भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम का सोमवार को ऐलान हो गया. अब इसके बाद तीन चुनावी राज्यों के प्रभारी भी तय कर दिए गए हैं. साल की शुरुआत में यूपी, पंजाब, उत्तराखंड समेत 5 राज्यों में चुनाव होने हैं. इनमें उत्तर प्रदेश सबसे अहम हैं, जहां लोकसभा की भी सबसे ज्यादा 80 सीटें हैं. ऐसे में यूपी में तीसरी बार विधानसभा चुनाव जीतना भाजपा के भविष्य के लिहाज से भी अहम है. शायद इसीलिए संगठन के कामकाज के सबसे मजबूत लोगों में से एक विनोद तावड़े को यूपी चुनाव का प्रभारी बनाया गया है. विनोद तावड़े की यूपी में नियुक्ति चर्चा बटोर रही है क्यों यह राजनीतिक लिहाज से सबसे बड़ा सूबा है. विनोद तावड़े का सफर बहुत आसान नहीं रहा है.
महाराष्ट्र के विनोद तावड़े को उनके गृह राज्य में मंत्री तक बनने का मौका मिला था, लेकिन 2019 में विधानसभा टिकट भी नहीं मिल सका था. एबीवीपी से राजनीतिक करियर शुरू करने वाले विनोद तावड़े महाराष्ट्र भाजपा में कई अहम पदों पर रहे थे. फिर विधान परिषद सदस्य रहे और वहां नेता विपक्ष की भूमिका में थे. तावड़े ने बोरिवली विधानसभा सीट से 2014 में जीत हासिल की थी. इसके बाद वह फडणवीस सरकार में मंत्री बने और एजुकेशन, मेडिकल एजुकेशन, स्पोर्ट्स और युवा मामलों जैसे विभाग संभाले थे. फिर 2019 का विधानसभा चुनाव आया तो उन्हें टिकट ही नहीं मिल सका. विनोद तावड़े के लिए यह बड़ा राजनीतिक झटका था. लेकिन उनकी वापसी हुई और वह महाराष्ट्र की बजाय दिल्ली बुला लिए गए.
5 साल तक मंत्री रहने के बाद कट गया था तावड़े का टिकट
पूरे 5 साल तक मंत्री रहे विनोद तावड़े को टिकट न मिलना हैरान करने वाला था. उनके स्थान पर बोरिवली से सुनील राणे को मौका मिला था. इसके साथ ही विनोद तावड़े महाराष्ट्र की सियासत से बाहर हो गए, लेकिन देश भर में उनकी भूमिका भाजपा ने बढ़ा दी. बिहार और हरियाणा जैसे राज्यों के चुनाव में वह प्रभारी रहे और पार्टी को बड़ी जीत दिलाई. अब उन्हें यूपी का इंचार्ज बनाया गया है. 2019 से 2022 तक उनके पास कोई बड़ी भूमिका नहीं थी. फिर जब राष्ट्रपति चुनाव आया तो तावड़े को भाजपा की ओर से इलेक्शन मैनेजमेंट कमेटी का सह-संयोजक बनाया गया. फिर वह 2024 में भाजपा के सदस्यता अभियान के प्रभारी बने.
मीडिया की सुर्खियों से दूर, पर जमीनी काम में रखते हैं महारत
यहां उन्होंने संगठन को बूथ लेवल तक मजबूत करने के प्रयास किए. लेकिन उन्हें सबसे ज्यादा चर्चा तब मिली, जब वह बिहार के प्रभारी बने और चुनाव में शानदार जीत दिलाई. इस चुनाव में उनके सांगठनिक कौशल की भी परीक्षा हुई, जिसमें वह अव्वल आए. तावड़े की खासियत यह है कि वह बहुत चर्चा में रहे बिना जमीन पर काम करना पसंद करते हैं. मीडिया की सुर्खियों में वह भले नहीं रहते, लेकिन कार्यकर्ताओं से संपर्क, गठबंधन वाले दलों से समन्वय में वह आगे हैं. बिहार में जेडीयू के साथ तालमेल बेहतर करने में उनकी भूमिका रही थी.
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