
रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के कप्तान विराट कोहली (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
विराट कोहली के लिए घरेलू टी-20 महालीग का ये सीज़न अब तक भुला देने वाला साबित हुआ है जिसकी वजह उनसे कहीं ज़्यादा उनकी टीम के सुपरस्टार्स रहे हैं. विराट के लिए टूर्नामेंट की हर जीत जून में लंदन में होने वाली चैंपियंस ट्रॉफ़ी के लिए उनका हौसला बढ़ा सकती है, जबकि पंजाब के लिए अब भी जीत के दरवाज़े खुले हुए हैं.
बेंगलुरु में होने वाले मैच से पहले नेट्स में अभ्यास के दौरान विराट कोहली के आत्मविश्वास में कोई कमी नहीं दिखी. कप्तान विराट ने अबतक 7 मैचों में क़रीब 35 के औसत से 3 अर्द्धशतकों के सहारे 239 रन बनाए हैं जिन्हें यकीनन बुरा नहीं कहा जा सकता. फिर भी विराट के लिए राहत के पल मैदान के बाहर ही नज़र आते हैं. विराट इन दिनों अपनी बॉलीवुड एक्टर दोस्त अनुष्का के साथ नज़र आ रहे हैं जिन्होंने 1 मई को अपना 29वां जन्मदिन मनाया है. लेकिन मैदान पर हालात एकदम अलग हैं. तीन बार फ़ाइनल खेल चुकी बेंगलुरु की टीम अबतक टूर्नामेंट में तीन मैच भी नहीं जीत पाई (11मैच, 2 जीत, 8 हार, 1 बेनतीजा, 5 अंक) है.
बेंगलुरु और विराट की फ़िक्र की बड़ी वजहें उनके स्टार खिलाड़ी ही हैं. जीनियस एबी डिविलियर्स (196 रन) चोटिल रहे हैं, बेंगलुरु के लिए सबसे ज़्यादा 241 रन बनाने वाले केदार जाधव बेरंग दिखे हैं और दस हज़ारी क्रिस गेल (6 मैच, 77 रन, 25.33 औसत, 1 अर्द्धशतक) के क्या कहने. गेल इस सीज़न इस घरेलू टूर्नामेंट के जितनी जल्दी हो सके बीत जाने की दुआएं मांग रहे होंगे. पवन नेगी (9 मैच में 10 विकेट), युज़वेंद्र चहल (10 मैच में 11 विकेट) और कैरीबियाई लेग स्पिनर सैमुअल बद्री (5 मैच में 9विकेट) के निजी आंकड़े बेशक उतने बुरे ना नज़र आएं. लेकिन गेंदबाज़ी इस टीम की कमज़ोर कड़ी ही साबित हुई है.
ग्लेन मैक्सवेल और उनकी टीम के दूसरे स्टार्स को इन दिनों एक विज्ञापन के लिए साइकिल की सवारी करनी पड़ी. उनकी टीम की रफ़्तार मैदान पर भी कुछ ज़्यादा तेज़ नहीं दिखाई दी है. इस टीम ने अबतक 11 में से 4 मैच जीते हैं. लेकिन इस टीम के प्ले ऑफ़्स में पहुंचने की उम्मीद बरक़रार है. इसलिए कप्तान ग्लेन मैक्सवेल नेट्स पर अपनी टीम का दबाव कम करने की कोशिश में लगे दिख रहे हैं.
मुंबई के ख़िलाफ़ शतक लगाने वाले हाशिम अमला (8 मैच में 315 रन), फ़ॉर्म में दिख रहे मार्टिन गप्तिल (2 मैच में 73 रन) और 178 के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाज़ी कर रहे कप्तान ग्लेन मैक्सवेल (9 मैच में 193 रन) बेंगलुरु के ख़िलाफ़ जीत हासिल करने का माद्दा रखते हैं. पंजाब के गेंदबाज़ बेंगलुरु के ख़िलाफ़ जितना दम दिखाएंगे उनकी टीम की कामयाबी उतनी आसान साबित हो सकती है. बेंगलुरु के कप्तान सहित खिलाड़ियों के लिए ये साख की लड़ाई है जबकि बेंगलुरु के ख़िलाफ़ जीत 2014 में फ़ाइनल तक का सफ़र कर चुकी पंजाब टीम के लिए टॉप फ़ोर में पहुंचने का शानदार मौक़ा बना सकती है.
बेंगलुरु में होने वाले मैच से पहले नेट्स में अभ्यास के दौरान विराट कोहली के आत्मविश्वास में कोई कमी नहीं दिखी. कप्तान विराट ने अबतक 7 मैचों में क़रीब 35 के औसत से 3 अर्द्धशतकों के सहारे 239 रन बनाए हैं जिन्हें यकीनन बुरा नहीं कहा जा सकता. फिर भी विराट के लिए राहत के पल मैदान के बाहर ही नज़र आते हैं. विराट इन दिनों अपनी बॉलीवुड एक्टर दोस्त अनुष्का के साथ नज़र आ रहे हैं जिन्होंने 1 मई को अपना 29वां जन्मदिन मनाया है. लेकिन मैदान पर हालात एकदम अलग हैं. तीन बार फ़ाइनल खेल चुकी बेंगलुरु की टीम अबतक टूर्नामेंट में तीन मैच भी नहीं जीत पाई (11मैच, 2 जीत, 8 हार, 1 बेनतीजा, 5 अंक) है.
बेंगलुरु और विराट की फ़िक्र की बड़ी वजहें उनके स्टार खिलाड़ी ही हैं. जीनियस एबी डिविलियर्स (196 रन) चोटिल रहे हैं, बेंगलुरु के लिए सबसे ज़्यादा 241 रन बनाने वाले केदार जाधव बेरंग दिखे हैं और दस हज़ारी क्रिस गेल (6 मैच, 77 रन, 25.33 औसत, 1 अर्द्धशतक) के क्या कहने. गेल इस सीज़न इस घरेलू टूर्नामेंट के जितनी जल्दी हो सके बीत जाने की दुआएं मांग रहे होंगे. पवन नेगी (9 मैच में 10 विकेट), युज़वेंद्र चहल (10 मैच में 11 विकेट) और कैरीबियाई लेग स्पिनर सैमुअल बद्री (5 मैच में 9विकेट) के निजी आंकड़े बेशक उतने बुरे ना नज़र आएं. लेकिन गेंदबाज़ी इस टीम की कमज़ोर कड़ी ही साबित हुई है.
ग्लेन मैक्सवेल और उनकी टीम के दूसरे स्टार्स को इन दिनों एक विज्ञापन के लिए साइकिल की सवारी करनी पड़ी. उनकी टीम की रफ़्तार मैदान पर भी कुछ ज़्यादा तेज़ नहीं दिखाई दी है. इस टीम ने अबतक 11 में से 4 मैच जीते हैं. लेकिन इस टीम के प्ले ऑफ़्स में पहुंचने की उम्मीद बरक़रार है. इसलिए कप्तान ग्लेन मैक्सवेल नेट्स पर अपनी टीम का दबाव कम करने की कोशिश में लगे दिख रहे हैं.
मुंबई के ख़िलाफ़ शतक लगाने वाले हाशिम अमला (8 मैच में 315 रन), फ़ॉर्म में दिख रहे मार्टिन गप्तिल (2 मैच में 73 रन) और 178 के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाज़ी कर रहे कप्तान ग्लेन मैक्सवेल (9 मैच में 193 रन) बेंगलुरु के ख़िलाफ़ जीत हासिल करने का माद्दा रखते हैं. पंजाब के गेंदबाज़ बेंगलुरु के ख़िलाफ़ जितना दम दिखाएंगे उनकी टीम की कामयाबी उतनी आसान साबित हो सकती है. बेंगलुरु के कप्तान सहित खिलाड़ियों के लिए ये साख की लड़ाई है जबकि बेंगलुरु के ख़िलाफ़ जीत 2014 में फ़ाइनल तक का सफ़र कर चुकी पंजाब टीम के लिए टॉप फ़ोर में पहुंचने का शानदार मौक़ा बना सकती है.
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