टीएमसी ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. 20 बागी सांसदों की अयोग्यता पर लोकसभा स्पीकर की देरी को चुनौती दी गई है. सीजेआई सूर्य कांत की बेंच इस मामले में सुनवाई करने वाली है.
जानकारी के लिए बता दें कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा पार्टी के 20 बागी सांसदों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला लेने में हो रही देरी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. यह याचिका TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के माध्यम से दाखिल की गई है.
TMC ने इन 20 सांसदों के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष अलग-अलग अयोग्यता याचिकाएं दायर की थीं. इन सांसदों ने TMC से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय का दावा किया है और लोकसभा में अलग समूह के रूप में मान्यता की मांग की है.
TMC ने संविधान की दसवीं अनुसूची का हवाला देते हुए कहा है कि विलय के आधार पर अयोग्यता से छूट तभी मिल सकती है जब मूल राजनीतिक दल का किसी दूसरे राजनीतिक दल में विलय हो और उस दल के कम-से-कम दो-तिहाई विधायक दल के सदस्य ऐसे विलय पर सहमत हों.
पार्टी का तर्क है कि केवल दो-तिहाई सांसदों का किसी दूसरे दल में शामिल हो जाना अपने आप में दसवीं अनुसूची के तहत वैध विलय नहीं बन जाता. TMC के मुताबिक, यहां मूल राजनीतिक दल का विलय होना जरूरी है.
TMC ने सुप्रीम कोर्ट के 2023 के महाराष्ट्र शिवसेना मामले में दिए गए सुभाष देसाई फैसले पर भी भरोसा किया है. पार्टी का कहना है कि इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने मूल राजनीतिक दल और उसके विधायी दल के बीच अंतर को स्पष्ट किया था. TMC की दलील है कि मूल राजनीतिक दल को प्राप्त अधिकारों का इस्तेमाल केवल विधायी दल अपने स्तर पर नहीं कर सकता. इसी आधार पर पार्टी का कहना है कि 20 सांसदों का समूह स्वयं यह तय नहीं कर सकता कि मूल TMC का किसी अन्य राजनीतिक दल में विलय हो गया है.
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