झारखंड हाईकोर्ट के सख्त निर्देश के बाद अब देश के प्रसिद्ध सिद्ध पीठ स्थल रामगढ़ जिले के रजरप्पा में अवस्थित प्रसिद्ध आस्था केंद्र मां छिन्नमस्तिका मंदिर में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. अतिक्रमण हटाने के बाद अब प्रशासन पूरे इलाके को आधुनिक, सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है. लेकिन इसी बीच एक बड़ा सवाल भी उठ रहा है, मंदिर के पास बहने वाली भैरवी नदी का “डेंजर जोन” आखिर इतना खतरनाक क्यों है? और क्या हर साल यहां लोगों की जान जाती है?
दरअसल, रामगढ़ जिले का प्रसिद्ध आस्था केंद्र रजरप्पा मंदिर न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि प्राकृतिक रूप से भी बेहद संवेदनशील क्षेत्र है. यहां भैरवी नदी और दामोदर नदी का संगम होता है, जहां जलधारा बेहद तेज और अनियमित रहती है. खासकर भैरवी नदी का एक हिस्सा “डेंजर जोन” के रूप में चिन्हित किया गया है.

इस डेंजर जोन की सबसे बड़ी वजह है नदी की तेज धारा, अचानक गहराई और फिसलन भरे पत्थर. बारिश के दिनों में अक्सर छिलका पुल के ऊपर से भारी नदी के जलस्तर में काफी वृद्धि हो जाती है. पानी का बहाव इतना तेज होता है कि सामान्य व्यक्ति संतुलन नहीं बना पाता. ऊपर से श्रद्धालु बिना सुरक्षा के नदी में उतर कर नदी की तेज जलधारा में फस जाते हैं और फिर संतुलन खो देते हैं और फिर हादसों का खतरा और बढ़ जाता है.
हाईकोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि डेंजर जोन में बैरिकेडिंग की जाए, चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं. इसके बाद अब रामगढ़ प्रशासन एक्शन मोड में आ गया है. शनिवार को रामगढ़ के उपायुक्त ऋतुराज ने मंदिर परिसर का दौरा भी किया और निरीक्षण से पहले प्रशासनिक भवन में अहम बैठक हुई, जिसमें मंत्री फागू बेसरा, मंदिर प्रबंधन समिति और विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल हुए. बैठक में पूरे क्षेत्र के पुनर्विकास की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई.

बता दें कि हाईकोर्ट के आदेश पर प्रशासन ने मंदिर परिसर से 254 अवैध दुकानों को हटाकर वर्षों पुराने अतिक्रमण को खत्म कर दिया है. अब अगला फोकस है पूरे क्षेत्र को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाना. निरीक्षण के दौरान प्रस्तावित बस स्टैंड, एंट्री-एग्जिट गेट, घाट निर्माण और दुकानों के नए स्थानों को चिन्हित किया गया.
साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सभी कार्य तय समय सीमा में पूरे किए जाएं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो. मंदिर परिसर को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना हमारी प्राथमिकता है. हटाए गए दुकानदारों के पुनर्वास के लिए वैकल्पिक स्थान चिन्हित किए जा रहे हैं, ताकि विकास के साथ सभी के हितों का संतुलन बना रहे. इसके अलावा, विकास कार्यों के दौरान काटे जाने वाले पेड़ों के बदले क्षतिपूर्ति वनीकरण की योजना भी शुरू कर दी गई है. इसके लिए अलग से स्थल निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं.
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