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कौन हैं बुद्धेश्वर भगत? करोड़ों के लेन-देने का दावा, इनके बयान से JPSC 14वीं PT परीक्षा धांधली में खुल रहे राज

JPSC 14वीं पीटी परीक्षा में कथित धांधली की जांच के दौरान गिरफ्तार बुद्धेश्वर भगत के बयान ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं. CID कथित तौर पर करोड़ों रुपये के लेन-देन, अभ्यर्थियों से संपर्क और चयन के लिए बनाए गए नेटवर्क की जांच कर रही है.

कौन हैं बुद्धेश्वर भगत? करोड़ों के लेन-देने का दावा, इनके बयान से JPSC 14वीं PT परीक्षा धांधली में खुल रहे राज
JPSC 14वीं पीटी कथित धांधली में बड़ा खुलासा? बुद्धेश्वर भगत के बयान से जांच में सामने आए करोड़ों के लेन-देन के दावे
रांची:

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं पीटी परीक्षा में कथित धांधली की जांच लगातार नए खुलासों की ओर बढ़ रही है. इस मामले में CID द्वारा गिरफ्तार किए गए बुद्धेश्वर भगत का बयान जांच का अहम आधार बन गया है. जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, बुद्धेश्वर ने पूछताछ में ऐसे दावे किए हैं, जिनसे कथित तौर पर अभ्यर्थियों से करोड़ों रुपये लेने और चयन कराने के लिए एक संगठित नेटवर्क के काम करने की बात सामने आई है. अब जांच एजेंसी इन दावों की पुष्टि के लिए पैसों के लेनदेन, दस्तावेजों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है. इस पूरे मामले में कई नाम सामने आने के बाद अभ्यर्थियों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है.

कौन है बुद्धेश्वर भगत?

जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, CID ने 5 अगस्त 2026 को बुद्धेश्वर भगत को गिरफ्तार किया था. वह लोहरदगा जिले के बेजवाली गांव का रहने वाला है. बताया जाता है कि वर्ष 2008 से वह नामकुम स्थित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) कार्यालय में संविदा पर कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में कार्यरत था. नौकरी के साथ-साथ वह जमीन की खरीद-बिक्री का काम भी करता था. इसी दौरान वर्ष 2022-23 में उसकी मुलाकात अभय कुमार तिवारी से हुई. अभय तिवारी NHM में आउटसोर्सिंग का काम लेने के सिलसिले में आया था. बाद में दोनों के बीच संपर्क बढ़ता गया.

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JPSC विज्ञापन के बाद बढ़ी गतिविधियां

सूत्रों के अनुसार, जनवरी 2026 में JPSC 14वीं परीक्षा का विज्ञापन जारी होने के बाद अभय तिवारी ने बुद्धेश्वर भगत से संपर्क किया. CID के समक्ष दिए गए कथित स्वीकारोक्ति बयान में बुद्धेश्वर ने दावा किया कि अभय तिवारी ने पैसे लेकर अभ्यर्थियों का चयन कराने की बात कही थी. इसके बाद अभ्यर्थियों से संपर्क करने और उन्हें तैयार करने की जिम्मेदारी उसे सौंपी गई. बयान के अनुसार, कुल 24 अभ्यर्थियों से संपर्क किया गया और उनसे गारंटी के तौर पर मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र भी लिए गए.

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करोड़ों रुपये की कथित डील का दावा

बुद्धेश्वर के कथित बयान के मुताबिक, सामान्य और ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों के चयन के लिए 1 करोड़ रुपये तथा एसटी वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 80 लाख रुपये तय किए गए थे. भुगतान को तीन चरणों में लेने की बात कही गई थी. इसमें पीटी परीक्षा से पहले 10 लाख रुपये, मुख्य परीक्षा से पहले कुल रकम का 50 प्रतिशत और इंटरव्यू से पहले बाकी राशि देने की शर्त रखी गई थी. बयान में यह भी दावा किया गया है कि अभ्यर्थी उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति को प्रति अभ्यर्थी 15 लाख रुपये कमीशन दिया जाना था.

11 अभ्यर्थियों से 1.10 करोड़ रुपये लेने का दावा

CID को दिए गए कथित बयान में बुद्धेश्वर ने कहा है कि 24 में से 11 अभ्यर्थियों ने पीटी परीक्षा से पहले 10-10 लाख रुपये दिए थे. इस तरह कुल 1.10 करोड़ रुपये जमा होने का दावा किया गया है. बयान में कपिल कुमार महतो, संतोष कुमार, वंदना कुमारी, दिलीप कुमार राणा, ओमप्रकाश राणा, शिवम सिंह, पवन कुमार मुंडा, रॉकी सचिन लकड़ा, मनोज कुमार, रौशन केरकेट्टा और उमाकांत उरांव के नाम का उल्लेख किया गया है. हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी जांच का विषय है.

पैसा किन तक पहुंचा?

बुद्धेश्वर ने कथित तौर पर जांच एजेंसी को बताया कि अभ्यर्थियों से मिले 1.10 करोड़ रुपये उसने सौरभ पांडेय और उमेश कुमार तक पहुंचाए थे. बयान के अनुसार, सौरभ पांडेय को अभय तिवारी का साला और उमेश कुमार को उसका कारोबारी साझेदार बताया गया है. वहीं बाकी 13 अभ्यर्थियों द्वारा पैसा नहीं देने की बात भी कही गई है.

प्रमाणपत्र वापस मांगने लगे अभ्यर्थी

जैसे-जैसे JPSC मामले में CID की जांच और कार्रवाई की खबरें सामने आने लगीं, अभ्यर्थियों ने अपने मूल प्रमाणपत्र वापस मांगने शुरू कर दिए. सूत्रों के मुताबिक, 1 अगस्त को उमेश कुमार बनारस से रांची आया और प्रमाणपत्र लौटाने की प्रक्रिया शुरू की गई. इसी मामले में CID ने बुद्धेश्वर भगत के साथ उमेश कुमार और रमेश कुमार को भी गिरफ्तार किया था. बाद में तीनों से रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई.

जांच के केंद्र में पूरा नेटवर्क

अब जांच एजेंसी के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि अभ्यर्थियों से जुटाई गई कथित रकम आखिर किन-किन लोगों तक पहुंची और कथित चयन नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा था. CID बुद्धेश्वर के बयान में किए गए दावों का मिलान बैंकिंग रिकॉर्ड, दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य गवाहियों से कर रही है. जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित नेटवर्क का संपर्क किस स्तर तक था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही.

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