- मौलाना महमूद मदनी ने एक बयान में कहा कि एक खास समुदाय को कानूनी, सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर किया जा रहा है
- मदनी ने जिहाद शब्द को गलत तरीके से बदनाम करने और मुसलमानों की तौहीन करने की आलोचना की है
- उन्होंने जिहाद को केवल हिंसा नहीं बल्कि अन्याय के खिलाफ पवित्र कर्तव्य बताया और सुप्रीम कोर्ट पर सवाल उठाए
Maulana Mahmood Madani News: मौलाना महमूद मदनी के बयान ने नए विवाद को जन्म दे दिया है. इसे लेकर अब सियासत भी तेज होती दिख रही है. मौलाना महमूद मदनी ने अपने एक बयान में कहा है कि एक खास समुदाय को जबरदस्ती टारगेट किया जा रहा है. इस समयुदाय के लोगों को कानूनी तौर पर कमज़ोर, सामाजिक रूप से अलग-थलग और आर्थिक रूप से बेइज्जत किया जा रहा है. मदनी के इस बयान को लेकर बवाल मचा हुआ है. बीजेपी ने भी उनके इस बयान पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है. अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये मौलाना महमूद मदनी हैं कौन? जिनके एक बयान से इतना बवाल हो गया है.
चलिए आपको बताते हैं कि आखिर मौलाना महमूद मदनी हैं कौन? मौजूदा समय में मौलाना महमूद मदनी जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष हैं. उनका जन्म वर्ष 1964 में हुआ था. मदनी को एक प्रतिष्ठित इस्लामी विद्वान होने के साथ-साथ एक प्रभावशाली धर्मगुरु भी हैं. साथ ही साथ वो राजनीतिक-सामाजिक स्तर पर भी काफी सक्रिय हैं. अगर बात मदनी के परिवार की जाए तो उनका परिवार मुस्लिम समाज में सुदारवादी विचारों और धार्मिक नेतृत्व के लिए जाना जाता है. मदनी के दादा, हुसैन अहमद मदनी, भारत के प्रमुख इस्लीमा विद्वानों में से एक थे.
मदनी ने अपने बयान में क्या कुछ कहा था
मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि इस्लाम के दुश्मनों ने 'जिहाद' शब्द को बदनाम किया है. लव-जिहाद, लैंड-जिहाद और थूक-जिहाद जैसे शब्दों को मुसलमानों की तौहीन करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. उन्होंने अपने बयान में कहा है कि जिहाद केवल हिंसा नहीं है यह पवित्र कर्तव्य है. जहां अन्याय हो, जिहाद होना चाहिए. जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा. मदनी ने तो सुप्रीम कोर्ट पर भी सवाल खड़े कर दिए. उनके इस बयान के बाद अब सियासत भी गरमाने लगी है.
बीजेपी का पलटवार
मौलाना मदनी के बयान पर भाजपा के सांसद संबित पात्रा ने तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे "भड़काऊ" और "देश को बाँटने वाला" करार दिया. पात्रा ने कहा कि आज देश में कुछ ऐसी ताकतें हैं जिनके बयान बांटने वाले हैं, जबकि देश को एक करने वाली खबरें भी हैं (जैसे कि हाल ही में जारी हुई ऐतिहासिक GDP दर).उन्होंने मदनी के बयान पर गहरी आपत्ति जताई. उन्होंने इसे गैर-जिम्मेदाराना बयान बताते हुए कहा कि हमने देखा है कि कैसे जिहाद के नाम पर कुछ लोगों ने भारत और बाहर आतंकवाद फैलाया है.
मौजूदा हालात बहुत संवेदनशील और चिंताजनक
महमूद मदनी ने यह भी कहा कि देश के मौजूदा हालात बहुत संवेदनशील और चिंताजनक हैं. दुख की बात है कि एक समुदाय को कानूनी तौर पर कमजोर, सामाजिक रूप से अलग-थलग और आर्थिक रूप से बेदखल किया जा रहा है. उनके धर्म, पहचान और वजूद को कमजोर करने के लिए मॉब लिंचिंग, बुलडोजर एक्शन, वक्फ प्रॉपर्टी पर कब्जा और धार्मिक मदरसों व सुधारों के खिलाफ नेगेटिव कैंपेन जैसी कोशिशें हो रही हैं. उन्होंने कहा कि आज मुसलमान रास्ते पर अपने आप को असुरक्षित महसूस करते हैं. उन्हें कदम-कदम पर नफरतों का सामना करना पड़ता है. महमूद मदनी ने कहा कि अब हमें तैयार भी होना पड़ेगा.
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