विज्ञापन

हिंदू आबादी के बावजूद बंगाल में BJP के लिए सत्ता क्यों बनी चुनौती? जानें हर एक फैक्टर

जनसांख्यिकी, नेतृत्व, संगठनात्मक ढांचा और स्थानीय राजनीतिक व्यवहार, इन सभी पहलुओं पर संतुलित रणनीति के बिना सत्ता की राह आसान नहीं है. हालांकि बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच यह भी माना जा रहा है कि परिस्थितियां स्थिर नहीं हैं और भविष्य में तस्वीर बदल सकती है.

हिंदू आबादी के बावजूद बंगाल में BJP के लिए सत्ता क्यों बनी चुनौती? जानें हर एक फैक्टर
बंगाल की सत्ता में बीजेपी की एंट्री कब.
  • पश्चिम बंगाल में मुस्लिम मतदाता कई विधानसभा क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका में हैं
  • राज्य की राजनीति नेतृत्व-केंद्रित है जहां मतदाता विचारधारा से अधिक व्यक्तिगत नेतृत्व को प्राथमिकता देते हैं
  • सत्ता परिवर्तन के लिए व्यापक जनआंदोलन की आवश्यकता होती है क्योंकि बिना बड़े आंदोलन के सरकार बदलना कठिन होता है
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
कोलकाता:

पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह सवाल बार-बार उठता है कि राज्य में करीब 70 प्रतिशत हिंदू आबादी होने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी अब तक सत्ता में क्यों नहीं आ पाई. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे जनसांख्यिकी, नेतृत्व, संगठनात्मक ढांचा और चुनावी व्यवहार से जुड़े कई ऐसे कारक हैं, जो बंगाल को अन्य राज्यों से अलग बनाते हैं.

ये भी पढ़ें- LIVE:  पीएम मोदी आज 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' में होंगे शामिल, जानें उनका पूरा कार्यक्रम

बंगाल की जनसांख्यिकीय संरचना में बड़े बदलाव

विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कई दशकों में पश्चिम बंगाल की जनसांख्यिकीय संरचना में बड़े बदलाव आए हैं. सीमावर्ती इलाकों में जनसंख्या परिवर्तन और मतदाता सूची के विस्तार के चलते मुस्लिम मतदाता कई विधानसभा क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका में हैं. अनुमान है कि राज्य की 100 से अधिक सीटों पर मुस्लिम वोट परिणाम तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं. ऐसे में सत्ता परिवर्तन के लिए व्यापक सामाजिक समर्थन या वोटों का बंटवारा एक बड़ा कारक माना जाता है.

नेतृत्व-केंद्रित राजनीति की परंपरा

बंगाल की राजनीति ऐतिहासिक रूप से व्यक्तित्व आधारित रही है. 1977 में ज्योति बसु के नेतृत्व में वाम मोर्चे की सरकार हो या 2011 में ममता बनर्जी के नेतृत्व में सत्ता परिवर्तन-ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मतदाताओं ने विचारधारा से अधिक नेतृत्व को प्राथमिकता दी है. विश्लेषकों का कहना है कि BJP अब तक राज्य स्तर पर ऐसा सर्वमान्य जननेता खड़ा नहीं कर पाई है, जो व्यापक जनसमर्थन जुटा सके. पश्चिम बंगाल में मतदाता आमतौर पर लंबे समय तक एक ही दल को सत्ता में बनाए रखते हैं. 

बदलाव के लिए व्यापक जनआंदोलन की जरूरत

कांग्रेस के बाद तीन दशक से अधिक समय तक वाम मोर्चा और उसके बाद लगातार तृणमूल कांग्रेस की सरकार-यह परंपरा दर्शाती है कि राज्य में सत्ता परिवर्तन तभी होता है जब बड़े स्तर पर जन आंदोलन खड़ा हो.  राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बिना व्यापक जनआंदोलन के सत्तारूढ़ दल को हटाना यहां आसान नहीं होता.

धन-बल और स्थानीय प्रभाव

राज्य के कई हिस्सों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों पर स्थानीय प्रभाव और संसाधनों की भूमिका अहम मानी जाती है. चुनावी विश्लेषकों के अनुसार, जिन दलों की जमीनी पकड़ मजबूत होती है, वे इन वर्गों तक सीधे पहुंच बना लेते हैं.ऐसे मतदाता अक्सर वैचारिक प्रतिबद्धता के बजाय स्थानीय परिस्थितियों और तात्कालिक लाभों को ध्यान में रखकर मतदान करते हैं. अन्य राज्यों में जहां चुनावी ‘लहर' निर्णायक साबित होती है, वहीं बंगाल में बूथ स्तर का संगठन अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है.

2021 के विधानसभा चुनावों में यह साफ दिखा कि मजबूत जमीनी नेटवर्क के दम पर सत्तारूढ़ दल ने प्रतिकूल माहौल के बावजूद बढ़त बनाए रखी. राज्य की बड़ी आबादी सरकारी कल्याणकारी योजनाओं पर निर्भर है. मुफ्त राशन, सामाजिक सुरक्षा और अन्य लाभकारी योजनाओं का सीधा असर मतदान व्यवहार पर पड़ता है. हालांकि केंद्र सरकार भी ऐसी योजनाएं चलाती है, लेकिन राज्य सरकार की स्थानीय ब्रांडिंग और वितरण व्यवस्था चुनावी लाभ दिलाने में सहायक मानी जाती है.

भय और दबाव के आरोप

विपक्षी दलों की ओर से समय-समय पर आरोप लगाए जाते रहे हैं कि कुछ क्षेत्रों में मतदाता स्वतंत्र रूप से मतदान नहीं कर पाते. हालांकि इन आरोपों पर सत्तारूढ़ दल ने हमेशा इनकार किया है, लेकिन यह मुद्दा चुनावी बहस का हिस्सा बना रहता है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में BJP के सामने चुनौती बहुआयामी है.

जनसांख्यिकी, नेतृत्व, संगठनात्मक ढांचा और स्थानीय राजनीतिक व्यवहार, इन सभी पहलुओं पर संतुलित रणनीति के बिना सत्ता की राह आसान नहीं है. हालांकि बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच यह भी माना जा रहा है कि परिस्थितियां स्थिर नहीं हैं और भविष्य में तस्वीर बदल सकती है.

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com