- फ्लाइट में हुए हमले के बाद कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी को राष्ट्रीय सम्मान दिलाने की मांग उठी है
- फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने पीएमओ को कैप्टन स्मित के लिए वीरता पुरस्कार की सिफारिश की है
- गंभीर घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित ने फ्लाइट को सुरक्षित तबुक सऊदी अरब की ओर मोड़कर नियंत्रण बनाए रखा था
दुबई से तेल अवीव जा रही flydubai की फ्लाइट FZ1073 में 30 सितंबर को हुए जानलेवा हमले के बाद भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी को अब सम्मान दिलाने की मांग उठी है. फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को पत्र लिखकर कैप्टन स्मित के लिए 'राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार' की सिफारिश की है.
FIP ने अपनी चिट्ठी में कहा है कि कैप्टन स्मित पर कॉकपिट के अंदर ही उनके साथी फर्स्ट ऑफिसर ने गंभीर हमला किया था. हमले में कैप्टन स्मित गंभीर रूप से घायल हो गए थे. फिर भी उन्होंने यात्रियों और क्रू की सुरक्षा को प्राथमिकता दी.
पायलट संगठन ने अपनी सिफारिशें सिविल एविएशन सेक्रेटरी और DGCA को भी भेजी हैं.
स्मित मच्छार को क्यों मिलना चाहिए वीरता पुरस्कार?
FIP ने अपनी चिट्ठी में यह भी बताया है कि कैप्टन स्मित मच्छार को ब्रेवरी अवॉर्ड क्यों मिलना चाहिए? FIP ने लिखाः-
- हमला होने के बाद कैप्टन स्मित गंभीर रूप से घायल हो गए थे. इसके बावजूद उन्होंने फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 का संचालन जारी रखा.
- कॉकपिट में हुई घटना के बाद फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 को सुरक्षित रूप से सऊदी अरब के तबुक की ओर मोड़ दिया गया था. उड़ान में 174 यात्री और 8 क्रू सदस्य सवार थे.
- गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित ने विमान पर नियंत्रण बनाए रखा और महत्वपूर्ण निर्णय लिए.
- कैप्टन स्मित ने अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा से ऊपर यात्रियों और क्रू की सुरक्षा को प्राथमिकता दी.
पायलटों के संगठन ने PMO से अनुरोध किया है कि उचित जांच-पड़ताल के बाद कैप्टन स्मित को 'नेशनल ब्रेवरी अवॉर्ड' देने पर विचार किया जाए.
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शिवसेना ने की अशोक चक्र देने की मांग
कैप्टन स्मित ने फ्लाइट में जो बहादुरी दिखाई, उसके लिए पूरी दुनिया में उनकी तारीफ हो रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शुक्रवार को उनसे वीडियो कॉल पर बात की.
इसी बीच शिवसेना सांसद मिलिंद देवड़ा ने भी प्रधानमंत्री मोदी को चिट्ठी लिखकर कैप्टन स्मित मच्छार को 'अशोक' चक्र से सम्मानित करने की मांग की है.
उन्होंने कहा कि घायल होने के बाद भी कैप्टन स्मित मच्छार ने हिम्मत नहीं हारी. कॉकपिट का दरवाजा खुलवाया ताकि यात्री और क्रू अंदर आकर मदद कर सकें. उनकी बहादुरी से 174 यात्रियों की जान बच गई.

देवड़ा ने लिखा कि 'कैप्टन ने जो किया वो नौकरी से कहीं ऊपर था. अपनी जान से ज्यादा दूसरों की जान को रखा.
उन्होंने समझाया कि अशोक चक्र सिर्फ सेना को नहीं, आम नागरिक को भी मिल सकता है, जो दुश्मन के सामने न होते हुए भी सबसे बड़ी बहादुरी दिखाए. उन्होंने लिखा कि इससे युवाओं को संदेश जाएगा कि बहादुरी सिर्फ जंग के मैदान में नहीं दिखती, पायलट, डॉक्टर, टीचर, छात्र कोई भी दिखा सकता है.
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