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This Article is From Aug 05, 2018

अनुच्छेद 35A पर सुप्रीम कोर्ट के 'विपरीत' फैसले से जम्मू-कश्मीर पुलिस में हो सकता है विद्रोह : खुफिया विभाग

जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजीपी एसपी वैद्य ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा, 'पुलिस अधिकाकरियों की भी अपनी राय है. मैं जम्मू-कश्मीर का निवासी और पुलिस अधिकारी हूं. मेरे अपने विचार हैं. लेकिन मेरी ड्यूटी क्या है. मैं इसे पहले निभाउंगा.

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अनुच्छेद 35A पर सुप्रीम कोर्ट के 'विपरीत' फैसले से जम्मू-कश्मीर पुलिस में हो सकता है विद्रोह : खुफिया विभाग
एक एनजीओ ने अनुच्छेद 35ए की संवैधानिकता की चुनौती दी है.
  • अनुच्छेद 35 A पर सु्प्रीमकोर्ट में हो रही है सुनवाई
  • राज्यपाल एनएन वोहरा ने सुनवाई टालने की लगाई गुहार
  • खूफिया विभाग ने राज्य सरकार को किया अगाह
नई दिल्ली: खुफिया विभाग ने अगाह किया है कि सोमवार को अगर सुप्रीम कोर्ट जम्मू-कश्मीर से जुड़ी संविधान के अनुच्छेद 35ए कोई 'विपरीत' फैसला देता है तो राज्य की पुलिस में ही 'विद्रोह' हो सकता है. यह जानकारी एनडीटी को सूत्रों के हवाले से मिली है. आपको बता दें कि इस अनुच्छेद की संवैधानिकता पर सवाल उठाते हुये इस पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती है. इस अनुच्छेद में 'जम्मू-कश्मीर के मूल निवासियों' की बात कही गई है और उनके अधिकार तय किये गये हैं. इसके साथ ही राज्य से बाहर का निवासी वहां जमीन नहीं खरीद सकता है. जम्मू-कश्मीर पुलिस वहां फैले आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षाबलों के साथ मिलकर लड़ती रही है. इसके साथ ही वह अलगाववादियों और पत्थरबाजों से भी निपटती है. 1990 से लेकर अब तक 1600 पुलिसकर्मी इस संघर्ष में जान गंवा जा चुके हैं. लेकिन अब पुलिस के अधिकारियों को चिंता है कि अगर सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 35A को रद्द कर दिया तो इसके क्या परिणाम हो सकते हैं. वहीं याचिका देने वाले एनजीओ का कहना है कि यह अनुच्छेद मौलिक अधिकारों का हनन करता है. यह देश के नागरिकों का अधिकार है कि वह कहीं भी संपत्ति खरीद और रह सकते हैं.

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एनजीओ की यह भी दलील है कि 35A को राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र से बाहर है इसलिये यह कहना है कि गलत है कि इसमें कोई भी परिवर्तन सिर्फ संसद के जरिये ही किया जा सकता है. वहीं इस मुद्दे पर खुफिया विभाग ने राज्य सरकार को अगाह किया है कि अगर इसमें कोई भी बदलाव हुआ तो पुलिस में ही विद्रोह हो सकता है. राज्य सरकार के कर्मचारी, ट्रेड यूनियन, व्यापार संगठन, सिविल सोसायिटी और वकीलों ने भी विरोध की धमकी दी है. पिछले एक एक हफ्ते में इसको लेकर कई प्रदर्शन हो चुके हैं.

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वहीं राज्यपाल ने एनएन वोहरा की ओर से सुप्रीम कोर्ट मे अपील की गई है इस पर सुनवाई पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव होने तक टाल दिया जाए. यह चुनाव इसी साल अक्टूबर में होने हैं. वहीं जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजीपी एसपी वैद्य ने भी माना है कि स्थानीय पुलिस के लोग भी इस बारे में अपनी राय रखते हैं. हालांकि उन्होंने विश्वास जताया कि पुलिस में कोई विद्रोह नहीं होगा क्योंकि पुलिस के लिये ड्यूटी पहले होती है.   एसपी वैद्य ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा, 'पुलिस अधिकाकरियों की भी अपनी राय है. मैं जम्मू-कश्मीर का निवासी और पुलिस अधिकारी हूं. मेरे अपने विचार हैं. लेकिन मेरी ड्यूटी क्या है. मैं इसे पहले निभाउंगा.
 
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