- ईरान के सर्वोच्च नेता सैयद अली खामेनेई की मौत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमले में हुई थी
- खामेनेई का अंतिम संस्कार 5 से 9 जुलाई तक ईरान में आयोजित किया जाएगा
- बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा अंतिम संस्कार में शामिल होंगे
ईरान के शीर्ष नेता रहे सैयद अली खामेनेई की अमेरिका और इजरायल के हमले में 28 फरवरी को मौत हो गई थी. उसके बाद से ही उनके शव को अंतिम संस्कार के लिए अब तक रखे रखा गया था. ऐसा इसलिए क्योंकि बड़ी संख्या में इस आयोजन में लोग जुटने वाले हैं और जंग के बीच यह संभव नहीं था. अब अमेरिका के साथ जब शांति समझौता लगभग तय हो गया है तो उन्हें अंतिम विदाई दी जा रही है. इस आयोजन में भारत से भी कई नेता शामिल होंगे. इन लोगों में भारत सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन शामिल हैं. विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा भी सरकार की ओर से जा रहे हैं.
विपक्ष के ये नेता होंगे शामिल?
वहीं विपक्षी नेता सलमान खुर्शीद भी ईरान जाएंगे. उनका कहना है कि वह पार्टी के प्रतिनिधि के तौर पर जाने वाले हैं. जम्मू-कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती भी जा रही हैं.
बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन को भी बुलाया था
जानकारी मिली है कि ईरान की ओर से कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खरगे और पवन खेड़ा को भी आमंत्रित किया गया था. इसके अलावा भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन को भी आमंत्रण मिला था. हालांकि उनके जाने के बारे में कोई जानकारी नहीं है. बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन का जाना उल्लेखनीय है क्योंकि वह शिया समुदाय से आते हैं. ऐसे में सरकार ने उन्हें इसलिए प्रतिनिधि के रूप में भेजा है ताकि उनके दौरे का दोनों देशों के संबंधों में एक सॉफ्ट पावर के रूप में फायदा मिल सके.
जम्मू-कश्मीर के करगिल और लद्दाख के लेह में शिया समुदाय की अच्छी खासी आबादी है और वहां ईरान के शीर्ष नेता का काफी सम्मान किया जाता है. यही नहीं खामेनेई के निधन के बाद यहां लोगों ने दुख जाहिर किया था और सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन भी किए थे.
बता दें कि खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़ीं रस्में 5से 9 जुलाई तक होंगी. खामेनेई तीन दशकों तक ईरान के सर्वोच्च नेता रहे. वह 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका द्वारा संयुक्त रूप से ईरान पर किये गए हमले में मारे गए थे. खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम पांच, छह और सात जुलाई को तेहरान और कोम में आयोजित किये जाएंगे जबकि अंतिम कार्यक्रम नौ जुलाई को मशहद शहर में होगा.
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