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महिला वकील पर पति का जानलेवा हमला: सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान, दिल्ली पुलिस कमिश्नर को दिए सख्त निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की महिला वकील पर पति के हमले मामले में स्वतः संज्ञान लेकर जांच के आदेश दिए हैं. अदालत ने पीड़िता के इलाज और बच्चों की सुरक्षा के लिए नेशनल लीगल सर्विस अथॉरिटी को वित्तीय सहायता जारी करने को कहा है.

महिला वकील पर पति का जानलेवा हमला: सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान, दिल्ली पुलिस कमिश्नर को दिए सख्त निर्देश
  • सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की महिला वकील पर पति द्वारा किए गए जानलेवा हमले का स्वतः संज्ञान लेकर मामला सुना
  • अदालत ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को महिला ACP या एडिशनल DCP रैंक की अधिकारी से जांच कराने के आदेश दिए
  • पीड़िता के इलाज और उसकी बेटियों के लिए नेशनल लीगल सर्विस अथॉरिटी को अंतरिम वित्तीय सहायता जारी करनी होगी
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नई दिल्‍ली:

दिल्ली की एक महिला वकील पर उसके पति द्वारा किए गए बर्बर जानलेवा हमले के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा दखल देते हुए स्वतः संज्ञान लिया है.  CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस कमिश्नर को कई अहम आदेश जारी किए हैं. साथ ही पीड़िता की गंभीर स्थिति को देखते हुए अदालत ने नेशनल लीगल सर्विस अथॉरिटी (NALSA) को निर्देश दिया कि वह पीड़िता के इलाज और उसकी बेटियों की देखभाल के लिए अंतरिम वित्तीय सहायता राशि मंगलवार तक जारी करे.

पीड़िता की वकील ने अदालत को बताया कि महिला वकील पर उसके पति ने बेरहमी से चाकू से हमला कर घायल कर दिया था. घायल अवस्था में पीड़िता ने PCR और अपने भाई को फोन किया. इसके बाद उसे इलाज के लिए तीन अस्पतालों- कैलाश अस्पताल, आरके अस्पताल और जीटीबी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन गंभीर हालत का हवाला देकर सभी ने इलाज से इनकार कर दिया. 

मामले की जांच महिला ACP या एडिशनल DCP अधिकारी से कराई जाए

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को आदेश दिया कि मामले की जांच महिला ACP या एडिशनल DCP रैंक की अधिकारी से कराई जाए. पीड़िता की दो नाबालिग बच्चियां फिलहाल पति के परिवार के पास हैं. आरोप है कि बच्चों को रात में घर के बाहर छोड़ दिया गया. कोर्ट ने बच्चियों का पता लगाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया है. बताया जा रहा है कि तीसरा बच्चा मायके वालों के साथ है. 

अदालत ने इलाज से इनकार करने वाले तीनों अस्पतालों के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए हैं. CJI ने सवाल उठाया कि आपातकाल में इलाज से इनकार क्यों किया गया? सुनवाई में ASG ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि आरोपी पति को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. पीड़िता का इलाज एम्स ट्रॉमा सेंटर में चल रहा है और उसकी हालत स्थिर है. FIR भी दर्ज कर ली गई है. ससुराल पक्ष के लोग फिलहाल फरार हैं. CJI सूर्यकांत ने कहा कि पीड़िता एक साहसी महिला है और उसे फिलहाल अपनी सेहत पर ध्यान देना चाहिए. अदालत ने घटना की शिकायत मिलते ही तुरंत मामला दर्ज कर लिया था. यह मामला महिलाओं की सुरक्षा, घरेलू हिंसा और अस्पतालों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

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