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सातों झीलें सूखीं, महज 8% पानी... तीन तरफ से समंदर से घिरा मुंबई बूंद-बूंद को क्यों तरस रहा है?

मुंबई को सात झीलों से पानी मिलता है, लेकिन इनमें पानी लगभग खत्म हो गया है. अगर बारिश नहीं होती है तो झीलें पूरी तरह से सूख सकती हैं.

सातों झीलें सूखीं, महज 8% पानी... तीन तरफ से समंदर से घिरा मुंबई बूंद-बूंद को क्यों तरस रहा है?
मुंबई पानी के लिए पूरी तरह से मॉनसून पर निर्भर है.
मुंबई:

मुंबई... सपनों का शहर... लाखों भारतीय हर साल मुंबई आते हैं, ताकि अपने सपने पूरे कर सकें. कुछ के सपने पूरे होते भी हैं. कुछ के अधूरे रह जाते हैं. मुंबई में वह सबकुछ है, जो उसे भारत का सबसे अमीर शहर बनाता है. लेकिन इस मुंबई में वह नहीं है जो जीने के लिए जरूरी है. और वह है पानी.

तीन तरफ से समंदर से घिरे मुंबई में पानी की जबरदस्त किल्लत है. ये किल्लत इतनी बड़ी है कि कुछ ही दिन का पानी बचा है. अगर बारिश नहीं हुई तो मुंबई में भयानक पानी का संकट आ सकता है. 

पिछले साल मुंबई में अच्छी बारिश हुई थी. लेकिन इस साल अब तक नाममात्र की बारिश हुई है. मॉनसून अब तक आया नहीं है. मॉनसून में देरी से आने के कारण मुंबई में पानी की किल्लत हो रही है. आलम ये है कि मुंबई को जिन 7 झीलों से पानी मिलता है, उनमें अब 10% से भी कम पानी बचा है. बृहन्मुंबई नगम निगम (BMC) ने पानी की समस्या को देखते हुए पूरे शहर में पानी की सप्लाई में 10 फीसदी की कटौती कर दी है. सभी कंस्ट्रक्शन साइट और स्विमिंग पूल में पानी सप्लाई रोक दी गई है.

मुंबई को कहां से मिलता है पानी?

मुंबई वालों को पीने का पानी 7 झीलों से मिलता है. ये झीलें हैं- भातसा, मिडिल वैतरणा, अपर वैतरणा, मोदक सागर, तान्सा, विहार और तुलसी. 

डेटा बताता है कि सभी सातों झीलें लगभग सूख गई हैं. BMC के मुताबिक, 22 जून तक सभी सातों झीलों में सिर्फ 13 हजार करोड़ लीटर पानी ही बचा है. जबकि, इनकी क्षमता 1,44,736 करोड़ लीटर की है. इसका मतलब हुआ कि क्षमता से सिर्फ 8.34% पानी ही इन झीलों में है. जबकि, पिछले साल तक 26% से ज्यादा पानी था.

BMC का कहना है कि मुंबई को हर दिन लगभग 446 करोड़ लीटर से ज्यादा पानी चाहिए. पानी की ये जरूरत इन्हीं सात झीलों से होती है. लेकिन अब पानी की किल्लत के कारण सप्लाई और डिमांड में काफी अंतर देखने को मिल रहा है. 

झीलों की सूखने की वजह क्या?

झीलों की सूखने की सबसे बड़ी वजह बारिश का न होना है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को कहा, 'राज्य में हालात बहुत मुश्किल हो गए हैं, क्योंकि बारिश में देरी हुई है और बारिश की भारी कमी है. जून में अब तक महाराष्ट्र में सामान्य से लगभग 80% कम बारिश हुई है. कुछ जिलों में तो बारिश की एक बूंद भी नहीं गिरी है.'

BMC का डेटा बताता है कि इन सातों झीलों में अब तक बारिश की एक बूंद नहीं गिरी है. अपर वैतरणा, मिडल वैतरणा, भात्सा, विहार और तुलसी में तो इस बार बारिश का पानी बिल्कुल नहीं आया. सिर्फ मोदक सागर में 7 मिलीमीटर और तान्सा में 13 मिलीमीटर बारिश ही हुई है. 

एक रिपोर्ट के अनुसार, झीलों में मौजूद पानी का हर प्रतिशत लगभग तीन दिन की सप्लाई के लिए काफी है. अभी इन सातों झीलों में 8% के आसपास पानी ही है. इसका मतलब हुआ कि सिर्फ 24 दिन की सप्लाई बाकी है.

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क्यों मॉनसून है जरूरी?

मुंबई समंदर के किनारे बसा है, इसलिए यहां जमीन से पानी (ग्राउंडवॉटर) नहीं निकाला जा सकता. अगर पानी निकालते हैं तो वह खारा होगा. 

मुंबई में पीने के पानी के लिए दूसरे स्रोत नहीं है. ये शहर अपनी सात झीलों में मॉनसून के दौरान जमा होने वाले पानी पर बहुत ज्यादा निर्भर है. जून से सितंबर के बीच होने वाली बारिश से ये भरती हैं, जिनसे पूरे साल पानी की सप्लाई होती है. 

मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, अब तक मुंबई में 247.9 मिमी बारिश हो जानी चाहिए थी, लेकिन इसमें से सिर्फ 4.3 मिमी बारिश ही हुई है. यानी, सामान्य से 98% कम. अल-नीनो के कारण बारिश हो नहीं रही है. मुंबई में अब तक मॉनसून पहुंचा भी नहीं है. मौसम विभाग का अनुमान है कि 25 और 26 जून को बारिश हो सकती है.

कुल मिलाकर, मुंबई पीने के पानी के लिए पूरी तरह से बारिश पर निर्भर है. अगर बारिश नहीं होती है और झीलों में पानी नहीं आता है, तो मुंबई वालों के लिए ये साल मुश्किल भरा हो सकता है.

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