हैदराबाद की नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (NALSAR) यूनिवर्सिटी इन दिनों काफी चर्चा में है. यहां कानून की पढ़ाई पूरी कर चुके कुछ छात्रों ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत के यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में शामिल होने का विरोध किया, इस मामले को लेकर छात्रों ने खुद सीजेआई को भी चिट्ठी लिखी. मामला सामने आने के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने इस बैच के सभी छात्रों की वकालत पर रोक लगाने की बात कही, जिसे लेकर अब CJI सूर्यकांत ने नाराजगी जताई है. इस दौरान उन्होंने अपने कॉलेज के दिनों का भी जिक्र किया और कहा कि वो खुद कॉलेज में स्टूडेंट्स एक्टिविटी में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे. ऐसे में आइए जानते हैं कि CJI सूर्यकांत ने कहां से पढ़ाई की है और कैसे उनकी वकालत की शुरुआत हुई.
NALSAR मामले में क्या बोले CJI?
CJI सूर्यकांत ने NALSAR के लॉ स्टूडेंट्स की तरफ से हुए विरोध पर कहा, "अगर छात्र कानूनी और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करना चाहते हैं, तो बार काउंसिल को इसमें हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है. इसमें BCI का कोई लेना-देना नहीं है. हम छात्रों के साथ हैं, छात्रों ने मुझे एक लेटर लिखा है और ये मेरे और छात्रों के बीच की बात है. BCI बिना वजह सर्कुलर जारी करने वाला कौन होता है? जब मैं कॉलेज में था, तो मैं भी छात्र गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल रहता था. कभी-कभी भले ही वे गलत बात कह रहे हों, लेकिन अगर वे कानूनी रूप से अपनी आवाज उठा रहे हैं, तो उन्हें इसकी इजाजत दी जानी चाहिए."
इस कॉलेज से ली थी लॉ की डिग्री
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया की वेबसाइट के मुताबिक, जस्टिस सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था. उन्होंने 1981 में गवर्नमेंट पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज, हिसार से ग्रेजुएशन की डिग्री ली. इसके बाद 1984 में महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (रोहतक) से कानून की डिग्री (LLB) हासिल की. यानी सीजेआई की हायर एजुकेशन रोहतक से ही पूरी हुई.
यहां से हुई वकालत की शुरुआत
सीजेआई सूर्यकांत ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद 1984 में हिसार की जिला अदालत से वकालत शुरू की. इसके बाद 1985 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट चले गए. 7 जुलाई 2000 को उन्हें हरियाणा का सबसे कम उम्र का एडवोकेट जनरल बनाया गया, इसके बाद मार्च 2001 में 'सीनियर एडवोकेट' का दर्जा मिला.
बतौर जज करियर की शुरुआत
वकालत के बाद जस्टिस सूर्यकांत ने बतौर जज अपना सफर 2004 में शुरू किया. 9 जनवरी 2004 को उन्हें पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में स्थायी जज के तौर पर नियुक्ति मिली. इसके बाद जस्टिस सूर्यकांत 2007 से लेकर 2011 तक राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की गवर्निंग बॉडी के सदस्य रहे. इसके बाद 2011 में ही उन्होंने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से डिस्टेंस एजुकेशन से LLM यानी कानून में मास्टर्स डिग्री ली. इसमें उन्हें यूनिवर्सिटी में पहला स्थान मिला.
जस्टिस सूर्यकांत ने 5 अक्टूबर 2018 को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर शपथ ली. इसके बाद उनका करियर ऐसे ही आगे बढ़ा और 24 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट के जज बने. कई सालों तक सुप्रीम कोर्ट में बतौर जज काम करने के बाद 24 नवंबर 2025 को उन्होंने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के तौर पर शपथ ली. जस्टिस सूर्यकांत ने संवैधानिक, सर्विस और सिविल मामलों में महारथ हासिल की है.
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