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अपने देश में शिवाजी की मूर्ति क्यों लगवाना चाहता है इजरायल, भारत में क्या है इजरायलियों का योगदान

इजरायल अपने किसी बड़े शहर में शिवाजी महाराज की एक प्रतिमा लगवाना चाहता है. महाराष्ट्र सरकार इसमें योगदान देने के लिए तैयार हो गया है. मराठा और इजरायली के बीच में क्या संबंध है.

अपने देश में शिवाजी की मूर्ति क्यों लगवाना चाहता है इजरायल, भारत में क्या है इजरायलियों का योगदान
नई दिल्ली:

इजरायल ने अपने देश में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा लगाने की घोषणा की है.यह पिछले सप्ताह शिव राज्याभिषेक दिवस के अवसर पर मुंबई में इजरायल के महावाणिज्यदूत यानिव रेवाच ने की. उन्होंने कहा कि यह परियोजना भारतीयों को इजरायलियों से जोड़ेगी. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि सरकार इस काम में इजरायल का सहयोग करेगी. आइए जानते हैं कि इजरायल अपने यहां शिवाजी की प्रतिमा क्यों लगाना चाहता है और महाराष्ट्र-इजरायल में कोई संबंध है क्या. 

इजरायली महावाणिज्यदूत पिछले दिनों शिव राज्याभिषेक दिन पर आयोजित एक कार्यक्रम में यह घोषणा की. इसके बाद रेवाच ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा,''हम छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रभाव और भारत के लिए उनके महत्व को भलीभांति समझते हैं. हमारा विचार महाराज की एक विशाल प्रतिमा बनवाकर उसे इजरायल भेजने की है. यह एक सामान्य परियोजना से कहीं बढ़कर होगी, बल्कि यह एक दीर्घकालिक परियोजना होगी. इस परियोजना के माध्यम से भारतीय लोग इजरायली लोगों से भी जुड़ेंगे. हमारी योजना इसे इजरायल के किसी बड़े शहर में ले जाने की है.'' उन्होंने कहा कि शिवाजी की विरासत के लायक स्मारक बनाने के लिए इजरायल ने ऐतिहासिक संदर्भों, कलात्मक परामर्श और डिजाइन संबंधी विचारों पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से सहयोग मांगा है. रेवाच ने इसको लेकर फडणवीस को एक पत्र भी लिखा था. उसमें उन्होंने कहा था,''हमारा मानना ​​है कि इजरायल में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा इजरायल और भारत के बीच घनिष्ठ संबंधों का एक सशक्त प्रतीक होगी. महाराष्ट्र और भारतीय यहूदी समुदाय के बीच ऐतिहासिक संबंधों को देखते हुए, इस तरह का स्मारक विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा, जिनके कई वंशज आज इजरायली समाज में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं.'' 
 

इजरायल की इस पहल पर फडणवीस ने रेवाच के एक एक्स पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए एक्स पर लिखा,'' यह बहुत बड़ी खबर है! शिव राज्याभिषेक दिन के शुभ अवसर पर, इजरायल के सीजी यानिव रेवाच को इजरायल में छत्रपति शिवाजी महाराज की भव्य प्रतिमा स्थापित करने की इस ऐतिहासिक घोषणा के लिए हार्दिक धन्यवाद. महाराष्ट्र सरकार इस ऐतिहासिक पहल को पूरा समर्थन देगी. जय भवानी, जय शिवाजी!''

बेने इजरायलियों का भारत आगमन

दरअसल ईशा पूर्व के एक यूनानी राजा एंटिओकस चतुर्थ एपिफेन्स के अत्याचारों से परेशान होकर कुछ यहूदी सुरक्षित जगह की तलाश में भारत पहुंचे थे. इन लोगों ने महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र को बसने के लिए चुना था. इन लोगों को इजरायल की संतानें या 'बेने इजरायल' (Bene Israel) कहा जाता था.तेल निकालना इन लोगों का पेशा था. ये लोग शनिवार को आराम करते थे. इसलिए इन्हें बोलचाल में 'शनिवारी तेली' कहा जाता था. बेने इजरायली समुदाय में बच्चों को जन्म के बाद एक हिब्रू नाम और एक स्थानीय नाम दिया जाता था. पुरुषों के लिए आबाजी, बापूजी, तानाजी जैसे नाम और महिलाओं के लिए सोनाबाई, अंबाई और बैनाबाई जैसे नाम प्रचलित थे. 

बेने इजरायली अपने युद्ध कौशल के लिए भी मशहूर थे. छत्रपति शिवाजी महाराज ने उनकी सैन्य क्षमता को पहचाना. उन्होंने  बेने इजरायली समुदाय के कई लोगों को अपनी सेना में शामिल किया. इन लोगों ने मराठा स्वराज्य की स्थापना और विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान दिया. आरोन चुर्रिकर नाम के एक बेने इजरायली को 17वीं शताब्दी में मराठा नौसेना के बेड़े का नायक (कमांडर) बनाया गया था.वहीं शालोम जोसेफ इसाक सैमुअल तलकर मराठा लाइट इंफैंट्री में हवलदार थे. लेफ्टिनेंट एलिस एश्टन, तीसरी मराठा लाइट इंफैंट्री में काम करते थे, वो इजरायल के स्वतंत्रता आंदोलन में भी शामिल थे.मुंबई की प्रसिद्ध सैमुअल स्ट्रीट का नाम सैमुअल दिवेकर के नाम पर है, जो बेने इजरायल समुदाय से थे. मराठा लाइट इंफैंट्री के कमांडेंट के रूप में उन्होंने टीपू सुल्तान के खिलाफ लड़ाई में हिस्सा भी लिया था.

वो इजरायली जिन्होंने कभी निष्ठा नहीं बदली

बेने इजरायली समुदाय के कुछ परिवार जंजीरा के शासकों की सेवा में भी थे. एक युद्ध में जब वे मराठों के हाथों बंदी बनाए गए, तब उन्होंने अपनी निष्ठा बदलने से इनकार कर दिया और प्राण त्याग दिए. उनकी वफादारी से प्रभावित होकर मराठा सेनापति ने उसी परिवार के दो अन्य सदस्यों सैमुअल (समाजी) और अब्राहम (आबाजी) को मराठा नौसेना में महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया था.

इस प्रकार बेने इजरायल यहूदियों ने महाराष्ट्र और भारत के इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान दिया. उन्होंने मराठा साम्राज्य की सेना और नौसेना में सेवा की, व्यापार और समाज में अपनी पहचान बनाई और भारत और इजरायल के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने में भूमिका निभाई. 

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