भारतीय रेलवे में सफर करने वाले लाखों यात्री वेटिंग लिस्ट और कंफर्म टिकट को लेकर परेशान रहते हैं. इसे लेकर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का बयान सामने आया है. रेल मंत्री ने NDTV से बात करते हुए कहा कि टिकटों की किल्लत की वजह रेलवे पर दबाव है. हालांकि भारतीय रेलवे लगातार अपने रूट में विस्तार कर रहा है. आने वाले दिनों में यह समस्या खत्म हो जाएगी. उन्होंने इसके लिए रेलवे का प्लान भी समझाया.
'ट्रेनों से सालभर में 750 करोड़ लोग करते हैं सफर'
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि ट्रेनों में वेटिंग की वजह सप्लाई डिमांड में बड़ा गैप है. हर साल ट्रेनों से 750 करोड़ लोग सफर करते हैं. वहीं देश के सड़क मार्ग से 250 करोड़ और एयरलाइंस से सिर्फ 35 करोड़ लोग ही सफर करते हैं. यह बताता है कि ट्रांसपोर्ट के लिए लोग अन्य साधनों की तुलना में ट्रेनों में कई गुना ज्यादा सफर करते हैं. उन्होंने कहा कि देश में परिवहन के अन्य साधनों की तुलना में रेलवे पर यात्रियों का दबाव ज्यादा है, जिसके कारण 'सप्लाई और डिमांड' के बीच एक बहुत बड़ा गैप यानी अंतर पैदा हो गया है.
कैसे होगा इस समस्या का समाधान?
अश्विनी वैष्णव ने कंफर्म टिकट की समस्या का समाधान भी बताया. उन्होंने कहा कि रेल मंत्रालय लगातार इसके लिए काम कर रहा है. इस दबाव से निपटने के लिए देश में दो से ढाई हजार नई ट्रेनें शुरू करनी होंगी. लेकिन इसके लिए पहले नई पटरियों को लगाना होगा. रेलवे ने करीब 70 हजार किलीमीटर रेलवे ट्रैक के अपग्रेड किया गया है. करीब 36000 किमी नई पटरियां लगाई गई हैं. नई पटरियों के लगने के बाद ट्रेनें भी बढ़ी हैं. आने वाले दिनों में रेलवे और नई ट्रेनों को शुरू करेगा, जिससे वेटिंग लिस्ट वाली समस्या से काफी हद तक समाधान मिलेगा.
पिछले 12 साल में रेलवे में क्या बदलाव हुआ?
रेल मंत्री ने बताया कि पिछले 12 साल में रेलवे में कई परिवर्तन आए. आगे भी बदलाव करने हैं. पिछले 50-60 साल में इस सेक्टर पर कम ध्यान दिया जा रहा था. अब सबसे बड़ा परिवर्तन रेलवे सुरक्षा में आया है. यूपीए के समय सेफ्टी को दरकिनार कर दिया गया. दुर्घटनाओं में करीब 90 प्रतिशत की कमी आई है. पिछला साल रेलवे के इतिहास में सबसे सुरक्षित रहा. यूपीए के समय जहां 180 दुर्घटनाएं होती थीं, पिछले साल 16 पर रोक लिया. अभी भी और प्रयास जारी है.
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