है जरूरी

LL.B की पढ़ाई करने के बाद आप सीधे अदालत में वकालत शुरू नहीं कर सकते है. भारत में Advocate के रूप में practice करनी होती है और इसके लिए State Bar Council में एनरोलमेंट करना होता है. All India Bar Examination (AIBE) से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करनी होती है. सरल शब्दों में समझा जाए तो, BCI से मान्यता प्राप्त कॉलेज या यूनिवर्सिटी से LL.B करने के बाद संबंधित State Bar Council में एडवोकेट के रूप में एनरोलमेंट की प्रक्रिया पूरी करनी होती है. वहीं AIBE, Bar Council of India की परीक्षा पास करनी होती है. इसके बाद Certificate of Practice (CoP) दिया जाता है. सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस मिलने के बाद एडवोकेट के रूप में प्रैक्टिस कर सकते है.  AIBE और enrolment के नियम BCI बनता है. जिसे समय-समय पर बदला भी जाता है.

Certificate of Practice को कैंसिल भी किया जा सकता है. दरअसल जब किसी वकील के खिलाफ Bar Council के नियमों के तहत disciplinary action लिया जाता है या वह practice से जुड़ी शर्तें को पूरा नहीं करता है, तो इस सूरत में सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस कैंसिल कर दिया जाता है.

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